भूमि का वास्तु

भूमि का वास्तु उस पर बनने ले भवन के वास्तु के समान ही महत्त्वपूर्ण है। भूमि के वास्तु के लिए हमें उस भूखण्ड के लेवल, कोण, आकार तथा क्षेत्रफल के बारे में जानकारी लेकर वास्तु के दृष्टिकोण से परखना चाहिए।
भूखण्ड का आकारः
यदि भूखण्ड वर्गाकार या उसके निकटतम हो तो सर्वोत्तम होता है।
यदि भूखण्ड आयताकार हो और उसकी चौड़ाई तथा लम्बाई का अनुपात 1:2 तक हो तो वह शुभ होता है। चौड़ाई और लम्बाई का अनुपात 1:1.6 श्रेष्ठ होता है।
त्रिकोण, गोल, षट्कोण, अष्टकोण व अन्य विविध आकारों वाले भूखण्ड अशुभ होते हैं।
भूखण्ड वास्तु के सिद्धान्तों के अनुसार न होने पर उसमें संशोधन करना चाहिए।
यदि भूखण्ड का आकार संशोधित नहीं किया जा सकता है तो उसे त्याग देना चाहिए अथवा यदि संभव हो तो भूखण्ड में चारदीवारी एवं मुख्यद्वार न बनाकर केवल वास्तु अनुकूल भवन बनाये जायें ताकि हरेक भवन अपने आप में स्वतः एक अलग वास्तु हो और खाली जगह सार्वजनिक स्थल के रूप में रहे।

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