मुख्य द्वार हेतु सामान्य नियम

मुख्य द्वार हेतु सामान्य नियम
किसी भी भवन, परिसर (Campus), भूखण्ड अथवा कमरे में प्रवेश द्वार निम्न चित्र में दर्शायी गयी मंगलकारी स्थिति से ही करना चाहिए। साथ ही जहाँ तक संभव हो, प्रवेश द्वारा चौड़ाई वाली दीवार से बनायें ताकि प्रवेश गहराई में हो।

वैदिक वास्तु के कई ग्रन्थों में 9 हृ 9 (81) मंडला 8 हृ 8 (64) मंडला आदि से मुख्य प्रवेश द्वार हेतु विभिन्न अन्य नियम भी हैं। वर्तमान समय में छोटे-छोटे मकान, फ्लेट के निर्माण में उपरोक्त वर्णित प्रवेश द्वार का नियम ही सर्वाधिक प्रभावी व उपयोगी पाया गया है। वैदिक वास्तु के मंडला के विभिन्न नियम बड़े-बड़े राजमहल, राजप्रसाद व बड़े-बड़े मंदिरों में ही प्रयोग हो पाते हैं। उन नियमों का वर्तमान निर्माण शैली में समुचित पालन संभव व उपयोगी नहीं है। अतएव उनका विवरण यहाँ नहीं दिया जा रहा है।
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