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AkhilBharatiya

Divine Satsang by Shri Rama Bhai : Gondia (Maharashtra)

12th - 18th Oct

शरद पूनम (कोजागिरी)निमित्त 
श्री रामा भाई का सत्संग एवं शरद पूनम महोत्सव :  गोंदिया आश्रम (महा.) में
12 अक्टूबर 2019, शनिवार दोपहर 3 बजे से एवं
13 अक्टूबर 2019, रविवार सुबह 6 बजे से ध्यान व योगा सत्र एवं रात्रि 9 बजे से शरद पूनम महोत्सव
स्थान : संत श्री आशारामजी बापू आश्रम, मोक्षधाम के पास, हरिओम मार्ग, गोंदिया (महा.)
संपर्क : 9657074697, 9326640011, 9422833511, 9765239087


शरद पूनम (कोजागिरी)निमित्त 
श्री रामा भाई का सत्संग : खैरी (बेटाळा) जिला : भंडारा में
16 अक्टूबर 2019, बुधवार दोपहर 2:30 बजे से..
स्थान : नवतरुण शारदा उत्सव मंडल, ग्राम : खैरी जिला : भंडारा (महा.)
संपर्क : 9096532068, 9764663519, 9371846700, 7798154825


शरद पूर्णिमा के पावन उपलक्ष्य पर
श्री रामा भाई का सत्संग : साकोली (महा.) में
17 & 18 अक्टूबर 2019 दोप. 1:00 बजे से..
स्थान : संत लहरीबाबा मठ (देवस्थान), मेन रोड, साकोली (महा.)
संपर्क : 9423371989, 9403958551, 9404308530, 9421709070

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LocationGondia (Maharashtra)
Date_Time12th - 18th Oct
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सबका मंगल ,सबका भला का उदघोष करनेवाले प्रातः स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने साधकों को भक्तियोग, ज्ञानयोग के साथ-साथ निष्काम कर्मयोग का भी मार्ग बताते है | देशभर में फैली श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सहयोग से राष्ट्रभर में नई आध्यात्मिक चेतना जगाकर पूज्यश्री का दिव्य सत्संग एवं दैवीकार्यों का लाभ गाँव-गाँव में जन-जन तक पहुँचाना, अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति का मुख्य उद्देश्य है |

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Saint of the Masses
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Saint of the Masses

‘I AM THE ATMAN ABIDING IN ALL BEINGS’

Pujya Bapuji is a staunch supporter of unity and integrity of the nation, which makes him a Lok Sant. That is why in spite of being a Hindu saint, thousands of Muslims, Christians, Zoroastrians, Sikhs, Jains and people belonging to diverse other religions feel proud to be recognized as his disciples. One doesn't find any trace of religious bigotry and sectarianism in his discourses. 

Bapuji believes, "All the religions, faiths, sects, castes and races of the world originated from the Divine, the Pure Consciousness and will finally get dissolved into the same. Why then are we breaking the country in the name of religion, caste, language and sects?

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