पूज्य बापू जी का आत्मसाक्षात्कार दिवस

"Aasoj-Sud Dwitiya Samvat Beees Ikkees" was the blessed day when, by assimilating the Gyan of His Guru, Pujya Sant Shri Asaramji Bapu became one with the Supreme; transcended the carnal world to enter into the realm of the Eternal, infinite Brahman.


Across the world, His disciples celebrate this day by organizing Daridranarayan SevaHealth CareKirtan-Yatras, Bhandars, Satsang and much more...

आत्मसाक्षात्कार दिवस जैसा पावन अवसर हमें यह सीख देता है कि ‘बुद्धिमान पुरुष जीवन के अमूल्य समय को अमूल्य कार्यों में ही लगाते हैं और अमूल्य कार्य भी उसीको समझना चाहिए जिससे अमूल्य वस्तु की प्राप्ति हो| और वह अमूल्य उपलब्धि है – आत्मसाक्षात्कार| ऐसी सर्वोत्तम उपलब्धि को पानेवाले बापूजी जैसे प्रकट महापुरुष का अनुसरण करके मानवमात्र अपना मंगल कर सकता है| प्राणिमात्र के परम हितैषी पूज्य बापूजी के सभी साधक इस साक्षात्कार दिवस पर भजन-कीर्तन, सत्संग व गरीबों की सेवा करके अपने सद्गुरु का आत्मसाक्षात्कार दिवस मनाकर मावनमात्र को ‘बहुजनहिताय-बहुजनसुखाय का मंगलमय संदेश से लाभान्वित करें|

ब्रह्मनिष्ठ पूज्य बापूजी के ‘आत्मसाक्षात्कार-दिवसकी आप सभीको हार्दिक बधाइयाँ !

Bapuji's Message On Atmasakshatkar-Divas

In this world there might be around 1.5 crore people celebrating birthday daily, about 1 lakh people’s marriage anniversary, may be many politicians take oath on that day, there might be a dozen devotees who might have seen god on the same day but Atma Sakshatkar day (divas) is seen very rarely. Hence, O Mankind! You also make your aim to attain Atma Sakshatkar (Self Realization). It is not at all difficult, just need to aspire it deeply and be determined.     - Pujya Bapuji

 

 

 

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आत्म साक्षात्कार दिन

आत्म साक्षात्कार दिन
सदगुरूदेव संतशिरोमणि परमपूज्य श्री आसाराम बापूजी की अमृतवाणी  :-

 OCt' 1st  2008; भारतीय समय  : शाम के 5  ; चंडीगढ़  सत्संग

आत्म साक्षात्कार दिन
ब्राम्ही स्थिति प्राप्त कर , कार्य रहे ना शेष l
मोह कभी ना ठग सके, इच्छा नही लवलेश ll
पूर्ण गुरु कृपा मिली,  पूर्ण गुरु का ज्ञान l
आसुमल से हो गए, साईं आसाराम  ll
पूर्ण गुरु की कृपा मिली ….मोह कभी न ठग  सके…

भगवान का दर्शन हुआ,  फिर भी अर्जुन का दुःख नही गया तो पूर्ण गुरु के रूप में भगवान ने ज्ञान दिया तब अर्जुन का दुःख मिटा….

रामकृष्ण परम हंस के सामने माँ काली प्रगट हो जाती, उन के  हाथ का गजरा  काली माता स्वीकार करती….फिर भी काली माता ने रामकृष्ण जी को  तोतापुरी गुरु से दीक्षा लेने को कहा….रामकृष्ण जी  बोले, ‘माँ तुम मुझ से बातचीत करती हो,  मेरे हाथ का प्रसाद खाती हो …गुरु करने की क्या आवश्यकता है ?’

माँ काली बोली, “तुम मुझे भाव से बुलाते तो आती हूँ , लेकिन फिर  अंतर्धान होती तो तुम ज्यों की त्यों हो जाते… वोही के वोही हो जाते….जो तुम्हारे अन्तर में जो नित्य है उस  अकाल पुरूष  का , उस अनंत का ज्ञान पा लो…”
‘मन तू ज्योति स्वरुप , अपना मूल पहचान’ ..ये  अंतर्यामी के साक्षात्कार से, गुरु की कृपा से होगा ….”

तोतापुरी गुरु ने रामकृष्ण को रामकृष्ण परमहंस बना दिया !… नरेंद्र को रामकृष्ण परमहंस जी ने स्वामी विवेकानंद बना दिया ….आसुमल ने लीलाशाह जी की जी शरण ली तो आसुमल से बन गए साईं आसाराम !
पूर्ण सिध्द है वो  अपने आत्मा  !

आसोज सूद दो दिवस, संवत बीस इक्कीस  l
मध्यान्ह ढाई बजे,मिला ईश से ईश ll
देह सभी मिथ्या हुयी , जगत हुआ निस्सार l
गुरु वर जगत हुआ निस्सार l
हुआ आत्मा से तभी अपना साक्षात्कार ll
परम स्वतंत्र पुरूष दर्शाया, जिव गया और शिव को पाया l
जान लिया हूँ शांत निरंजन , लागु मुझे ना कोई बंधन l
यह जगत सारा है नश्वर, मैं ही श्वाश्वत एक अनश्वर ll
दीद है दो पर दृष्टी एक है, लघु गुरु में वही एक है l
सर्वत्र एक किसे बतलाये, सर्व व्याप्त कहा आए जाए  ll
अनंत शक्तिवाला अविनाशी, रिध्दी सिध्दी उस की दासी l
सारा ही ब्रम्हांड पसारा, चले उस की इच्छा  नुसारा ll
यदि वो संकल्प चलाये, मुर्दा भी जीवित हो जाए l
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
ब्राम्ही स्थिति प्राप्त कर , कार्य रहे ना  शेष l
मोह कभी ना ठग सके, इच्छा  नही लवलेश ll
पूर्ण गुरु कृपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान l
आसुमल से हो गए साईं आसाराम ll

जागृत स्वप्नी सुषुप्ति चेते  , ब्रम्हानंद का आनंद लेते…..

जागृत आया चला गया, स्वप्ना आया.. चला गया, सुषुप्ति आई ..चली गई…  लेकिन उस को जाननेवाला , देखने वाला चला गया क्या?

आज मैं स्नान किया  १ बजे!… रात को १० बजे सोया ,सुबह १० बजे उठा… मंजन किया १० बजे ……ऐसा बाबा होता है क्या? .. ऐसे बाबा के चक्कर में मत आओ..कोई  और बाबा खोज ले…मैं सच बोल रहा हूँ.. 
सदगुरुदेव जी भगवान की जय हो!
(सभ भक्तगण सदगुरूदेव जी भगवान की जयजयकार  कर रहे है….)

…..तो जागृत , स्वप्नी या सुषुप्ति किसी भी अवस्था में जो ब्रम्हानंद का आनंद लेते… जागृत आया गया , स्वप्न आया –गया…सुषुप्ति आई –गयी ….ये ज्ञान जिस रब से दिखता , उसी में शांत..उस में समाधी…..
सदा समाधि संत की ..आठो प्रहर आनंद l
अकल माता कोई उपजा, गिने इन्द्र को रंक ll

…. गन्धर्व गान करे, अप्सरा नाचे तब इन्द्र को आनंद आए ..लेकिन जिस ने आत्मा का साक्षात्कार किया है ऐसे महापुरुषो को थकान होती तो नींद में नही तो आत्मा में चले जाते ….. ‘आत्म लोक’ से बाहर आने की  उन को जरुरत नही…
भगवन नारायण देवशयनी एकादशी से ४ महिना उसी में विश्रांति पाते है….इन ४ महीनो में शादी ब्याह आदि सत्कर्म नही किए जाते..क्यों की भगवान सो रहे है.. ‘सो’ कैसे रहे? साधारण आदमी नींद करते ऐसा नही….. अकाल पुरूष में …हम परब्रम्ह परमात्मा में होते….. ऐसी समाधी होती संत की…. भगवान नारायण उसी में विश्रांति पाते भगवान शिव जी उसी में समाधी लगाते….
..हम भी लेटे लेटे उसी परमात्म विश्रांति में ..समाधी में रहे…उसी में लेटे रहे….

….नाम नशे में नानका , छटा रहे दिन रात ..

सुबह के १० बजे  तक हम छटे रहे….. अब जय राम जी  बोलना पड़ेगा! 

…..और इस परमात्म मस्ती केवल संतो के छटने के लिए नही…..इस में  माई-भाई सभी छट सकते है ..
ये तो परमात्म प्रसाद है….
भगवान कृष्ण कहेते,
 “प्रसादे सर्व दुखानाम , हानि रस्योप जायते..”
 सभी इस प्रसाद का रस चख सकते है…. सारे कर्म बंधन कट जाए…. ‘प्रसन्न चेतसे ’ …!

परमात्मा  आत्मा के ध्यान से ओज देते…. ईश्वर  चित्त में 13 निमिष भी छटे तो जगत दान करने का फल होता !
17 निमिष परमात्म ध्यान में छटे रहे तो अश्वमेध यज्ञ का पुण्य होता है ….
घुटने को दाहे बाहें हाथ घुमा के चुटकी बजायी ….ये हुआ एक निमिष !
ये भगवान शिव जी ने वशिष्ट महाराज को कहा, “ हे मुनि शार्दुल उस को अश्वमेध यज्ञ करने का फल होता…. (जिन संतो ने ऐसी आत्म शान्ति पाई है ) , जिन संतो का संसार का ज्ञान मोह टूटता है ..वो संत भी मनुष्य का पाप ताप काटने की शक्ति पाते .. दूसरो के  पाप ताप हरते…!”

सो साहिब सदा हुजुरे ,  अँधा जानत  ताको दुरे  l

आप समझते रब दूर है ….जो हजुरे  हजूर है !!

आदि सत् जुगात सत्
है भी सत, हो से भी सत…..

आप सोचते की  अगर ३ जन्मो के  बाद मिलेगा तो आप अपने पे बहोत जुलुम  कर रहे ….

अपने आप के प्रति जैसा सोचते वैसा फल मिलता….

भयनाशन दुरमति  हरण….
भगवान का नाम भयनाशन करनेवाला है , दुरमति हुयी तो  भय देनेवाला भी है…..रावण  साधू बनकर सीताजी के कुटीर में भिक्षा मांगने गया…लक्ष्मण जी ने मंत्र पढ़कर  लकीर खिंची थी ..तो बाहर से कोई अन्दर प्रवेश करे तो  अग्नि प्रगट होती….. तो रावण सीताजी को बोला, ‘मैं अन्दर आकर भिक्षा  नही लूँगा ….तुम बाहर आओ!”…. इतने में पत्ता हिलता तो रावण डरता….!
दुष्कर्म करते तो भगवान  भय देता है…
कंस  चबर चबर  खाना खाता तो अपने ही खाना खाने की आवाज से डरता की , “कृष्ण आए!”….. खाली उस में आवाज आया तो उस को लगता कृष्ण आया …दुष्कर्म करते तो अंतर्यामी ईश्वर से अपने आप भय पैदा हो जाता…
वो हजुरे  हजूर है! जागंदी ज्योत है !!सभी में है!!

जैसे आकाश में सब और सब में आकाश है ….. सब में आकाश है., ऐसा लोहे में भी आकाश है..लोहे में आकाश नही  होता तो भट्टी में डालने पर अग्नि-मय कैसे हो जाता?
सब चीजो में आकाश है….और  सब चीज आकाश में है…ऐसे ही वो अकाल पुरूष सर्वेश्वर परमेश्वर सर्व-व्यापक है..सब के अंतर्यामी है .. हमारे परम सुहुर्द है ….(उन के नाम की शक्ति अपरम्पार है..)

धन्वन्तरी महाराज बोलते की,  “जब कोई दवाई काम नही करती तब

“अच्युताय,  गोविन्दाय,  अनंताय”

ये नाम ले..मैं सत्य कहेता हूँ ..वो अंतर्यामी देव आप की  रक्षा करेगा !!”

(सदगुरूदेव भगवान जी ने ये बात पहेले भी सत्संग में कही थी तो  किसी ने मकराना में  सुनी तो उस को फायदा हो गया..रोग मिट गया…)

..ये जरुरी नही  है की मेरा सत्संग  मेरे भगत ही सुनते होंगे…. और(दुसरे) लोग भी सुनते और उन को भी फायदे होते….

तो लन्दन  से आया एक व्यक्ति बोला मैं आप का सत्संग सुनता हूँ  ….अच्छा लगता है, ऐसा फायदा हुआ ऐसा बता रहे थे…. 156 देशो में सत्संग सुनते है ..

“अच्युताय, गोविन्दाय, अनंताय” ये भगवान का नाम लेते  तो  सर्व रोग का नाश होता है .. भगवान अच्युताय  ‘गुन – निधान’ है… उस का नाम लेने से ज्ञान मिलता…. ‘गोविन्दाय’ बोलने से  शरीर के सब रोग मिटेंगे  …. ‘अनंताय’ बोलने से मन के  रोग भी मिटेंगे…मन  के रोग होते है  काम,  क्रोध , मोह , लोभ …ये रोग भी मिटेंगे..

‘अच्युताय , गोविंदाय अनंताय’ नाम उच्चताम  l’
(ये नाम उच्चारण करने से सर्व रोग मिटेंगे…)

अनेक में जो एकात्म देव छुपा है …उस आत्म देव में विश्रांति पाये….
सोते समय भगवान का ध्यान कर के सीधे लेट जाए… सीधे ‘अच्युत’ में जाना  …..नींद में भी बहोत आनंद मिलता …बहोत फायदा होता… ऐसे  ही सोना… जब मैं सोता हूँ तो सोने से पहेले आखरी में  भी उच्चार करता हूँ और सुबह भी उठते ही उस का ही उच्चार….. रात को उपनिषदो का ध्यान कर के सोता और सुबह उठते ही उसी का नाम ….ऐ  हैई….:-)

मेरे बेटे की माँ एकदम बीमार थी… इंटर कॉम पे बोला “ऐ हैई” …तो उस ने बोला .. “एई हाई”

तो मैंने जरा दम मारकर बोला, “चंद्रमा की जगह मेरे को अर्घ्य देकर व्रत करती ..मेरे को गुरु मानती , भगवान मानती और मैं  बात कर रहा हूँ तो अच्छे से बोलो, “ऐ हैई..!”

वो  मेरी शिष्या  भी है ..तो मैंने इंटर कॉम  पे बोला, “ऐसे प्यार से कहे ना ऐ हैई!”
तो उस ने बोला…
…शाबास है …और सुनाओ… “ऐ हैई!” बहोत अच्छा लगता है….!”

ऐसा बुलवाया और वो भी बोली….तो मैं बिल्कुल  सच बता रहा हूँ  कि वो बिल्कुल ठीक हो गई..जो  ठीक  से खाना पचा नही सकती थी… चल नही सकती थी..  अब तो ऐ हैई ..!
अब 35 साल के बाद मायके  जा के आई….बम्बई घूमी ….कहा कहा घूमी…चल फिर सकती है ..एकदम  ठीकठाक!:-)
(जय हो सदगुरूजी भगवान की !जय हो श्री गुरुदेवी माँ की!!)

ये विदेशियों की सिख  और हिंदू को लड़ाने की गन्दी चाल है की बोलते :-  ‘गुरु नानक कहेते , “राम गए , रावण गए, ताको दिया बिसार …. कहे नानक सपने ज्यूँ संसार”…..श्रीराम कोई साधारण आदमी है क्या?जो नानक ऐसा बोलते’….
तो ये बिल्कुल ग़लत बात है…तो ये पक्का जान लो की नानक जी के ह्रदय  राम के लिए नफरत नही थी ….नानक जी के एक एक दोहे पढ़ के सुनाऊ तो दंग रहे जायेंगे की हिंदू के लिए क्या लिखा है…
ऐसा ग़लत धारणा पैदा कराने वाले लोग हिंदू और  सीखो को लड़ाने की कोशिश करते …
नानक जी कहेते,
संगी साथी कोई नही दे साथ l
कहे नानक एक एक रघुनाथ ll
… विदेशी हमारे देश में धर्मान्तरण कराने के लिए कोशिशे करते… भारत को तोड़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार है..

भारत के पास आत्मज्ञानी महापुरुषो ने  दिए उत्सव है…. सत्संग मिलता ….सुझबुझ मिलती…. इसलिए  साजिश करनेवालों की साजिशे विफल हो गई…
आत्मसाक्षात्कार क्या है?
…भगवान  ब्रम्हाजी  जिस में समाधिस्त रहेते ,भगवान विष्णु ४ महीने जिस में विश्रांति पाते , भगवान  शिव जी जिस में समाहित रहेते उस “मैं रूप” की घडिया है “साक्षात्कार”!
वशिष्ठ महाराज शाम को अपने शिष्यों को सत्संग  सुनाते….बोले , हे  राम जी…. एक संध्या को आकाश मार्ग से प्रकाश पुंज दिखाई दिया ….भगवान चंद्रशेखर माँ पार्वती  सहित पधार रहे थे..अरुंधती  के साथ हम ने  मनोमन प्रणाम किया… आसन तैयार किया ..जब वे आए तो वहा  बिठाया …उन के चरण धोये…. अर्घ्य पाद से पूजन किया…. भगवन चंद्रशेखर ने कुशल पूछा ,
“हे मुनि शार्दुल यहा एकांत में वरुण विक्षेप तो नही करते? वृक्ष फल फूल तो देते?”
मैंने कहा, “आप के स्मरण मात्र से सब  कुशल होने लगता है ….मेरी इच्छा  है की माँ पार्वती अरुंधती के साथ ज्ञान की चर्चा करे और  मैं आप से कुछ सुनना चाहता हूँ….”
मैंने शिव जी को प्रश्न किया की , “वास्तविक में देव कौन है जो सब का हितकारी है..थोडी सी पूजा करने से प्रसन्न हो जाते है..”
भगवान चंद्रशेखर बोले,  “स्वर्ग के देव भी वास्तविक देव नही…. तुम्हारे भीतर जो आत्मदेव है , वो ही वास्तविक में देव है उन की सत्ता से आँखे देखती….   बुध्दी उसी की सत्ता से निर्णय कराती…मन में उस की सत्ता से सोच की फुरना उठती…उसी की सत्ता से  बुध्दी  निर्णय बदलती …. आँखों का देखना बदलता…. इस  सब को जो जानता है , फिर भी  ज्यों का त्यों रहेता है वो ही वास्तविक देव है !”

उसी को भगवान कहते, अकाल पुरूष कहेते….. भगवती आदिशक्ति कहेते…. देव की लीला अनंत है!!… वास्तविक देव इतने सहज है ….उन को पुत्र मान के पूजा करो तो भी वो आने को तैयार है… वासुदेव देवकी के यहाँ आए …!

वो ही सकल अंतर्यामी है….जल में उसी की सत्ता है ..थल में उसी की सत्ता है… माँ में वात्सल्य उसी का है…. बाप में अनुशासन  उसी का है… संत में  संतत्व उसी की सत्ता से चमकता है.. भक्त की  भक्ति फलती ..मेरे स्वामी ऐसे मेरे रब में सारी  सृष्टि है…

निर्भव जपे…. संत कृपा से प्राणी छूटे

भय को देने वाले वो ही , भय  नाश कराने वाला भी वो ही है … दुष्कर्म करते तो भयभीत भी करता ..संकट समय उस को पुकारने वाले की पतवार संभालता है….

इसलिए आप कभी अपने को तुच्छ मत मानिये…अनाथ मत मानिए ….दुखी मत मानिये…. अगर आप अपने को दुखी मानेंगे  तो चित्त दुखाकार होकर चैत्यन्य से दूर हो जाएगा..

रामायण में बन्दर राम जी के लिए लड़े और  मेघनाद , कुम्भकरण राक्षस आदि रावण के लिए लड़े….लड़ने की सत्ता देनेवाला वो ही का वोही…वो ही  दे रहा है ….. हथियार घुमाने के लिए एक सत्ता से शक्ति मिल रही है….राम जी  के मन में रावण के लिए  राग है और रावण के मन में राम के लिए द्वेष है….
चेहरा वो ही है ,  शीशा अलग अलग है…
विद्युत् का करंट वो ही है , उपकरण अलग अलग है ..
गिझर  में पानी गरम होता और फ्रीज  ठंडा होता , बिजली एक ही एक है … ऐसा अकाल पुरूष वो ही का वोही है…. सज्जन की वकालत करो तो भी वो ही बोलेगा…. और  दुर्जन के लिए भी वो ही बोलने की सत्ता देता है..

जो इसी जनम में साक्षात्कार करने को  तैयार है, उन के लिए वो  सुलभ है….जो  3 जनम के बाद ,  1 जनम के बाद सोच रहे उन के लिए  कठिन है….
भगवान बोलते,  अगर आप सोचते कठिन है तो कठिन है….और जो सोचते मैं सुलभ हूँ उन के लिए मैं सुलभ हूँ  !
“तस्याहम सुलभं पार्थ!”
जो मुझे पाना सुलभ मानते है, उन के  लिए मैं  सुलभ हूँ …. लेकिन जैसा मानोगे ऐसे हो जाता ….
जो जिस रूप में ईश्वर को  चाहेगा उसी रूप में ईश्वर को  पा लेगा….जो जैसी   भावना करता उस की भावना  के अनुसार उस का  कल्याण करने  में भगवान  कोई कसर नही छोड़ते….

जब मैं  अनुष्टान करता नर्मदा किनारे तो  मंत्र की पुरी संख्या नही होती तब तक  कभी रात्रि के 11 बजते तो कभी 12……और भी देर हो जाती  नियम पुरा करने में तो सोना भी देर से हो जाता… जवानी थी, 22 साल की उमर थी…तो नींद  भी ऐसे आती की …. जिस गुफा में जप करता उस गुफा में रात को छुछुंदर फुक मारकर पैरो के तलवे खा जाता पता ही नही चलता  ..दुसरे दिन चलता तो उस में कंकर रेती घुस जाती तब पता चलता…..किसी संत ने देखा… बोले, “अरे, ये तो  छुछुंदर ने खाया है,  पता नही चलता!”
हम ने बोला, “पता नही ….. अनुष्ठान में हूँ!”
…. शिव मन्दिर में जल चढाते  तो श्री विग्रह से फूल पड़ता , माला पड़ती  तो ये तो शगुन है की भगवान प्रसन्न है……
तो मैं बोलता, “भगवान आप प्रसन्न है , लेकिन कैसे मिलेंगे ये बताओ…. बार बार ध्यान में अन्दर से  आवाज आती की लीलाशाह बापूजी के पास जाओ ! “
मैं बोलता , “तुम कौन बोल रहे हो?”
जिस को तुम मिलना चाहते हो , मैं वोही बोल रहा हूँ..तुम लीलाशाह महाराज के पास जाओ..मैं तुम्हे मिलूँगा!”
मैं बोलता, “ये मेरे मन  की आवाज है की  देव की  – ये  कैसे पता चले?”
तो अन्दर से आवाज आती कि , “नही बेटा,  मैं वो ही बोल रहा हूँ… तुम लीलाशाह जी महाराज के पास जाओ ….शिवजी , पार्वती, गणपति सभी के रूप में  मैं वहा  मिलूँगा…!”
ऐसा कई बार भाव आता था …. 40 दिन पुरे होते ही मैं  चल पड़ा .. माँ और उस की बहु आ धमकी थी मेरे एक मित्र के साथ…..माँ  और उस की  बहु  मुझे घर ले जाना  चाहते , समझाता तो  हल्लागुल्ला होगा…इसलिए मित्र से  चुपचाप अहमदाबाद के 3 टिकेट और बम्बई का एक टिकेट मंगवाया….मियागांव जंक्शन पे दोनों ट्रेन आमने  सामने खड़ी होती….तो बातचीत करूँगा और ट्रेन चल पड़ेगी तो मैं भाग के बम्बई के ट्रेन में चला जाऊंगा…. तो मियागाँव जंक्शन में ऐसा करेंगे….  माँ और माँ की बहु की टिकेट मित्र के पास थी… सामने बम्बई जानेवाली गाड़ी खड़ी थी…उस का सिग्नल हुआ तो “मैं अभी आया” ऐसा  कर के भागा….. “क्या हुआ?” …मैं  गाड़ी में बैठा…. माँ चिल्लाई…. फिर क्या क्या हुआ….. “पकडो पकडो!” “क्या लेके भागा?”..माँ बोली , “कुछ लेके नही भागा..मेरा बेटा था” …..चालू गाड़ी में हम तो बैठ गए….गुरूजी से मिलने  कि  अन्दर से प्रेरणा हो रही थी….शिवजी बार बार बोलते , “मैं वो ही मिलूँगा!”….  माँ रुदन करेंगी..माँ को  समझाऊ तो माँ की बहु के दिल पर क्या गुजरेगी…..हमारे ह्रदय में कैसी शक्ति दिया….  कितना मेहेरबान हुआ होगा… उसी का फल है ये!
….रात भर ट्रेन चली… दुसरे दिन सुबह स्टेशन पे उतरे …गणेशपुरी गए…वहा  से वज्रेश्वरी गए…. किसी सेठ का मकान  था…गुरूजी के लिए था.. सुबह सवा 9 बजे होंगे….गुरु जी घूमने निकले थे…हम चरणों में गिर पड़े….
गुरु जी बोले, “क्या हुआ?वापस क्यों आया?”
वाणी से तो कुछ न निकला…..आँखों से आंसू निकल पड़े….
गुरूजी बोले, “अच्छा…. भगवान सब ठीक करेंगे…”
पानी गरम हुआ तो उफलना ही है…. घर में बिजली का सारा सामान फिट हो गया और पॉवर हाउस से बिजली भी आ गई तो फ्यूज  को दबाना और  स्विच  ऑन करना है…..
गुरु जी बोले, “भगवान सब ठीक करेंगे…. आसन नियम ध्यान कर..आराम कर…”
तो हम नहाये, आसन नियम ध्यान किए… आराम कर रहे थे की करीब २ बजे होंगे…
गुरु जी का  एक सेवक था वो आया ..बोला, “साईं ने बुलाया…”
साईं बैठे थे..मेरे को इशारा किया की बैठ…. पंचलक्षी  उपनिषद का ७ वा अध्याय चल रहा था….
“ध्यान से सुन…”(साईं ने इशारा किया)
पंचलक्षी  उपनिषद का ज्ञान तो हाई लेवल का होता है… सेवक पढ़ रहा था…
“ध्यान से सुन…”  गुरूजी  ने  इशारा किया…
मैं सुन रहा था…गुरूजी बैठे थे ..घटना ऐसी घटी…. ऐसे तो कई बार ध्यान में बैठते तो  आनंद होता…ध्यान में आनंद आता …..लेकिन ये  और कुछ विशेष था…. अब वहा  शब्द नही मेरे पास ……फिर जो भी हुआ  ना …शब्द से बाहर निकल गए……

गहेरी नींद में बोला जाता है क्या?
कोई सवाल करे की , “गहेरी नींद में हो?” तो  आप बोले , “ हां , मैं  ठीक से गहेरी नींद में सोया हूँ…”  ये हो सकता है क्या?

ऐसे   ‘साक्षात्कार हुआ तो क्या हुआ’  आप इस विषय में बोल नही सकते…. इस के इर्द  गिर्द के बोल सकते !!
आज  वो ही साक्षात्कार दिन है….
सेवक पढ़ते..गुरूजी  व्याख्या करते…. मैं ध्यान देकर सुन रहा था…. मेरे नासमझी  का परदा दूर हुआ… अढाई दिन तक  उस में रहे….गुरूजी की कृपा से होश संभाले…. आज इस घटना को 46 साल हो गए….

किसी ने पूछा , “ब्रम्हज्ञानी की पहेचान क्या?”
.. मैंने कहा , सच्चे शराबी की  क्या पहेचान है? जो दुसरे को शराबी बना दे….ऐसे  सच्चे ब्रम्हज्ञानी की ये पहेचान है की संत के संग सत्संग के मस्ती में आ जाए ऐ हैईई  !.. :-)

वो चाहते सब झोली भर ले…निज आत्मा का दर्शन कर ले l
एक सौ आठ  जो पाठ करेंगे ,  उन के सारे काज सरेंगे ll

नारायण नारायण नारायण नारायण

रब का ज्ञान जिन को मिला है, वो दिन बड़ा है…. जनम दिन, शादी का  दिन  तो कईयों का होता…आत्म – साक्षात्कार दिवस किसी  किसी का हुआ होगा…..जिनका आत्म-साक्षात्कार हुआ उन को इच्छा  ही नही होती की साक्षात्कार दिन मनाये ….ऐसी स्थिति  हो जाती है… ..

आप मुझे चंडीगढ़ में सुन रहे है….देश विदेश में कई जगह लोग सुन रहे देल्ही, अमदाबाद , बनारस, बम्बई,  नागपुर,  नाशिक, औरंगाबाद  , आगरा,  भावनगर,  जयपुर उल्हासनगर,  नांदेड  , वर्धा,   रायपुर, इंदौर ,  कोटा , भोपाल , छत्तीसगढ़ ,  बरोड़ा,  गोधरा, हैदराबाद, बालाघाट और भी कई जगह और विदेशो में भी  कई जगह में सुन रहे….सिंगापूर, केनिया , कनाडा, इटली , होन्गकोंग , अमेरिका , दुबई और यूरोप  में कई जगह लोग सुन रहे  है…

 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय…

(परम दयालू कृपासिंधु सदगुरूदेव जी भगवान ने सभी को पुनश्च याद दिलाया कि :-
********** 10 ओक्ट से 14 ओक्ट 2008 तक(दशेरा से शरद पूनम तक) रोज चंद्रमा 10/15 मिनट  टिक टिकी  लगा के देखे….प्रसन्नता बढेगी…आँखों की रोशनी बढेगी…स्वभाव में चिडचिडापन नही रहेगा…पित्त दोष से आराम मिलेगा..
**********शरद पूनम की  रात को 200gram चावल और 1 लीटर दूध ऐसी मात्र में खीर बनाये, खाना नही बनाये…खीर में चारोली, किशमिश , बादाम काजू कुछ भी नही डाले…ऐसी खीर बना के रात को 9 बजे से 12 बजे तक चाँदनी में रखे….और 12 बजे (सदगुरू देव जी भगवान को मानसिक नैवेद्य अर्पण कर के) खीर खाए….साल भर निरोगी रहेंगे..(ऐसा नही  किया  तो सदगुरूदेव भगवान जी सपने में आके आँखे दिखाएँगे ! :-)
***** घर से बाहर निकलने से पहेले  “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम उर्वारू कमिव बंधनात्मृत्योर   मोक्षीय मामृतात ” ये मंत्र बोले तो अकाल मृत्यु  , एक्सीडेंट से बचेंगे…
)

हरि ॐ हरि ॐ ..ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  प्रभुजी ॐ ॐ ॐ प्यारे जी ॐ ॐ अच्युताय  गोविन्दाय अनंताय हरि ॐ ॐ माधुर्य देवाय   ॐ ॐ प्यारे जी ॐ ॐ प्रभुजी ॐ ॐ हा हा हा हा  :-)

(किसी ने अखबार पढ़ के सुनाया की , किसी बुरखेवाली महिला ने बापूजी पे झूठा आरोप लगाया था उस महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है….वो किसी गुनहगार की पत्नी है….उस का नाम सरोज है….हरियाणा  की रहेनेवाली है…उस ने झूठ  बोला है…)

भगवान सब का भला करे….

नेकी का बदला नेकी  है …

ये कैसा है जादू समझ में ना आया
तेरे प्यार ने जीना हम को जीना  सिखाया
नारायण श्रीमन  नारायण श्रीमन नारायण

सभी के लिए प्रसाद तैयार  है ..

आरती हुयी..
सदगुरूदेव जी भगवान  ने आरती का दीपक हाथ में लेकर प्राणायाम कर के सभी साधको से  प्रार्थना  करवाई ..
“इसी जनम में साक्षात्कार हो जाए !”

बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् के पदाधिकारियों का भाषण हुआ…
नारायण नारायण नारायण नारायण

नारायण नारायण नारायण नारायण ……..आनंद है ? मंगल है?

माखन माखन साधू  खाए छास जगत को  पिलाये..!

…ये तो छास है…. जब छास में इतना दम है तो माखन में कितना  होगा? तो बोलना पड़ेगा… ऐ  हैई! :-)

मेहमान  को माखन खिलाना चाहिए….. साधू तो उदार होते है …तो भाई माखन माखन  ख़ुद खाते…. ऐसा क्यो?
माखन पचेगा नही इसलिए!
छास  में भी माखन के  कण आते… ऐसा छास पचा लेंगे तो माखन भी खिला देंगे …..
साधो साधो साधो साधो…

सदगुरू भगवान की जय हो!!
(सदगुरूदेव जी भगवान की जयजय कर हो रही है..)

ॐ शान्ति.

हरि ओम !सदगुरूदेव जी भगवान की जय हो!!!!!
गलतियों के लिए प्रभुजी क्षमा करे……

 

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Atmasakshatkar Divas Satsang

Messages To Samitis

इस पावन अवसर पर सभी समितियाँ एवं साधकअपने-अपने क्षेत्र में सेवाकार्यों को और भी व्यापक रुप से करें । इस पावन दिवस के उपलक्ष्य में सेवाकार्य करने हेतु कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार है ।

1)  सामूहिक जप व हवन :-सामूहिक मंत्रजप व संकल्प में बहुत बल होता है ।  अतः पूज्य बापूजी के आत्मसाक्षात्कार दिवस पर श्री आशारामायण पाठ और भजन, किर्तन के साथ-साथ पूज्य बापूजी के स्वास्थ्य,दीर्घायु एवं शीघ्र रिहाई हेतु सामूहिक मंत्रजप, प्रार्थना व हवन करें । हवन करने हेतु हवन की विधी संलग्न है ।

2)   संकिर्तन यात्रा व प्रभातफेरी का आयोजन :- पूज्य बापूजी के आत्मसाक्षात्कार    दिवस पर सभी समितियाँ तन तंदुरुस्त,मन प्रसन्न और वातावरण को पवित्र करनेवाली संकिर्तन यात्रा व प्रभातफेरी का अपने-अपने क्षेत्र में आयोजन जरुर करें, जिसमें सुप्रचार का साहित्य का वितरण करें । संकीर्तन यात्रा के लिए बैनर, तख्ती छपवाएँ ।

3)  साक्षात्कार दिवस निमित्त निकाली गयी संकीर्तन यात्रा हेतु समाचार पत्रों में देने के लिए प्रेस विज्ञाप्ति संलग्न हैं एवं समाचार पत्रों में छपवाने हेतु आर्टिकल भी संलग्न है.

4)  पूज्यश्री के साक्षात्कार दिवस पर यथासंभव अन्य सेवायें जैसे गरीबों में भंडारा,अनाज विरतण, अस्पताल में फल वितरण आदि भी कर सकते हैं ।

5)   जो भी सेवाकार्य हो रहे है उन सेवाकार्यों के फोटोज,वीडियो, अखबारों की कटींग, samitiseva@gmail.com पर जरुर भेजें ।

ब्रह्मनिष्ठ पूज्य बापूजी के‘आत्मसाक्षात्कार-दिवस’ की आप सभीको हार्दिक बधाइयाँ !

आत्मसाक्षात्कार दिवस निमित्त पाम्पलेट, फ्लैक्स, प्रेसनोट, संकीर्तन यात्रा, भंडारा सेवा हेतु बैनर एवं अन्य प्रचार सामग्री भी उपलब्ध है ।

नीचे दी गयी लिकं पर क्लीक करके प्रचार सामग्री डाउनलोड कर सकते है।
https://drive.google.com/drive/folders/0B5itJHYy-0tMU0tYVTlYd0s3Rlk?usp=sharing