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बुद्धि, स्वास्थ्य व सत्संकल्प के पोषण का पर्व
Ashram India

बुद्धि, स्वास्थ्य व सत्संकल्प के पोषण का पर्व

मकर संक्रांति : 14 जनवरी

 

मकर संक्रांति के दिन से बुद्धि के अधिष्ठाता देव सूर्यनारायण मकर राशि में प्रवेश करते हैं । यह त्यौहार भी है, सत्संकल्प व सूर्योपासना करने की प्रेरणा देनेवाला पर्व भी है । मनोकामनापूर्ति के लिए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, स्वास्थ्य के लिए सूर्यस्नान और ध्यान किया जाता है ।

 

सत्संकल्प व प्रार्थना करें

इस दिन से सूर्य दक्षिण दिशा को छोड़कर उत्तर की तरफ बढ़ेगा । ऐसे ही हमारे चित्त की वृत्तियाँ, हमारा मन ऊपर की यात्राओं में बढ़े; दक्षिण अर्थात् नीचे का भाग, उत्तर माना ऊँचा भाग । इस हेतु सुबह-सुबह तुम यही माँगना कि ‘हे ज्ञानप्रकाश प्रभो ! ऐसी कृपा करो कि सब वासनाएँ खत्म होकर हम परमात्म-साक्षात्कार करें । उसमें तुम सहयोग दो । जब हमें अहंकार सताये, वासनाएँ सतायें, सूक्ष्म जगत के असुर-राक्षस सतायें तो तुम उनको दूर करने में सहयोग देना ।’

निरोगता भी देते हैं सूर्यनारायण

इस दिन सूर्यनारायण की कोमल किरणों का फायदा उठायें । सूर्यस्नान से बहुत सारे रोग मिटते हैं । लेटे-लेटे किया गया सूर्यस्नान विशेष फायदा करता है । सिर को ढककर सूर्य की कोमल किरणों में लेट जाओ । सारे शरीर को सूर्य की किरणें मिलें, जिससे अंगों में जिन रंगों की कमी है, वात-पित्त-कफ का जो असंतुलन है वह ठीक होने लगे । मंदाग्नि दूर करने हेतु भी सूर्यस्नान किया जाता है और सूर्यनमस्कार करके बल, ओज और तेज बढ़ाया जाता है । इस दिन तिल और गुड़ देते-लेते हैं, जिससे हमारे जीवन में स्निग्धता व मधुरता आये ।

अव्यक्त को व्यक्त के रूप में देखें

सर्वनियंता, सर्वव्यापी जगदीश्वर को सर्वत्र पूजने की क्षमता लोगों की नहीं है तो सनातन धर्म के मनीषियों ने ऐसी व्यवस्था की है कि उस अव्यक्त को व्यक्त के रूप में देखकर पूजा करते-करते साधारण-से-साधारण व्यक्ति भी परम पद को पा सकता है । है तो जल-थल में परमात्मा पर सब जल-थल को पूज नहीं सकते तो शालिग्राम की व्यवस्था कर दी । है तो वह सर्वेश्वर अणु-परमाणु में लेकिन जहाँ विशेष चमका है, उसे ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः आदि कह के नमन करते हैं ।

नमन तो सूर्यनारायण को करते हैं लेकिन जीवनशक्ति अपनी जागृत होती है । नमन तो माता-पिता, गुरु को करते हैं लेकिन आयुष्य, बुद्धि, योग्यता अपनी बढ़ती है ।

महापुरुषों का उद्देश्य

जैसे सूर्य उत्तर को छोड़कर दक्षिण में आता है और दक्षिण में जी के फिर उत्तर की तरफ चलता है, ऐसे ही महापुरुष उत्तर (परमात्म-ऊँचाई) की यात्रा करते हुए भी फिर दक्षिण की तरफ आते हैं अर्थात् हम लोगों के बीच आते हैं ताकि हम उनके साथ चल पड़ें और उत्तर की यात्रा कर लें । उत्तरायण कितना मूल्यवान पर्व है !

यह मकर संक्रांति पर्व ऋतु-बदलाव का, स्वभाव-बदलाव का संदेश लेकर आता है । जरा-जरा परिस्थिति को सत्य मानकर सिकुड़ो या फूलो मत । ये सब परिस्थितियाँ आती-जाती रहेंगी लेकिन तुम्हारा आत्मसाक्षी ज्यों-का-त्यों रहेगा ।

 पूज्य बापूजी

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The festival to nurture intellect, health and good resolve 

(Makar Sankranti: 14th January)

On Makar Sankranti, the presiding divinity of intellect, Surya (the Sun-God) enters into the Makar (i.e. Capricorn) sign of zodiac. It is a festival as well as a transitional religious festival for making good resolve and worshiping the Sun-God. One gives oblation to the Sun for fulfilment of one’s wishes, while one meditates and takes sunbath for health benefits.

Pray and make sacred resolutions

From this day onwards, the Sun begins its journey from the South towards the North. Similarly, our thoughts and our mind should journey upwards; South denotes the lower region (base nature) while the North denotes the upper region (higher nature). So you ask from the Sun at the dawn of that day, “O Effulgence of Knowledge, Lord! Please grace us so that all our desires get destroyed and we attain God-realization. Please help us in this endeavour. Whenever we are troubled by Ahankara (ego), desires or by demons of the subtle world, please help us remove them.”

Sun-God also gives health

One should also benefit from the soft sunrays today. Sunbathing can cure a lot of diseases. Lie down in the gentle sunrays after properly covering your head. Sunbathing done while lying down is especially beneficial. Cover your head and lie down in the soft sun rays. Ensure that the entire body is exposed to the sun rays so that any colour imbalances in the different organs, any imbalance of vata, pitta and kapha in the body can start getting balanced. Sunbath is taken also to cure indigestion. Surya namaskar (Sun salutation) is performed to increase one’s strength, vigour and Ojas. Sesame seeds and jaggery are given and received as gifts everywhere today, which brings sweetness and harmony in our lives.

Behold the Unmanifest in the manifest forms

People do not have the ability to worship the supreme Ruler and Controller, omnipresent Lord of the World everywhere. So the wise and learned sages of our Sanatana Dharma have instituted a system through which even the most ordinary person can attain the Supreme State by beholding the Unmanifest in manifest form and worshipping it. God is present in all - land and water but one can’t worship land and water, so they arranged for Shaligram (black round smooth piece of stone worshipped as the symbol of Lord Vishnu). The Lord of All beings is present in the molecule and the atom but where His light is more luminous, we salute Him saying: Om Ravaye Namah, Om Suryaaya Namah etc.
Though the recipient of our salutations is the Sun-God, we receive the benefit of awakening our Life-Energy. Though the recipients of our salutations are our parents and Guru, we receive the benefit of increase in our longevity, intellect and ability.

Objectives of the Great Men

The sun moves from the South towards the North, but then again leaves the North and moves to the South. Similarly, saints after having travelled to the North i.e. having attained the lofty goal of God-realization come to the south i.e. come to live among us so that we can join them to travel to the North (to set out on spiritual journey). What a valuable festival Uttarayana is!
This festival of Makar Sankranti also brings us the message of change of seasons, change of our nature. Don’t become overjoyed or sad in ordinary pleasant and unpleasant conditions respectively. All these conditions will keep coming and going, your Atman, the witness consciousness will remain unchanged.

[Rishi Prasad - Issue-301]

 

 

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