Comments ( 6 )

  • Mamta yadav

    Yes let’s celebrate the holy book 📖 Shri mad bhagwat geeta ji , and I thanks to Sant Shri Asharamji Bapu ji who gave this precious knowledge in simplest way so that lay man also can understand this…..one must read 1 page atleast for his /her growth……million thanks and yes don’t forgot to celebrate shre geeta jyanti on 22 Dec 2023

  • Godhan Singh Negi

    Sant Shri Asharamji Bapu explained the message of Shri Krishna easily. I love the way he explained. I understood the supreme knowledge better.

  • Ankit Ved

    यह लेख भगवद गीता के शाश्वत ज्ञान की सराहना करता है, जो सांस्कृतिक और कालीन सीमाओं को पार करने वाला एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। 18 अध्याय और 700 श्लोकों के साथ, गीता सार्वभौमिक जीवन के सीख बांटती है, जो नैतिक आचरण, समग्र जीवन, और ज्ञान की प्रतिष्ठा को महत्त्वपूर्ण बनाती है। 5000 वर्षों के बाद भी इसका प्रासंगिकता बरकरार है, जो वैश्विक रूप से लाखों के दिलों में गूंथी जाती है। एल्बर्ट आइंस्टीन जैसे व्यक्तियों के उद्धारण और महात्मा गांधी के समर्थन से इसका सांस्कृतिक प्रभाव दिखता है।

    मुख्य रूप से, हॉलीवुड अभिनेता विल स्मिथ और भारत के 11वें राष्ट्रपति, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, जो की एक मुस्लिम थे , गीता में प्रेरणा पाते हैं। आज की जटिल दुनिया में, पूज्य संत श्री आशारामजी बापू जैसे आध्यात्मिक गुरु ने गीता के ज्ञान को सरल बनाकर फैलाया है, जिससे करोड़ों लोग इसे समझते हैं और अपने जीवन में उतारते हैं। गीता की बुद्धिमत्ता का मूल्यांकन करने वाले इस लेख ने प्रत्येक श्लोक की मौलिकता को पकड़ा है, जो आध्यात्मिक विकास और समृद्धि की दिशा में प्रेरित करने वाले के लिए प्रकाशक भूमिका निभाता है।

  • Bhupendra

    Its is amazing to see that our Sanatan Sanskriti is being acknowledged & praised world wide. It also shows that Gita is not just our sacred Book but a sciences which has no boundaries of caste, creed, religion or countries. Thanks to Pujya Bapuji for enlightening with such examples which boost our spirit.

  • SS Negi

    यह संत श्री आशारामजी बापू जैसे हिंदू संतों के सतसंगों का प्रभाव है कि श्रीमद् भगवदगीता की ख्याति देश विदेश में हो रही है और सनातन हिंदू धर्म की महानता को धरती के हर कोनों में स्वीकारा जा रहा है।

  • AAKASH RAJPUT

    परम पूज्य श्री आसाराम जी बापू जी ने 25 दिसंबर तुलसी पूजन दिवस की जो शुरुआत की है. वह संपूर्ण मानव समाज के लिए अमूल्य धरोहर है. भारतीय संस्कृति की महिमा और गरिमा के प्रतिसद्भाव पैदा हुआ है. जिससे संपूर्ण समाज के लोग अपनी संस्कृति परगर्व करते हैं. यह पूज्य बापू जी की देन है.

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