विद्यालाभ व अद्भुत विद्वत्ता की प्राप्ति हेतु


विद्यालाभ के लिए मंत्र :

‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्वाग्रे वद वद ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा ।’

विधि : जिन राज्यों में पूर्णिमा को माह का अंत माना जाता है वहाँ (अर्थात् गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि अमावस्यांत मास प्रचलनवाले राज्यों को छोड़कर) यह मंत्र 23 जून को शाम 5-03 से रात्रि 11-45 के बीच 108 बार जप लें और रात्रि 11 से 12 बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ बीजमंत्र लिख दें अथवा 24 जून को प्रातः 4-19 से दोपहर 3-54 के बीच 108 बार मंत्र जप लें और रात्रि 11 से 12 बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें ।

21 जुलाई को सभी जगह यह योग है । इस दिन सूर्योदय से रात्रि 11-45 तक 108 बार मंत्र जप लें और रात्रि 11 से 12 बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें । (इस योग के अपने यहाँ लागू पड़नेवाले किसी भी एक दिन यह प्रयोग कर सकते हैं ।)

जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा उसे विद्यालाभ व अद्भुत विद्वत्ता की प्राप्ति होगी ।

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