भक्तों की भक्ति को कैसे पुष्ट करते हैं भगवान व गुरु !

भगवान रामानुजाचार्यजी के शिष्य थे अनंतालवार (अनंतालवान) । वे तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में रहते थे । वहाँ तिरुमला की पहाड़ी पर भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर था । डाकू-चोर के भय से लोग सूरज उगने के बाद ही वहाँ जाते थे और शाम को आ जाते थे लेकिन रामानुजाचार्यजी ने अपने शिष्य को आदेश दिया : ‘‘आलवार ! तुम पहाड़ी पर रहकर तिरुपति भगवान (भगवान वेंकटेश्वर) की पूजा करो !’’

Divine Satsang by Shri VasudevanandJi : 20th September 2021

समयः 20 सितम्बर सुबह 11.50 बजे से दोपहर 1 बजे तक
स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रम, जहाँगीरपुरा, सूरत (गुजरात)
संपर्क : 9227455513/14
विशेष : श्री वासुदेवानंदजी द्वारा सत्संग हर रविवार शाम 5 से 6 तक |

Divine Satsang by Sadhvi Rekha Bahan : 19th September 2021

समयः 19 सितम्बर शाम 6.30 से 7.30 बजे तक
स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रम, मोटेरा, अहमदाबाद (गुज.)
संपर्क : 079-61210888
सत्संग का मंगलमय चैनल द्वारा लाइव प्रसारण भी होगा…

गुरु शिष्य के कल्याण के लिए सब कुछ करते हैं । उनके अन्दर निरन्तर अदम्य स्नेह की धारा बहती रहती है । उनकी हर चेष्टा सहज और सब के लिए हितकर ही होती है । – पूज्य बापूजी

आशारामजी आश्रम में हुआ एक दिवसीय विद्यार्थी शिविर का आयोजन

संत श्री आशारामजी बापू के साथ प्रशासनिक व्यवस्था दुराग्रह से कार्य ना करे मांग

जब गुरु का आश्रय होता है तो गुरु की अदृश्य कृपा हमारी रक्षा अद्भुत ढंग से करती है । – पूज्य बापूजी

चलते – फिरते भगवान देखना है तो ब्रह्मज्ञानी हैं । – पूज्य बापूजी

संसारियों की सेवा करना कठिन है क्योंकि उनकी इच्छाओं और वासनाओं का कोई पार नहीं, जबकि सदगुरु तो अल्प सेवा से ही तुष्ट हो जायेंगे क्योंकि उनकी तो कोई इच्छा ही नहीं रहा । – पूज्य बापूजी

जब गुरु का आश्रय होता है तो गुरु की अदृश्य कृपा हमारी रक्षा अद्भुत ढंग से करती है । – पूज्य बापूजी