जो वैराग्य और विवेक-विचार से सम्पन्न है वह आत्मज्ञान को पाता है ।

ईश्वर-प्रार्थना मनुष्य को विनम्र बनाती है, अहंकार को पिघलाती है ।

जो मनुष्य परमात्म-शरण में जाता है, आत्मचिंतन में लगता है उसका हृदय शुद्ध होने लगता है ।

जो आत्मज्ञानरूपी सद्वस्तु के अभ्यास में नित्य तन्मय रहते हैं, उन्हें गुरुकृपा से अपने सच्चे स्वराज्य की प्राप्ति होती है ।

व्यर्थ का बोलना, व्यर्थ का खाना, व्यर्थ के विकारों को पोषण देना – जिस दिन यह अच्छा न लगे उस दिन समझ लेना कि भगवान, गुरु और हमारे पुण्य – तीनों की कृपा एक साथ उतर रही है ।

Guru Purnima:  Transforming a Person to a Magnified Human Being

In the tapestry of Indian culture, the festival of Guru Purnima stands as a vibrant thread, weaving together reverence, gratitude, and spiritual wisdom. Celebrated on the full moon day (Purnima) […]

Relaunch of Canada Ashram Website

Yog Vedant Seva Samiti Center of Canada is a Non-Profit Organization registered with City of Brampton. Visit the website

विवेक से कार्य करनेवाला व्यक्ति सदा उन्नति के पथ पर अग्रसर होता रहता है ।

गुरु-तत्त्व में अडिग रहने के नये प्रयोग, नयी दिशा देनेवाला महापर्व: गुरुपूर्णिमा

आत्मारामी संत, सद्गुरु के हृदय में तुम जँच जाओ तो देर-सवेर तुमको ईश्वर का अमृत मिले बिना नहीं रहता । गुरु का प्रसाद हमारे जीवन में आये इसलिए राजे-महाराजे, साधक-भक्त वर्ष में गुरुपूनम को ज्यादा महत्त्व देते हैं ।

करोड़ों जन्मों के यज्ञ, जप, तप तभी सफल हुए जब आत्मज्ञानी गुरु संतुष्ट हुए ।