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वाह प्रभु वाह

वाह प्रभु वाह

- P. P. Sant Shri Ashramji Bapu Vadodara 25th Nov' 2012 - PART 1

                                                 
    दीक्षा मूल कारण है | जिसके जीवन में दीक्षा नही है उसके जीवन में शाश्वत सुख, गहरी सूझ-बुझ, और सद्गति भी नही | उसके जीवन में तृप्ति भी नही है, शांति भी नही है | संतोष भी नही है और परहित परायणता भी नही होगी | दीक्षा वाले व्यक्ति के जीवन में जो दिव्य गुण आते हैं, निगुरे के जीवन में वो नही हो सकते | भगवान शिवजी ने पार्वती को वामदेव गुरु से दीक्षा दिलाई | कलकत्ते की काली माता ने गदाधर पुजारी को तोतापुरी गुरु से दीक्षा दिलाई ऐसा रामकृष्ण ने लिखा है | भगवान राम के गुरु थे, भगवान कृष्ण के गुरु थे | निगुरे का नही कोई ठिकाना, चौरासी में आना-जाना, यम का बने महेमान, सुन लो चतुर सुजान, निगुरा नही रहना || निगुरा होता हिय का अँधा, खूब करे संसार का धंधा, पड़े नर्क की खान सुन लो चतुर सुजान, निगुरा नही रहना || 
      राजा मृग बड़े प्रसिद्ध थे, लेकिन निगुरे थे | मरने के बाद किरकिट हो गए | अब्राहम लिंकन, प्रेसिडेंट ऑफ अमेरिका, बड़े प्रसिद्ध थे | लेकिन मरने के बाद बेचारे प्रेत होकर व्हाइट हॉउस में भटकते दीखते हैं | मुसोलिन प्रसिद्ध था, इटली का राजा, प्रेत होके झील के किनारे अभी भी भटक रहा है | राजा अज बड़े प्रसिद्ध थे | राजा थे, बुद्धिमान थे, लेकिन निगुरे थे | मरने के बाद सांप बन गए, अजगर बन गए | जो दीक्षा लेते हैं वो सच-मुच अपना और अपनी ७-७ पीढ़ियों का भला करते हैं | 
     वास्तव में भगवान अपने हैं | अगले जन्म के माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चे अपने नही रहे | लेकिन अगले जन्म का आत्मा-परमात्मा अभी भी है | बचपन वाला आत्मा-परमात्मा अभी भी है | बचपन नही रहा, बचपन की बुद्धि भी बदल गयी, लेकिन उसको जानने वाला परमात्मा अभी भी अपना है | तो हे प्रभु आनंद दाता, हे अंतरयामी ओम........ऐसा जप करके रात को अपने कमरे को पवित्र करते जाओ | और आनंदित कर देना है हरि ओम....... प्रभुजी.......| भगवान के नाम के वायब्रेशन, परमाणु और आनंद | रात को सीधे लेट गए श्वास अंदर गया तो ओम, बाहर आया तो १, श्वास  अंदर गया तो शांति, बाहर आया तो २,........ ऐसे चिंतन करते-करते, ये पंच भौतिक शरीर का अब उपयोग नही है | मन और बुद्धि और अहँकार की अब जरूरत नही है | अब तो आत्मा-परमात्मा का मिलन | मैं परमात्मा में मिल रहा हूँ | मैं आत्मा हूँ और परमात्मा में शांत हो रहा हूँ | आपकी नींद भक्ति में बदल जायेगी | और जीवन में ऐसे-ऐसे काम होंगे के आपको लगेगा के अरे जीवन जीना तो अब सीखे | भगवान से जुड़कर आप काम करते हैं न तो भगवान बड़ी-बड़ी अच्छी प्रेरणाएँ देते हैं | इच्छा पूर्ति में जो फिसलते हैं वे खोखले हो जाते हैं | इच्छा आपूर्ति में जो दुखी होते हैं वे नीरस हो जाते हैं | लेकिन जो भगवान में प्रसन्न रहते हैं, उनकी इच्छा पूर्ति हुई तो क्या, आपूर्ति हुई तो क्या ? पुरे हैं वो मर्द जो हर हाल में खुश हैं || वे ब्रह्मज्ञान के सिंघासन तक पहुँच जाते हैं | सभी इच्छा किसी की पूरी होती भी नही और सब इच्छा किसी की भी ठुकराई भी नही जाती | इच्छा पूर्ति हो तो परोपकार, आपूर्ति हो तो शांति मौज हो गयी | इतना सा ज्ञान पकड़ ले तो बस सब पढ़ाई वालो का बाप बन जायेगा, सबका बापू | कितनी भी डिग्रियाँ हो लेकिन बापू, बापू हो जाता है | सबका बाप तो परमात्मा है जो परमात्मा से जुड़ता है वो बाप हो जाता है | 
    १२ साल के अष्टवक्र, ८०-९० साल के बाप, जनक थे | जनक को बोलते थे बेटा जनक, १२ साल के गुरु और ८०-९० साल के राजा जनक | बोलते बेटा अगर मुक्ति चाहिए तो आर्ज और शमा, पवित्रता और आत्मरस का दिव्य आनंद | १२ साल के गुरु, टेढ़ी टांगे, काला चहरा, नाटा कद, एसी चाल चले के कौन सा प्राणी आया लेकिन आत्म ज्ञान से महापुरुष बन गए |
      अब रात को सोते समय श्वास अंदर गया १........  ऐसे करते-करते तुम्हारी नींद अंतरयामी की गोद में हो जायेगी | और सुबह उठो तो मैं परमात्मा से उठा हूँ | परमात्मा मेरे आत्मा है, शांत रूप हैं, चैतन्य हैं | फूलों में सुगंध और आँखों में देखने की सत्ता, नाक में सूँघने की सत्ता और मन में सोचने की सत्ता, बुद्धि में निर्णय करने की सत्ता, सभी तुम से मिलते हैं प्रभु | ओम, आज का दिन मैं प्रसन्न रहूँगा | आपका सुमिरन करता हुआ अपनी पढ़ाई करूँगा, जो भी कुछ करूँगा | इतना हो गया, अंदर की, बुद्धि की, मन की शुद्धि के लिए | 
    अब शरीर के लिए शुद्धि के लिए कसरत करना है | हाथ उपर करके खूब खींचो उपर | बुद्धि का कार्यालय चोटी के पीछे के नदी जाल में काम करती है, सोती है हृदय में | तो जब कार्य स्वार्थ रहित होगा, अच्छा होगा तो निर्णय बढ़िया होंगे | व्यायाम...... | बाप ने डांटा और वो ऋषि-मुनि के पास चला गया, और पाणिनि मुनि बन गए बड़े विद्वान महान बन गए | उनका ग्रामर संस्कृत जगत में प्रसिद्ध है, अभी पढ़ाया जाता है | पहले तो इतने बुद्धू थे के १६ साल तक तो नापास होते थे | नापास होने से घर छोड़ना भाग जाना, आत्महत्या करना ये नीच बुद्धि है | मथा टेक करने वाले बच्चो की बुद्धि तेज हो जाती हैं | जो सुबह सूर्य उदय होने पर भी सोये रहते हैं उनकी बुद्धि कमजोर हो जाती है | 
    सिंघाड़े का आटा ५०० ग्राम या २५० ग्राम जितना चाहिए, जितना सिंघाड़े का आटा उतना ही देसी घी |  सिंघाड़े का आटा उसमें सेक लें | थोडा रंग आये फिर उसमें उतनी ही खजूर धो-धा के टुकड़े-टुकड़े करके डाल दो | मिला करे मावे जैसा लौंडा हो जायेगा | उसमें १-१ ग्राम की गोली बना लो | २, ३, ४ गोली रोज खाके दूध पिए तो १२ साल के बाद का उम्र, अगर ठिंगने हैं तो कदवान हो जायेगे, कमजोर हैं तो बलवान हो जायेंगे | वीर्य की कमी है तो वीर्यवान हो जायेंगे, दुर्बल हैं तो बलवान हो जायेंगे | 
अगर बुद्धि बढ़ाना है, याद शक्ति बढ़ाना है तो ३ काजू शहेद में चुपड़ के सरस्वते मंत्र जप कर खूब चबा-चबा के खाये बल, बुद्धि और स्मृति बढ़ेगी | ध्यान के समय ललाट में ओमकार अथवा गुरुदेव को देखे और ओम..... | इससे भी बुद्धि, मनोबल बढ़ेगा | 
(राम प्रसाद बिसमिल ---- कथा)
     एक ऐसा लड़का था के चलते-चलते गिर जावे, थक जावे | धरती पकड़के बैठना पड़े | स्कूल से आते-आते, स्कूल जाते-जाते | आठवीं, नवीं कक्षा में तो ऐसा कमजोर के देखने वाले लोग हँसते थे के देखो कैसा कमजोर हैं, स्कूल जाते-जाते बैठ जाता है, थक जाता है, लौटते समय भी | लेकिन बाद में तो स्वतंत्र सेना संग्रामी में उसका बड़ा ऊँचा नाम है | उस लडके का नाम था राम प्रसाद बिसमिल | स्कुल जब पढता था, तो गंदे लोगों से दोस्ती हो गयी और गंदे लोग तो सिगरेट पीते हैं, अच्छे लोग थोड़े ही सिगरेट पीते हैं | बचपन में ही सिगरेट पीना, वास्तव में सिगरेट गंदगी देता है | तो बड़े लोग भी सिगरेट पीते हैं तो अंदर से गंदे बन जाते हैं | ४०-५० सिगरेट पिता था राम प्रसाद विद्यार्थी | इतना कमजोर हो गया, धातु कमजोर, बुद्धि कमजोर | धरती पकड़ के बैठ जावे | अब गिरे अब मरे | एक लड़का बड़ा प्रसन्न, अच्छे मार्क लाता था | तो बोले तू भी नौवीं, दसवीं का अभी दसवीं में तू आया, मेरे जैसा विद्यार्थी तू और लाल टमाटे जैसा और तंदुरुस्त | तुम क्या खाते हो ? बोले मैं भी वही खाता हूँ रोटी, सब्जी लेकिन मैं सुबह जल्दी उठता हूँ | सर्दियों में भी जल्दी उठता हूँ तो मेरा शरीर मजबूत है | और सर्दियों में कार्तिक महीने में, मेरी माँ बोलती है के बड़ा पुन्य होता है कार्तिक मॉस में स्नान करने से | तो सुबह कार्तिक महीने में खुले बदन होते हैं तो तबियत अच्छी होती है | मैं भी सुबह खुले बदन घूमता हूँ | और कार्तिक मॉस पूरा नही कर सके तो ये बारस, तेरस, पूनम, ३ दिन तो सुबह स्नान जल्दी करना ही चाहिए | सुबह स्नान करता हूँ, सूर्य नमस्कार करता हूँ | फिर गुरु ने दिया है मंत्र तो श्वास रोककर सवा मिनट, डेड मिनट वो जप करता हूँ | जिससे मनोबल, प्राणबल बुद्धि बल बढ़ता है | फिर श्वास बाहर रोक कर ५०-६० सेकंड जप करता हूँ | तो इसीलिए क्लास में पहला नम्बर आता है | ये सब किसने सिखाया ? बोले मेरे गुरुदेव हैं सोमदेव | मेरे को अपने गुरुदेव के पास ले चलो न | मैं तुम्हारा उपकार नही भूलूँगा | तो तेजस्वी विद्यार्थी राम प्रसाद बिसमिल सिगरेट बाज छोरे को ले गया | गुरु को जाकर सच्चाई से बोला की गुरूजी ये आपका विद्यार्थी कितना तेजस्वी, सारस्वत्य मंत्र लिया और मैं निगुरा, सिगरेट पि-पि के खोखला हो गया हूँ | मैं अब जिंदगी में कुछ नही कर सकता हूँ | नापास होने की कगार पे हूँ | थर्ड क्लास में पास होता हूँ | ४२%, ४५%, ३८% कभी किसी विषय में | गुरूजी मैं तो अब मर जाने के विचार आते हैं | गुरु बोला बेटे, ये बुरी आदतें तेरे में थोड़े ही हैं ? तू तो आत्मा है | कैसी पागल जैसी बात करता है | बुरी आदत तेरे मन में है  बुरी आदत का कुप्रभाव तेरे तन पर है, तू तो अमर आत्मा है | ओम...... तू चैतन्य है | तू अपने को कोस मत, कहे को रोता है ? जब गुरु के पास पहुँच गया पुण्य है तभी न | पापी गुरु के पास पहुँचता है क्या ? राम प्रसाद बिसमिल के जीवन में मनो एक अध्यात्मिक चेतना का संचार हो गया | के मैं ५०-५० सिगरेट पियूँ, चलते-चलते गिर जाऊँ, ऐसा अपने को तुच्छ मानता था और गुरूजी आप मेरे को बोलते के तुच्छता तेरी गंदी आदत में है | शरीर पर बुरा असर है लेकिन तू अमर आत्मा है | अपने आत्मा की शक्ति को जगा | 
    गुरूजी मैं कल भी आऊँगा, परसों भी आऊँगा | बोले बेटा आया करो | राम प्रसाद बिसमिल के साथ गुरूजी के पास जाते | सोमदेव वास्तव में देव थे क्योंकी आत्मसाक्षात्कारी पुरुष थे | भागवत स्वरूप थे | आत्मसाक्षात्कारी गुरु के दर्शन करने से पाप मिटते हैं | हारो को हिम्मत मिलती है | व्यसनियों के व्यसन छुटते हैं | तो गुरु कृपा जिसपर होती है और सत्संग में आते-आते, कृपा तो अपने आप बरसाते गुरु | वो लड़का तो मजबूत हुआ और ऐसा बुद्धिमान हुआ और एकटक गुरूजी को देखता मानो गुरूजी की कृपा को पी रहा है | मेरे गुरूजी आनंद रूप हैं | मेरे गुरूजी चैतन्य रूप हैं | मेरे गुरु साक्षी हैं | मेरे गुरु अमर आत्मा ब्रह्म स्वरूप हैं | ब्रह्म माना अनंत ब्रह्मांडो में व्याप्त हैं | मेरे गुरूजी शरीर में होते हुए सभी शरीरों के आत्मा हैं | ब्रह्मा, विष्णु, महेश के भी आत्म स्वरूप मेरे गुरुदेव हैं | उपनिषदों का सत्संग, गीता का सत्संग, गुरूजी का सुनता था | तो बुद्धि भी बड़ी प्रखर हो गयी | भारत को आजाद करने में जब गांधीजी और दूसरे स्वतंत्र सेना संग्रामी लगे, तो ये बीडी, सिगरेट छुट गए, प्राणायाम से फेफड़ों की शक्ति विकसित हो गयी, सारस्वते मंत्र से बुद्धि भी बढ़ गयी | फिर बड़ी उम्र में गुरु मंत्र भी लिया | गीता के, उपनिषदों के ज्ञान से ऐसा राम प्रसाद बिसमिल ऐसा तो मजबूत हो गया के स्वतंत्र सेना संग्रामियों को वही हिम्मत, साहस देता | अंग्रेजो का तख्ता पलट कर दो | भारतीय संस्कृति सबसे महान है | हिंदू धर्म में भगवान को प्रकट करने की ताकत है | हिंदू धर्म में भगवान को शिष्य बनाने की ताकत है | हिंदू धर्म जीते जी मुक्ति का अनुभव कराने वाला है | ऐसा भाष्ण देवे, ऐसा सत्संग सुनावे के स्वतंत्रता सेना संग्रामियों के भी हौसले बुलंद हो गए | अंग्रेजो ने देखा की ये एक लड़का पुरे ब्रिटिश शासन को भारी पड़ रहा है | इसने तो बड़ा संगठन बना लिया और सरे लडके निर्भय बना दिए | तो युवानो ने आंदोलन चलाया उसमें ये राम प्रसाद बिसमिल और उसके साथियों को ब्रिटिश शासन ने षड्यंत्र करके उन्हें पकड़ लिया | ओर वो ऐसे जुल्मी थे केस चला कर, उन्ही के जज थे, पुलिस थी | केस चलाकर राम प्रसाद बिसमिल ओर उनके साथियों को फांसी की सजा सुना दी | फांसी की सजा सुना दी तो और लोगो का तो मोह उतर गया लेकिन राम प्रसाद बिसमिल हँसे फांसी मेरे को फांसी कभी नही हो सकती है | फांसी होगी तो शरीर को होगी | और भारत माता को आजाद कराने के लिए एक शरीर की बली हुई तो क्या है ? हजारों-हजारों शरीर रख दे | वो मैं चैतन्य आत्मा हूँ | ज्यों का त्यों रहूँगा | एक घड़ा फुट तो क्या है ? हजारों-हजारों घडे फुट जाये तो आकाश का क्या बिगड़ता है ? ऐसा चिदानन्द रूप शिवोहम-शिवोहम | मेरे को मार सके फांसी में दम नही | मुझे मिटा सके जमाने में दम नही | हमसे जमाना है, जमाने से हम नही | ओम.... | फांसी के दिन नजदीक आते गए त्यों दूसरे लडके सुकडते गए और राम प्रसाद बिसमिल मौत के तख्त पर और फांसी के फंदे पर आँखों में चमक और श्लोक बोलता है | नैनम छिद्यन्त्री शस्त्राणी, नैनम धाहती पावक ||  अस्त्र-शस्त्र से मरता नही मैं, अग्नि से मैं जलाया नही जाता तो फांसी मेरा क्या बिगड देगी ? ओम... फांसी शरीर को लगेगी लेकिन मैं अमर आत्मा चिदानन्द स्वरूप हूँ | हे भारत वासियों मौत शरीर को मरती है तुम अमर आत्मा हो | और अंग्रेजो को भगा के ही दम लेना | ऐसा उपद्देश, पैगाम देते-देते राम प्रसाद बिसमिल अंतर आत्मा में प्रविष्ट हो गए और शरीर को फांसी हो गयी | वो मुक्त आत्मा | कहाँ तो दुर्बल विद्यार्थी, ४०-५० सिगरेट पिता, सिगरेट बाजों को भी पीछे कर दिया | लेकिन सत्संगी एक लड़का मिल गया और वो गुरु सोमदेव के पास ले गया और सोमदेव गुरु ने उसे ऐतिहासिक पुरुष बना दिया | जो गुरु के चरणों में जाता है, वो तुच्छ से तुच्छ विद्यार्थी भी महान बनना चाहे तो उसके लिए बड़ा आसान हो जाता है | क्योंकी गुरु मंत्र देते हैं | गुरु प्राणायाम सिखाते हैं | तो दोषों की, गंदी आदतों की एसी-तैसी हो जाती है | जरा-जरा बात में चिड़ना, जरा-जरा बात में चोरी करने की आदत, चोरी से लिखने की आदत हट जायेगी | बलवान, बुद्धिमान हो जायेंगे | जैसी-तैसी मुसीबतों से तो क्या मौत से भी नही डरेंगे | मौत तो शरीर को मारती है हम तो अमर आत्मा है | ऐसा विद्यार्थियों को ज्ञान पक्का हो जायेगा | जरा-जरा बात में जो दुखी होता है या जरा-जरा बात में सुखी होता है वो छोटी बुद्धि के होते हैं, छोटे मन के | जिसकी इच्छा पूरी नही होती तो वो दुखी होते हैं वो तो घाटे में होता है पर जिनकी इच्छा पूरी होती रहती है वो भी घाटे में होता है | तो कभी इच्छा पूरी होती है और कभी नही होती | तो जब इच्छा पूरी हो तो सेवा में लगाओ और जब इच्छा पूरी न हो तो धन्यवाद दो | इच्छा पूरी नही हुई तभी भी हम वही के वही हैं | इच्छा पूरी होने के बाद जैसा आदमी होता है इच्छा पूरी नही होने के बाद भी वैसा ही है | तो वो समवान बन जायेगा, महान विद्यार्थी बन जायेगा | अपनी इच्छा पूरी हुई तो खुश होना ये तो कुत्ता भी जानता है और इच्छा पूरी नही हुई दुखी होना ये तो कुत्ता भी जानता है | लेकिन इच्छा पूरी हो तो वाह प्रभु और पूरी नही हुई तो धन्यवाद, भला हुआ, अच्छा हुआ | इच्छा की आपूर्ति में भी भगवान का हाथ है | हमारे विकास के लिए, ऐसा जो समझता है वो महान आत्मा बन जाता है | प्रयत्न करें लेकिन विफल हो जाएँ तो डरे नही | सफल हो जाये तो अभिमान ना करें | इससे भी जीवन में भगवान की शक्ति आ जाती है | 
(राजा का मंत्री जो हुआ अच्छा हुआ भला हुआ -- कथा)
    एक युवक था राजा का मंत्री बना | सत्संग में जाता-आता था | तो गुरूजी बोलते थे जो भी हो जाये वाह प्रभु वाह | सफल हो जाये तो भी वाह, कुछ भी हो जाये तो भी वाह | इच्छा पूर्ति-पूर्ति वाले भी संसारी बनकर जल्दी रोगी और बीमार हो जाते हैं | और इच्छा आपूर्ति के दुःख से जो दुखी रहते हैं, वे भी घाटे में हैं | लेकिन ये इच्छा पूर्ति-आपूर्ति में जो सम रहते हैं वो सारी ऊँचाइयों को पार कर जाते हैं | गुरु ने ज्ञान दिया वाह प्रभु वाह ! अच्छा हुआ, भला हुआ | कुछ भी हो तो वो युवक मंत्री बोले अच्छा हुआ, भला हुआ | एक दिन राजा को किसी ने तलवार भेंट दी | राजा तलवार की धार देख रहा था इतने में कोई कबूतर पसार हुआ तो राजा जर्क लगी तो ऊँगली का आगे का टुकड़ा चिप्स होके कट गया | जैसे आलू की चिप्स कटती है वैसे ही कट गया | वो मंत्री विद्यार्थी, अब तो मंत्री बन गए | उसके मुँह से निकला अच्छा हुआ, भला हुआ | राजा बोलता है ऐ मेरी ऊँगली कटी है तौर तू बोलता है अच्छा हुआ, भला हुआ | उसने कहा राजन भगवान जो भी करते हैं अच्छा हुआ, भला हुआ | ये मंत्री को जेल में डाल दो | मेरी ऊँगली कटी और बोलता है अच्छा हुआ, भला हुआ, बड़ा सत्संगी है | इसके गुरु बोलते हैं हर बात में अच्छा हुआ, भला हुआ | ये आके ऐसा बोलता है | इसको जेल में डालो | जेल में डालने के पहले तो कागज बनाने पड़ते हैं | राजा से पूछा अब ये तो सामान्य अपराधी, सेकंड क्लास, थर्ड क्लास में डाले या खास व्यक्ति को अच्छे जेल में डाले | अरे बोले धकेल दो कहीं भी | राजा ने मलहम-पट्टी करवाया | कटा हुआ हिस्सा तो हट गया और ऊँगली थोड़ी सी छोटी रही | शिकार करने गया काला मृग मुश्किल से देखा | घोडा पीछे दौड़ाया | हिरण को तो प्राण बचाने थे इतना दौड़ाया घोड़े को के अपनी सीमा पार दूसरे राजा के जंगल में पहुंच गया | अब तो पगडंडी भूल गया | ऐसा करते-करते जंगली लोगो के हाथ चढ गया वो | २-४ दिन तो खाना पीना भटकता रहा, ये भी जंगली जैसा हो गया | और जंगली लोगो के मुखिया ने यज्ञ किया | बोले किसी मनुष्य को पकड़ के ले आओ | तो ये पकड़ में आ गया | बोले इसको बली देने के लिए तलवार उठाई तो जंगली लोगो को यज्ञ कराने वाला था जो ब्राह्मण उसने बोला देखो इस बंदे के हाथ-पैर, अंग भंग तो नही है ? कोई अंग भंग होगा तो अपना यज्ञ भंग हो जायेगा | देखा तो ऊँगली कटी हुई थी | छोड़ दिया, बोले ये काम में नही आएगा | राजा शुकर मनाता हुआ अपने राज्य में पहुंचा | के अच्छा हुआ के ऊँगली भंग हुई नही तो सर कट जाता | मंत्री ने जो बोला वो बात का अभी पता चला | भगवान जो करते हैं अच्छे के लिए, भले के लिए | अच्छा हुआ, भला हुआ मंत्री ने सही बोला था | राज्य में जाते ही आदेश किया के वो मंत्री को जो अच्छा हुआ, भला हुआ बोलने की आदत है उसको ले आओ | बड़े इज्जत से नहला-धुला के अच्छे कपड़े पहना के ले आओ | मंत्री को बोला यार अब तेरी बात मेरे को समझ में आई | अच्छा हुआ, भला हुआ जो ऊँगली का आगे का हिस्सा कटा | सारी बात कह के सुना दी | लेकिन पूछा के जब तेरे को जेल हो रहा था, तभी भी तू बोला अच्छा हुआ, भला हुआ | तेरे मंत्री पद का इतना रुतबा था, यश था तू मेरा खास मंत्री था, तेरे को जेल हुआ तभी तू बोलता है अच्छा हुआ, भला हुआ | बोले राजा मैं आपका खास था | शिकार करने हम आपके साथ ही आते थे | आप हिरण के पीछे उलझ गए तो हम भी उलझते | आप जंगली आदमियों के द्वारा पकड़े गए तो हम भी पकड़े जाते | आपका तो ऊँगली कटा हुआ देख कर छोड़ देते और मेरा सिर कट जाता | यहाँ मैं जेल में रह कर आराम से ध्यान भजन करता था | अच्छा हुआ, भला हुआ | जो भी परिस्थिति मिले भगवान की स्मृति और भगवान मेरे आत्मा हैं, मैं भगवान का हूँ | अच्छा हुआ, भला हुआ | राजा ने कहा बाहर से तो मैं राजा हूँ, लेकिन सत्संग से तू सूझ-बूझ का राजा है | सत्संग से तू समता के सुख का राजा है | सत्संग के प्रभाव से तू राजाओ का भी राजा है | आ मेरे साथ हाथ मिला ले राजाओ के राजा | मैं तो राजा हूँ लेकिन तू महाराज है | क्योंकि महाराज गुरु की कृपा है | मेरे गुरु महाराज लीलाशाहजी की कृपा थी मुझ पर तो मैं महाराज हो गया | अब तो गुरु की कृपा है तो तुम भी महाराज हो जाओ | महाराज क्या होना है ? महान राज्य पा लेना है | सुख भी स्वप्ना, दुःख भी स्वप्ना | उसको जानने वाला चैतन्य आत्मा अपना | १० माला रोज करेंगे | प्राणायाम रोज करेंगे | २ प्राणायाम ठान लो खाली | डेड मिनट स्वास अंदर रोकेंगे, फिर धीरे-धीरे बाहर छोडेंगे | फिर स्वास बाहर छोडेंगे ५०-६० सेकंड रोकेंगे | रोग होगा नही, बीमारी आएगी नही और मन में विकार भी नही आयेंगे | फिर गर्दन पीछे करके २५ स्वास, गर्दन आगे करके २५ स्वास | बुद्धिमान | और ओम..... गुरु मूर्ति, भगवान की मूर्ति  को देखते हुए १५ मिनट जप करो | एसी शक्तियाँ धीरे-धीरे विकसित होंगी के आपका तो भला हो जाये, आपके माँ-बाप का, कुल खानदान का भला हो जाये | 
     विनोभा भावे बरोदा में रहते थे | शिव मंदिर में माँ ने बोला बेटा एक लोटा पानी चढ़ा के आया कर | पानी चढ़ाने जाते | किशोर अवस्था से जब बड़े हुए तो एक दिन पूछते के माँ-माँ रोज एक लौटा पौना किलोमीटर दूर मन्दिर में पानी चढाना तो एक साल में ३६५ लौटे हुए | माँ तुम हाँ बोलो तो मन १००० किलो का अथवा एक टेंकर पानी शिवजी पर एक साल में एक बार चढ़ा दूँ | माँ ने बोला विलिया-विनोभा भावे का नाम था | विलिया रोज जाओगे तो  शिवजी की तरफ तो हृदय को बनाना है | बुद्धि को बनाना है भगवताकार | शिवजी को पानी की प्यास नही है | हम शिवजी के पास जाते हैं तो हमारा शिव भाव बनता है | ओम नम: शिवाय, महेश्वराय करके हमारा त्याग भाव और प्रेम भाव जगता है | एक-एक लौटा ३६५ दिन में तुम्हारा हृदय कितना ऊँचा करेगा | एक दिन में टेंकर चढ़ाने से इतनी ऊँचाई नही आएगी | बस फिर तो क्या कहना था, माँ की बात पकड़ ली | माँ उनकी बड़ी भगवान की भक्त थी | एसी माता तो कभी-कभी किसी को मिलती है | एक-एक दाना चावल का उठाती, ओम नम: शिवाय जपती और रखती लाख-लाख दाने | उसके पति नरहरी बाग ये क्या एक-एक दाना, दाने तोल दे एक तोले में कितने होते हैं ? एक दिन के दाने तोल दे फिर रोज उतना तोल के शिवजी को चढ़ा दे | एक-एक दाना गिनती करने में कितना समय जाता है ? ऐसा करके विनोभा के बाप ने उसकी माँ को डांट दिया | तो वो माई कहती है विनिया तेरे पिताजी बोलते हैं ऐसा-ऐसा मैं करूं ठीक है | बोले नही-नही माँ तोले हुए चावल में वो भाव नही बनेगा जैसे मैं पानी का एक टेनकर चढ़ाता तो भाव नही बनता, अभी भाव बना | इसे ही तोल के चावल चढ़ाओगी तो वो भाव थोड़े ही बनेगा ? तुम जो एक-एक दाना जप करके माँ चढ़ाती हो न वो अच्छा है | 
     कुछ बच्चे बैठे थे आपस में पुच रहे थे के तुम्हारे कुल खानदान में कोई संत बना | किसी ने बोला मेरे दादा थे न वो संत बन गए | किसीने कहा मेरे दादा के दादा संत बन गए | किसी ने बोला हमारा मामा संत बन गया | किसी ने बोला हमारा काका संत बन गया | किसी ने बोला हमारी ६ पीड़ी के पहले एक महापुरुष बना था हमारे कुल खानदान में, जब विनोभा भावे, विद्यार्थी विनियजी का नम्बर आया, तो चुप बैठे | बोले तुम्हारे कुल खानदान में कौन संत बना ? थोड़ी देर शांत होकर खड़े हुए | बोले कोई संत बना ये मेरे सुमिरण में नही है | लेकिन मैं तो संत बनूँगा ही | बस बोल दिया तो विनय में से, विनय भाई में से विनोभा भावे बन गए | 
    विद्यार्थी जीवन में ऊँचे विचार ठान लें और ओमकार का गुंजन करें कोई रोक नही सकता ऊँचा बनने से | काम विकार शक्ति का ह्रास कर लेता है | लड़की लड़को से बात करे, तबाही है | कुंवारी कन्या युवको से बात करे, बॉय फ्रेंड, गर्ल फ्रेंड, बिलकुल तबाही का रास्ता है | अमेरिका में ऐसे बहुत बीमार विद्यार्थी हैं | अरबों नही खरबों डॉलर ऐसे सेक्स में तबाह हुए अमेरिका वासियों को जिलाने में जाता है | फिर भी अमेरिका सरकार खर्च करती है और वो टैक्स सब पब्लिक से वसूल किया जाता है | जो विद्यार्थी जीवन में छोरा-छोरी आपस में काला मुँह करते हैं, दिन में भी करे न तो और बीमारियाँ होती हैं | चिडचिडे होते हैं, विकलांग होते हैं | जो अपना नही वो माँ-बाप का क्या रहेगा ? गुरु मंत्र मिलता है और जप करते हैं, प्राणायाम करते हैं तो बुराई रहित होता है | भगवान की उपासना और ध्यान करने से भगवान से आत्मीय सबंध बन जाता है |
भजन किसको बोलते हैं ? जो परमात्मा हमारे प्यारे हैं, गुरु हैं, उनकी प्रिय स्मृति, मधुर याद, हृदय में जो सुख पैदा करे, उसको भजन बोलते हैं | हृदय में जो पवित्र रस पैदा करे | किम लक्षणम भजनम, रसनम लक्षणम भजनम || हृदयश्वर का रस आने लगे वो भजन | भगवान का मिलन किसको बोलते हैं ? भक्त भगवान को प्रेम करते हैं और अन्तर्यामी भगवान भक्त को प्रेम करते हैं | प्रेम के आदान-प्रदान में मैं भक्त हूँ ये निकल जाये | मैं मनुष्य हूँ, मैं दुखी हूँ, मैं सुखी हूँ, नही, सो-हम | जो आत्मा है वो परमात्मा है, जो परमात्मा है वोही आत्मा है | इसको बोलते हैं भगवान का मिलन | ब्राह्मी स्तिथि || बहुत ऊँची स्तिथि होती है | 
   उच्च शिक्षा, उच्च शिक्षा, पि.एच.डी., एम्.ऐ.ड. हो गए, बी.ऐ.ड., एम्.ऐ., म.ऐड. हो गए | फलाना हो गए | ये बड़ी-बड़ी शिक्षाएँ प्राप्त व्यक्तियों के अंदर अगर गुरु दीक्षा नही है तो ऐसे ही ये लोग बोफोर्स करते हैं | ऐसे ही लोग समाज का शोषण करते हैं | ऐसे ही लोग आमिर बनकर फिर क्लबों में दारू पिते  हैं, अपनी पत्नी छोड़कर दूसरे की पत्नी, अपना पति छोड़कर दूसरे के पति ऐसे दुराचारी बनते हैं, के अपने को, समाज को और खानदान को खोखला कर देते हैं | जिनके जीवन में सद्गुरु का संयम नही हैं, सत्संग नही है, फिर उच्च शिक्षा प्राप्त होने पर भी बड़ी नीच गति को प्राप्त हो जाते हैं | मरने के बाद किरकिट हो गए, नीच गति हुई | मरने के बाद कुत्ता हो गए, गधा हो गए और मरते समय भी रीवा-रीवा के मरे | हरि  ओम...... | 
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सबका मंगल ,सबका भला का उदघोष करनेवाले प्रातः स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने साधकों को भक्तियोग, ज्ञानयोग के साथ-साथ निष्काम कर्मयोग का भी मार्ग बताते है | देशभर में फैली श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सहयोग से राष्ट्रभर में नई आध्यात्मिक चेतना जगाकर पूज्यश्री का दिव्य सत्संग एवं दैवीकार्यों का लाभ गाँव-गाँव में जन-जन तक पहुँचाना, अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति का मुख्य उद्देश्य है |

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