औषधीय रूप से भी महत्त्वपूर्ण है - दूर्वा
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औषधीय रूप से भी महत्त्वपूर्ण है - दूर्वा

भारतीय संस्कृति में दूर्वा (दूब) को पवित्र माना जाता है एवं धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग पूजन-सामग्री के रूप में किया जाता है । यह न केवल धार्मिक दृष्टि से उपयोगी है बल्कि औषधीय रूप से भी महत्त्वपूर्ण है । दूर्वा दो प्रकार की होती है - श्वेत और हरी ।

हरी दूब शीतल, पचने में हलकी, कसैली, मधुर एवं रक्तशुद्धिकर, मूत्रवर्धक व कफ-पित्तशामक होती है । आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार इसमें विटामिन ‘सी’ व फॉस्फोरस, मैग्नेशियम, कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम आदि खनिज तत्त्व पाये जाते हैं ।

यह प्यास की अधिकता, जलन, विसर्प (herpes) आदि में लाभप्रद है । शरीर में बढ़ी हुई भारी उष्णता को कम करने एवं शरीर को बल देने का बड़ा गुण दूर्वा में है । भगवान को अर्पण करने के निमित्त दूर्वा का स्पर्श होता है । इससे सहज में ही शरीर की उष्णता कम होती है । दूर्वा को पानी में 4 घंटे रख के वह पानी पीने से उष्णता कम होती है ।

घाव को भरने व जलन को कम करने के गुण के कारण जख्म, फोड़ा, बवासीर, चर्मरोग आदि में दूर्वा के रस का लेप करना लाभदायी है । शीतपित्त, पित्त के कारण होनेवाला सिरदर्द आदि में इसका लेप करें ।

दूर्वा का ताजा रस पुराने अतिसार व पतले दस्तों में उपयोगी है । इसके सेवन से पेचिश, सूजाक (gonorrhoea), रक्तपित्त तथा दिमागी कमजोरी, उन्माद, मिर्गी आदि मानसिक रोगों में लाभ होता है । मधुमेह (diabetes), अल्सर आदि बीमारियों में भी यह लाभदायी है । 

औषधीय प्रयोग

(1) मासिक धर्म का अधिक आना व गर्भपात : दूर्वा का 10 मि.ली. रस मिश्री के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लगातार लेने से मासिक धर्म का अधिक आना तथा बार-बार गर्भपात होना आदि समस्याओं में लाभ होता है । इससे गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है तथा गर्भ को पोषण मिलता है ।

(2) खूनी बवासीर: दूर्वा के 10 मि.ली. रस में 2 ग्राम नागकेसर चूर्ण मिला के सुबह-शाम लेने से बवासीर में बहनेवाला खून बंद हो जाता है ।

(3) शीतपित्त: दूर्वा और हल्दी को पीसकर रस निकाल के पूरे शरीर पर लेप करने से शीतपित्त में लाभ होता है ।

(4) रक्तप्रदर: मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव होने पर दूर्वा के आधा कप रस में मिश्री मिला के सुबह-शाम लें ।

(5) पेशाब के साथ खून आना: दूर्वा के 15-20 मि.ली. रस में मिश्री मिला के दिन में दो बार पियें ।

(6) आँव पड़ना: आँव पड़ने व पेटदर्द की समस्या में दूर्वा के 3-4 चम्मच रस में एक चुटकी सोंठ चूर्ण मिला के दिन में दो बार पीने से लाभ होता है ।

ध्यान दें : उपरोक्त सभी लाभ देशी दूर्वा के हैं, न कि भू-सुदर्शनीकरण (landscaping) में काम आनेवाली संकरित (hybrid) घास के । दूर्वा शीतल होने से अल्प मात्रा में ही लें ।

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