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Nirogta Ka Sadhan
Nirogta Ka Sadhan

"निरोगता का साधन"  बीमारी केवल शारीरिक ही नहीं हुआ करती, अगर व्यक्ति मानसिक बीमारियों जैसे - काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि से ग्रस्त है तो भी वह बीमार ही माना जायेगा । अत: पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति वह है जो शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से स्वस्थ । पूर्ण स्वस्थ तथा निरोग रहने के लिए क्या करना चाहिए – इस विषय में मार्गदर्शन हेतु ब्रह्मलीन संत साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज व पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के अमृतवचनों को संकलित कर ‘निरोगता का साधन’ पुस्तक बनायी गयी है ।

इसमें है :  

* मनुष्य की तंदुरुस्ती व शक्ति की सच्ची नींव क्या है ?

* अपने स्वास्थ्य तथा बल की रक्षा कैसे करें ?

* ...तो फिर किस कारण से हमारी शक्ति व शूरवीरता नष्ट हो गयी है ?

* जब धरती के एक युवक ने स्वर्ग की अप्सरा के प्रणय-निवेदन को ठुकराया (प्रेरणादायी प्रसंग)

* एक लुहार की वर्षों की इंतजारी, खड़ी सामने परोपकार की मूर्ति नारी, कैसे बरसी ईश्वर की कृपा भारी ?

* ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियम व उपाय

* मानव-जाति का कट्टर दुश्मन, अधःपतन में शीघ्र सहायक : तम्बाकू 

* धूम्रपान है दुर्व्यसन... (कविता)      

* तबाही के कगार पर परिवार को ले जानेवाला खतरनाक शत्रु

* इससे हो रहा स्वास्थ्य पर भयानक कुठाराघात

* हानिकारक चाय-कॉफी के बदले में पियें पाचनशक्ति व बुद्धि वर्धक तथा हृदय के लिए हितकारी पेय

* ब्रह्मलीन संत साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज के वेदांत-वचनामृत

* मन को वश में रखने के लिए...

* राष्ट्र व विश्व की सुरक्षा कैसे हो ?

* भारत को समर्थ राष्ट्र बनाना हो तो...

* पूज्य संत श्री आशारामजी बापू का अभिभावकों व विद्यार्थियों के लिए संदेश

* अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि में सहायक आसन

* स्वप्नदोष से बचाव के उपाय

* विद्वानों, चिंतकों और चिकित्सकों की दृष्टि में ब्रह्मचर्य  

* प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयीजी के उद्गार...

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