ग्रहणकाल का विज्ञान एवं करणीय-अकरणीय कर्म

– पूज्य बापूजी

चन्द्रग्रहण-सूर्यग्रहण का विज्ञान

खंडग्रास चन्द्रग्रहण : 28 अक्टूबर (अहमदाबाद में समय : रात्रि 1-06 से 2-22 तक अर्थात् 29 अक्टूबर 1-06 AM से 2-22 AM तक)

ग्रहण के समय सूर्य या चन्द्र की किरणों का प्रभाव पृथ्वी पर पड़ना थोड़ी देर के लिए बंद हो जाता है । इसका प्रभाव प्राणी-जगत पर भी पड़ता है । सूर्य-चन्द्र की किरणों द्वारा जो सूक्ष्म तत्त्वों में हलचल होती रहती है वह भी उस समय बंद हो जाती है । हमारे जो सूक्ष्म, सूक्ष्मतर, सूक्ष्मतम अवयव हैं उनमें भी हलचल नहींवत् हो जाती है । यही कारण है कि ग्रहण के समय कोई भी गंदा भाव या गंदा कर्म होता है तो वह स्थायी हो जाता है क्योंकि पसार नहीं हो पाता है । इसलिए कहते हैं कि ग्रहण व सूतक में भोजन तो न करें, साथ ही ग्रहण से थोड़ी देर पहले से ही अच्छे विचारों और अच्छे कर्म में लग जायें ताकि अच्छाई गहरी, स्थिर हो जाय । अच्छाई गहरी, स्थिर हो जायेगी तो व्यक्ति के स्वभाव में, मति-गति में सुख-शांति आयेगी, आयु, आरोग्य व पुष्टि मिलेगी । अगर गंदगी स्थिर होगी, रजो-तमोगुण स्थिर होंगे तो जीवन में चिंता, शोक, भय, विकार और व्यग्रता घुस जायेगी ।

ग्रहणकाल में क्या करें, क्या न करें ?

चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । परंतु जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1.5 प्रहर (4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है । इसके बाद खाने से स्वास्थ्य की बड़ी हानि होती है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।

सूतक (ग्रहण-वेध) के पहले जिन पदार्थों में कुश, तिल या तुलसी-पत्ते डाल दिये जाते हैं वे सूतक व ग्रहण काल में दूषित नहीं होते । दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें । कुश आदि डला पानी सूतककाल में उपयोग में ला सकते हैं ।

ग्रहणकाल में भोजन करने से अधोगति होती है, पेशाब करने से घर में दरिद्रता व नींद करने से रोग आते हैं तथा संसार-व्यवहार (पति-पत्नी का शारीरिक व्यवहार) करने से सूअर की योनि में जाना पड़ता है । तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है । ठगाई करनेवाला सर्पयोनि में जाता है । चोरी करनेवाले को दरिद्रता पकड़ लेती है । जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करनेवाला नारकीय योनियों में जाता है । चिंता करते हैं तो बुद्धिनाश होता है ।

ये करने से सँवरेगा इहलोक-परलोक

मंत्रदीक्षा में मिले मंत्र का ग्रहण के समय जप करने से उसकी सिद्धि हो जाती है । स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना । ग्रहण के समय किया हुआ जप, मौन, ध्यान, प्रभु-सुमिरन अनेक गुना हो जाता है ।

ग्रहण के बाद वस्त्रसहित स्नान करें ।

क्र. Column3 सूतक प्रारम्भ (सभी के लिए) सूतक प्रारम्भ (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) ग्रहण समय
1 भारत (सम्पूर्ण) 28 अक्टूबर शाम 4-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 8-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 1-06 से 2-22 (29 अक्टूबर 1-06 AM से 2-22 AM) तक
2 अफगानिस्तान (काबुल) 28 अक्टूबर दोपहर 3-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 7-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 12-06 से 1-22 (29 अक्टूबर 12-06 AM से 1-22 AM) तक
3 इज़राइल (जेरुसलम) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
4 इजिप्ट (काहिरा) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
5 इटली (रोम) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
6 इराक (बगदाद) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
7 ईरान (तेहरान) 28 अक्टूबर दोपहर 2-06 से 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 12-22 तक
8 ऑस्ट्रेलिया (कैनबरा)
9 ऑस्ट्रेलिया (पर्थ) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक
10 कतर (दोहा) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
11 कनाडा (इकालुइट, नुनावुत) 28 अक्टूबर सुबह 7-24 से 28 अक्टूबर दोपहर 11-54 से 28 अक्टूबर शाम 4-24 से 4-52 तक
12 कनाडा (ओन्टारियो)
13 ग्रीस (एथेंस) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
14 चीन (बीजिंग) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक
15 जर्मनी (बर्लिन) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
16 जापान (टोकियो) 28 अक्टूबर रात्रि 7-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 12-06 (29 अक्टूबर 12-06 AM) से 29 अक्टूबर प्रातः 4-36 से 5-52 (29 अक्टूबर 4-36 AM से 5-52 AM) तक
17 ताइवान (ताईपे) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक
18 तुर्किये (अंकारा) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
19 दक्षिण अफ्रीका (केप टाउन) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
20 दक्षिण कोरिया (सियोल) 28 अक्टूबर रात्रि 7-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 12-06 (29 अक्टूबर 12-06 AM) से 29 अक्टूबर प्रातः 4-36 से 5-52 (29 अक्टूबर 4-36 AM से 5-52 AM) तक
21 नेपाल (काठमांडू) 28 अक्टूबर शाम 4-21 से 28 अक्टूबर रात्रि 8-51 से 28 अक्टूबर रात्रि 1-21 से 2-37 (29 अक्टूबर 1-21 AM से 2-37 AM) तक
22 पाकिस्तान (इस्लामाबाद) 28 अक्टूबर दोपहर 3-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 8-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 12-36 से 1-52 (29 अक्टूबर 12-36 AM से 1-52 AM) तक
23 फ्रांस (पेरिस) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
24 बांग्लादेश (ढ़ाका) 28 अक्टूबर शाम 4-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 1-36 से 2-52 (29 अक्टूबर 1-36 AM से 2-52 AM) तक
25 ब्राजील (ब्राज़ीलिया)
26 भूटान (थिम्फू) 28 अक्टूबर शाम 4-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 1-36 से 2-52 (29 अक्टूबर 1-36 AM से 2-52 AM) तक
27 मलेशिया (कुआला लंपुर) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक
28 मॉरीशस (पोर्ट लुईस) 28 अक्टूबर दोपहर 2-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 7-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-36 से 12-52 तक
29 यू.ए.ई. (अबु धाबी) 28 अक्टूबर दोपहर 2-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 7-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-36 से 12-52 तक
30 यू.एस.ए. (कैलिफोर्निया)
31 यू.एस.ए. (न्यूयॉर्क)
32 यू.एस.ए. (वाशिंगटन डी.सी.)
33 यू.के. (लंदन) 28 अक्टूबर दोपहर 11-36 से 28 अक्टूबर शाम 4-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 8-36 से 9-52 तक
34 यूक्रेन (कीव) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
35 रूस (मॉस्को) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
36 श्रीलंका (कोलंबो) 28 अक्टूबर शाम 4-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 8-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 1-06 से 2-22 (29 अक्टूबर 1-06 AM से 2-22 AM) तक
37 सऊदी अरब (रियाद) 28 अक्टूबर दोपहर 1-36 से 28 अक्टूबर शाम 6-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 10-36 से 11-52 तक
38 सिंगापुर (सिंगापुर) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक
39 स्विट्ज़रलैंड (बर्न) 28 अक्टूबर दोपहर 12-36 से 28 अक्टूबर शाम 5-06 से 28 अक्टूबर रात्रि 9-36 से 10-52 तक
40 हांगकांग (हांगकांग) 28 अक्टूबर शाम 6-36 से 28 अक्टूबर रात्रि 11-06 से 29 अक्टूबर प्रातः 3-36 से 4-52 (29 अक्टूबर 3-36 AM से 4-52 AM) तक

REF: ISSUE370-OCTOBER-2023

Grahan Tips

  • चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम पूर्वक जप-ध्यान व् उपवास करने से कई गुना फल होता है।
  • ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।
  • भगवान वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।
  • ग्रहण के समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय‘ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्ध होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से साधक, मेधा (धारणाशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाकसिद्धि प्राप्त कर लेता है।
  • देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है। अतः सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर ( 9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालकक और रोगी डेढ़ प्रहर (4.5 – साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
  • ग्रहण वेध के पहले (सूतक से पूर्व) सभी पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल देने से, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।
  • ग्रहणकाल के बाद, सचैल (वस्त्रसहित)स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं | ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि (आसान, माला, गौमुखी आदि भी ) धो लेना चाहिए |
  • ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।
  • ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जररूतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
  • ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

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