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संत आशारामजी बापू के खिलाफ रचे गये षड्यंत्र की न्यायालय में खुली पर्तें
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संत आशारामजी बापू के खिलाफ रचे गये षड्यंत्र की न्यायालय में खुली पर्तें

अंतिम बहस के दौरान हुए कई चौंकानेवाले खुलासे

संत आशारामजी बापू के जोधपुर केस में अभियोजन व बचाव - दोनों पक्षों की गवाहियाँ पूरी हो चुकी हैं । बचाव पक्ष (बापूजी के पक्ष) की तरफ से हो रही अंतिम बहस में कई चौंकानेवाले तथ्य न्यायालय के सामने आये हैं, जो मीडिया में भी प्रकाशित-प्रसारित हुए हैं । इससे बापूजी के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर रचा गया षड्यंत्र स्पष्ट तौर पर उजागर हो रहा है । प्रस्तुत हैं कुछ तथ्य :

संदिग्ध तरीके से दर्ज करवायी गयी एफ.आई.आर.

अभियोजन पक्ष द्वारा तथाकथित घटना 14 व 15 अगस्त 2013 की दरमियानी रात्रि की बतायी गयी । जोधपुर की इस तथाकथित घटना के संबंध में एफ.आई.आर. 600 कि.मी. दूर दिल्ली में 19 अगस्त को दर्ज करायी गयी और रिपोर्ट अज्ञात कारणों से न्यायालय में दो दिन बाद 21 अगस्त को पेश की गयी । संदिग्ध तरीके से हेल्पलाइन रजिस्टर के कई पन्ने फाड़ दिये गये । अभियोजन पक्ष ने इस रजिस्टर को न्यायालय में पेश भी नहीं किया था । बचाव पक्ष की माँग पर जब न्यायालय द्वारा रजिस्टर मँगवाया गया तब पन्ने हटाया गया रजिस्टर कमला मार्केट पुलिस स्टेशन, दिल्ली की ए.एस.आई. पुष्पलता द्वारा न्यायालय में पेश किया गया तथा इस बात को भी स्वीकार किया गया कि रजिस्टर के पन्ने फाड़कर निकाले हुए हैं ।

एफ.आई.आर. की विडियो रिकॉर्डिंग गायब की गयी

एफ.आई.आर. लिखते समय की गयी विडियोग्राफी की रिकॉर्डिंग, सी.डी. एवं अन्य संबंधित दस्तावेज न्यायालय में पेश नहीं किये गये तथा संबंधित गवाहों थाना प्रभारी प्रमोद जोशी व कान्स्टेबल पंकज को भी न्यायालय में पेश ही नहीं किया गया । संदेहास्पद तरीके से उस विडियोग्राफी को गायब कर दिया गया । ए.एस.आई. पुष्पलता ने न्यायालय में इस बात को स्वीकार भी किया है कि एफ.आई.आर. लिखते समय विडियोग्राफी की गयी थी किंतु उन्होंने उसे न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किया ।

नहीं कराये लड़की के हस्ताक्षर ओरिजिनल एफ.आई.आर. को बदल डाला

वकीलों का कहना है कि सरकारी गवाह ए.एस.आई. निरपाल सिंह ने अपने बयान में कहा है कि एफ.आई.आर. रजिस्टर के अंदर जो एफ.आई.आर. नम्बर था, मैंने उसके ऊपर व्हाइटनर लगाकर 0/13 लिखा । वही कॉपी न्यायालय में भेज दी गयी ।

इन्होंने जो ओरिजिनल एफ.आई.आर. है उसको बदल डाला, यहाँ तक कि एफ.आई.आर. पर लड़की के दस्तखत भी नहीं करवाये जो धारा 154 में अनिवार्य प्रावधान है । रजिस्टर के ऊपर लिखा रहता है कि ‘यह पढ़ लिया है और सही है’ (read over and accepted to be correct) । जब ऐसा कॉलम है तो फिर हस्ताक्षर क्यों नहीं कराये इन्होंने ? इसलिए यह जो सारा मुकदमा चल रहा है वह न तो पॉक्सो एक्ट में आ रहा है और न धारा 375-डी के अंदर ।

मेडिकल जाँच में क्लीन चिट

लोकनायक अस्पताल, दिल्ली की डॉ. शैलजा वर्मा एवं डॉ. राजेन्द्र कुमार ने लड़की की मेडिकल जाँच की थी । मेडिकल रिपोर्ट पूर्णतया नॉर्मल है । दोनों ही डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का सेक्सुअल असॉल्ट (यौन-उत्पीड़न) अथवा फिजिकल असॉल्ट (शारीरिक उत्पीड़न) नहीं पाया गया । चोट का कोई निशान भी नहीं था । अनुसंधान अधिकारी चंचल मिश्रा से जिरह के दौरान जब यह पूछा गया कि चोट का निशान नहीं था तो मामला कैसे बना ? इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था ।

अनुसंधान अधिकारी अविश्वासपात्र

न्यायालय में ऐसे कई तथ्य उजागर हुए जिन्हें पुलिस द्वारा दबाया गया था । अनुसंधान पक्षपातपूर्ण किया गया तथा बापूजी पर नाजायज धाराएँ लगायी गयीं । अनुसंधान के दौरान जिन व्यक्तियों ने सत्य को उजागर किया उनके महत्त्वपूर्ण बयान अनुसंधान अधिकारी चंचल मिश्रा ने चार्जशीट में नहीं लगाये । मिश्रा ने अपनी गवाही में इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने केस से संबंधित कई गवाहों के बयान आरोप-पत्र के साथ पेश नहीं किये हैं । बचाव पक्ष की तरफ से अनुसंधान अधिकारी चंचल मिश्रा से संबंधित एक दस्तावेज (EXD - 98) न्यायालय में पेश किया गया, जो विशिष्ट न्यायाधीश, सीकर (राज.) न्यायालय का फैसला है (NDPS Act, Case No. - 44/2012), जिसमें चंचल मिश्रा के लिए सीकर के न्यायाधीश महोदय ने कहा है कि चंचल मिश्रा अकर्मण्य ऑफिसर है, यह ट्रुथफुल ऑफिसर नहीं है और ऐसे ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाय ।

(संदर्भ : राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, जोधपुर; वकीलों के मीडिया को दिये वक्तव्य आदि)

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Conspiracy against Pujya Bapuji disclosed in Court

Many astonishing facts were disclosed during the final argument

The witness process from both parties, i.e. the prosecution and defense, in Pujya Bapuji’s case has been completed. During the final argument from the defense, many surprising facts have been disclosed in court which have been published and broadcast also by media which is explicitly revealing the multi-stage conspiracy hatched against Pujya Bapuji. Here we present some facts:

FIR was filed in doubtful manner

It is the case of the prosecution that the alleged event was mentioned to have happened during the night between 14th and 15th August, 2013. The FIR of this alleged happening at Jodhpur was filed on 19th August in Delhi which is 600 km away from Jodhpur. The copy of the FIR was also submitted before the court two days later on 21st August with unknown cogent reasons. Many pages of the helpline register were also torn in a doubtful manner. The prosecution didn’t even produce this register before the honourable trial court. The pages of said register were found torn when the court ordered for the said register on demand of the defense. The helpline register was produced by Smt. Pushpalata, the A.S.I. of Kamla market police station Delhi, and she admitted the fact before the court in cross examination that the pages of this register were torn and removed.

The video recording of the FIR was also concealed

The prosecution didn’t submit the recording of the videography made during writing of the FIR, CD and other related documents before the honourable court. The related witnesses police constable Pramod Joshi and constable Pankaj were not presented in the court. The videography was concealed in a suspicious manner. The investigating officer namely Smt. Chanchal Mishra and A.S.I. Smt. Pushpalata admitted this fact before the honourable court during their cross examination by the defense.

The signature of the girl complainant was not taken on the

 FIR and the number of the FIR was changed

Advocates say that the prosecution witness A.S.I. Nirpal Singh said in his statement that he had applied whitener in the column of the FIR no. and written FIR No. 0/13 on it. The same manipulated copy was sent to the court.

They changed the original FIR. Even the signature of the girl complainant was not taken on the FIR whereas it was mandatory under section 154 of Cr. P. C. Generally it has been written in the register that it has been ‘read over and accepted to be correct’. # r.o a.c # Why they did not take the signature when there is such a column in the register for the purpose? Therefore, this case is running neither under POCSO Act nor under Section 375-D.

Clean chit given during medical examination

Dr. Shailja Verma and Dr. Rajendra Kumar of Loknayak Hospital, Delhi performed a medical examination of the girl. Medical report is completely normal. Both doctors have clearly opined that there was not found any sort of sexual assault or physical assault. There was not any sign of hurt. During cross examination of the investigating officer, Smt. Chanchal Mishra, she was asked as to how the criminal case was lodged, when there was no sign of hurt? She was unable to answer.

Investigating officer untrustworthy

Many facts that were concealed by the Police were revealed before the honourable court. The Investigation was biased and illegal sections are slapped against Pujya Bapuji. During the investigation, the persons who revealed the truth in their statements, their important statements were not included in the charge sheet by Chanchal Mishra. Smt. Chanchal Mishra (IO) has admitted this fact that she has not included statements of many witnesses related to the case in the charge sheet. The defense produced a document namely EXD - 98 (Decision in NDPS Act, case No. - 44/2012 ) of special judge, Sikar before the honourable court in which the Special Judge passed structure against Chanchal Mishra and commented that Chanchal Mishra is an incompetent officer. She is not a truthful officer and disciplinary action should be initiated against such officer.

(Ref. Rajasthan Patrika, Daily Bhaskar, Jodhpur; Statements given by the Advocates to the media, etc.)


 

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