सुगंधित इलायची है बड़ी दवा
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सुगंधित इलायची है बड़ी दवा

इलायची दो प्रकार की होती है - छोटी व बड़ी । आमतौर पर छोटी इलायची का ही उपयोग करना चाहिए, जब तक कि विशेषरूप से बड़ी इलायची के लेने का निर्देश न हो ।

यह त्रिदोषशामक, बलवर्धक एवं शीतल है तथा मस्तिष्क की थकावट दूर करती है । आँतों की शिथिलता-प्रधान रोगों (गैस, कब्ज आदि) तथा दाहयुक्त रोगों (छाती, पेट, पैरों के तलवों आदि में होनेवाली जलन) में इसका सेवन लाभदायी है ।

इलायची के औषधीय प्रयोग

(1) पाचनक्रिया की मजबूती हेतु : पाचन-संस्थान संबंधी कमजोरी या समस्या में रोज 1 इलायची को अच्छे-से चबाकर उसका रस चूसें व खा जायें । यह पेट की गैस को नष्ट करती है । पाचन-तंत्र को मजबूत कर पाचनशक्ति को बढ़ाती है, अरुचि दूर करती है । इसके नियमित सेवन से मंदाग्नि, अजीर्ण, अतिसार, उलटी, अफरा, पेटदर्द आदि पाचनसंबंधी अनेक समस्याओं से आसानी से छुटकारा मिलता है । केले का अधिक सेवन होने पर इलायची खाने से वे पच जाते हैं और हलकापन महसूस होता है ।

(2) ग्रहणशक्ति व स्मरणशक्ति बढ़ाने हेतु : दूध में घी, मिश्री व इलायची मिलाकर पीना लाभदायी है ।

(3) यौन-विकारों में : इलायची शुक्राल्पता, नपुंसकता, समय से पहले स्खलन जैसी यौन-समस्याओं का भी समाधान करती है । 1-2 इलायची का चूर्ण व 1-2 चुटकी शुद्ध हींग* मिलाकर घी के साथ दिन में दो बार लेने से इन समस्याओं से राहत मिलती है ।

(4) कोलेस्ट्रॉल-वृद्धि, हृदयरोग एवं हृदय की दुर्बलता में : भोजन के बाद अथवा दूध के साथ 1-2 इलायची का सेवन करने से इसके सूक्ष्म पोषक तत्त्व (micronutrients) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं तथा हृदय की दुर्बलता एवं हृदयरोगों को दूर करने में मदद करते हैं ।

(5) मोटापा : रोज के भोजन में व्यंजनों में मिला के अथवा भोजन के बाद इलायची का प्रयोग करने से शरीर की अतिरिक्त चरबी दूर होकर बढ़ा हुआ मोटापा कम होता है ।

(6) गुर्दों (ज्ञळवपशूी) के विकारों में : इलायची और खरबूजे के आधा-आधा ग्राम बीजों को चूर्ण बना के मिलाकर लें । इलायची गुर्दों को सुचारु रूप से कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करती है, जिससे मूत्र की वृद्धि होती है ।

(7) मूत्रकृच्छ (पेशाब की रुकावट व जलन) : आँवले के रस* या चूर्ण* अथवा दही के पानी के साथ 1-2 इलायची के चूर्ण का सेवन लाभदायक है ।

(8) मुख की दुर्गंध एवं छाले : इलायची के कुछ दाने मुँह में रखकर चबाने या चूसने से मुँह के जीवाणु खत्म हो जाते हैं और मुख एवं साँस की दुर्गंध दूर होकर मुख सुवासित हो जाता है । इससे मुँह के छाले, मसूड़ों में दर्द या सूजन को दूर करने में भी मदद मिलती है ।

(9) खाँसी, दमा (asthma), क्षयरोग (tuberculosis) : कफयुक्त खाँसी व दमे में 1-2 इलायची का चूर्ण शहद* के साथ दिन में दो बार लेना हितकर है । क्षयरोग में इलायची खाँसी मिटाकर बल प्रदान करती है ।

(10) आँव व पेचिश : मक्खन के साथ 1 इलायची का सेवन लाभ करता है ।

(11) सफर में जी मिचलाना : इसमें इलायची खाने से आराम मिलता है ।

बवासीर की अक्सीर दवा : बड़ी इलायची

50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रख के भूनते हुए जला लें और ठंडी होने पर पीसकर चूर्ण बना लें । आधा से एक ग्राम (चौथाई चम्मच) चूर्ण रोज सुबह खाली पेट पानी के साथ लेने से बवासीर ठीक हो जायेगी । इस दवाई को रात में न लें ।

* बवासीर में जलन कम करने के लिए छोटी इलायची का सेवन लाभदायी है ।

अवसाद (depression) मिटाने हेतु...

‘डिप्रेशन’ रूपी वैश्विक समस्या के हल में भी सहयोगी है छोटी इलायची । इलायची को उबालकर बने हुए काढ़े को पीने से अवसाद दूर करने में मदद होती है । इससे भी कई गुना लाभकारी है इलायची एवं अन्य 13 अनमोल औषधियों का सुंदर सुमेल - आयुर्वेदिक ‘ओजस्वी पेय’*, जिसका एक-एक घूँट नयी उमंग, उत्साह, स्फूर्ति से भर देता है । इससे डिप्रेशन तो ऐसे गायब हो जायेगा जैसे सूरज उगने से अँधेरा । इसके साथ रोज सत्साहित्य ‘जीवन रसायन’* 2-2 पृष्ठ पढ़ा जाय व बीच-बीच में पढ़ने हेतु जेब में रखा जाय तो डिप्रेशन को ही डिप्रेशन हो जाता है, ऊपर से आत्मबल-आनंद-शांति का खजाना मिलता है सो अलग !

सावधानी : सगर्भावस्था में इलायची के अधिक सेवन से गर्भपात होने की सम्भावना होती है । इसका सेवन लम्बे समय तक एवं अधिक मात्रा में करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, अतः ऐसा करने से बचें । 

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