Shraddh Videos


Shraddh Audios



Ashram India
/ Categories: Hindi

Different Types of Shraaddh

श्राद्ध के प्रकार 

जो श्रद्धा से दिया जाये, उसे श्राद्ध कहते है | श्रद्धा और मंत्र के मेल से जो क्रिया होते है, उसे श्राद्ध कहते है | जिनके प्रति हम कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धा व्यक्त करते है वे भी हमारी सहायता करते है |नित्य श्राद्ध, नैमित्तिक श्राद्ध, काम्य श्राद्ध, एकोदिष्ट श्राद्ध, गोष्ठ श्राद्ध आदि श्राद्ध के अनेक प्रकार है |

नित्य श्राद्ध : यह श्राद्ध जल द्वारा, अन्न द्वारा प्रतिदिन होता है | श्रद्धा-विश्वास से देवपूजन, माता-पिता एवं गुरुजनों के पूजन को नित्य श्राद्ध कहते है | अन्न के अभाव में जल से भी श्राद्ध किया जाता है |

काम्य श्राद्ध : जो श्राद्ध कामना रखकर किया जाता है, उसे काम्य श्राद्ध कहते है |

वृद्ध श्राद्ध : विवाह, उत्सव आदि अवसर पर वृद्धों के आशीर्वाद लेने हेतु किया जानेवाला श्राद्ध वृद्ध श्राद्ध कहलता है |

पार्व श्राद्ध : मंत्रो से पर्वो पर किया जानेवाला श्राद्ध पार्व श्राद्ध है | जैसे अमावस्या आदि पर्वो पर किया जानेवाला श्राद्ध |

गोष्ठ श्राद्ध : गौशाला में किया जानेवाला श्रद्धा गोष्ठ श्राद्ध कहलाता है |

शुद्धि श्राद्ध : पापनाश करके अपने को शुद्ध करने के लिए जो श्राद्ध किया जाता है वह है शुद्धि श्राद्ध |

दैविक श्राद्ध : देवताओं की प्रसन्नता के उद्देश्य से दैविक श्राद्ध किया जाता है |

कर्मांग श्राद्ध : गर्भाधान, सोमयाग, सीमन्तोन्नयन आदि से जो आनेवाली संतति के लिय किया जाता है, उसे कर्मांग श्राद्ध कहते है |

तुष्टि श्राद्ध : देशान्तर में जानेवाले की तुष्टि के लिय जो शुभकामना की जाती है, उसके लिय जो दान-पुण्य आदि किया जाता है उसे तुष्टि श्राद्ध कहते है | अपने मित्र, बहन-भाई, पति-पत्नी आदि की भलाई के लिय जो कर्म किय जाते है उन सबको तुष्टि श्राद्ध कहते है |

क्षया: यां सांत्वश्रिक श्राद्ध : बारह महीने होने पर श्राद्ध ले दिनों में जो विधि की जाती है, उसे क्षया: यां सांत्वश्रिक श्राद्ध कहते है |
ऊँचे में ऊँचा, सबसे बढ़िया श्राद्ध इन श्राद्धपक्ष की तिथियों में होता है | हमारे पूर्वज जिस तिथि में इस संसार से गए है उसी तिथि के दिन इस श्राद्ध पक्ष में किया जानेवाला श्राद्ध सर्वश्रेष्ठ होता है |

Previous Article Rules of Distribution of Grains
Next Article Scientific View of Shraaddh
Print
3133 Rate this article:
2.3
Please login or register to post comments.

Shraaddh