भगवन्नाम-जपः एक अमोघ साधन

भगवन्नाम जप-संकीर्तन से अनगिनत जीवों का उद्धार हुआ है एवं अनेक प्राणी दुःख से मुक्त होकर शाश्वत सुख को उपलब्ध हुए हैं।

 

भगवन्नाम-जापक, भगवान के शरणागत भक्तजन प्रारब्ध के वश नहीं रहते। कोई भी दीन, दुःखी, अपाहिज, दरिद्र अथवा मूर्ख पुरुष भगवन्नाम का जप करके, भगवान की भक्ति का अनुष्ठान करके इसी जन्म में कृतकृत्य हो सकता है।

 

भगवन्नाम की डोरी में प्रभु स्वयँ बँध जाते हैं और जिनके बंदी स्वयं भगवान हों, उन्हें फिर दुर्लभ ही क्या है?

इस असार संसार से पार होने के लिए भगवन्नाम-स्मरण एक सरल साधन है।

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

7 janmon ki daridrata mitane keliye

 

Jo 7 Janmon Ki daridrata dur kerna chahte hain ve 7 saptah tak 120 mala Omkar Mantra ki Japen , aur Surya Narayan ko Khir ka bhog lagaker , brumadhya me Surya Narayan Ka Dhyan karen

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

 

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

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उत्सवों की लड़ी : दीपावली
Ashram India

उत्सवों की लड़ी : दीपावली

- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

(दीपावली पर्व : 25 से 29 अक्टूबर)

पर्व क्यों मनाये जाते हैं ?

सारे जीव सच्चिदानंद परमात्मा के अविभाज्य अंग हैं । परमात्मा आनंदस्वरूप है, शाश्वत है, ज्ञानस्वरूप है तो ये सारे पर्व, उत्सव और कर्म हमारे ज्ञान, सुख और आनंद की वृद्धि के लिए तथा हमारी शाश्वतता की खबर देने के लिए ऋषि-मुनियों ने आयोजित किये हैं । सत्, चित् और आनंद से उत्पन्न हुआ यह जीव अपने सत्, चित् और आनंद स्वरूप को पा ले इसलिए पर्वों की व्यवस्था है ।

धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, नूतन वर्ष, भाईदूज - इन पर्वों का झुमका मतलब दीपावली पर्व । इसमें आतिशबाजी भी है, दीपोत्सव भी है, मिष्टान्न खाना-खिलाना भी है, नये वस्त्र, नयी वस्तु लाना-देना भी उचित है ।

धनतेरस

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धन्वंतरि महाराज का प्राकट्य दिवस है । यह पर्व धन्वंतरिजी द्वारा प्रणीत आरोग्य के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहने का संकेत देता है ।

‘पद्म पुराण’ में लिखा है कि ‘धनतेरस को दीपदान करनेवाले की अकाल मृत्यु टल जाती है ।’

नरक चतुर्दशी के दिन क्या करें ?

कार्तिक के महीने में तैलाभ्यंग करना वर्जित है लेकिन नरक चतुर्दशी को तिल के तेल से मालिश करके स्नान करने का बड़ा भारी महत्त्व है । पहले शौच जायें, फिर मालिश करके स्नान करें । इस दिन सूर्योदय के बाद जो स्नान करता है उसके पुण्यों का क्षय माना गया है । हो सके तो जौ, तिल और आँवले का चूर्ण मिला के बनाया उबटन या सप्तधान्य उबटन अथवा तो देशी गाय के गोबर को शरीर पर रगड़ के स्नान करें ।

नरक चतुर्दशी का संदेश

भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर को क्रूर कर्म करने से रोका और उसे यमपुरी पहुँचाया । नरकासुर प्रतीक है वासनाओं के समूह एवं अहंकार का । आप भी अपने चित्त में विद्यमान नरकासुररूपी अहंकार एवं वासनाओं के समूह को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दो ताकि आपका अहं यमपुरी पहुँच जाय और आपकी असंख्य वृत्तियाँ परमेश्वर से एकाकार हो जायें । सोऽहम्... शिवोऽहम्... आनंदोऽहम्, चैतन्योऽहम्, शांतोऽहम्, सर्वरूपोऽहम्... ।

दीपावली

प्राचीन सत्साहित्यों से पता चलता है कि भगवान श्रीराम के पूर्व भी दीपावली का पर्व मनाया जाता था ।

वर्ष में चार महारात्रियाँ होती हैं :

(1) महाशिवरात्रि

(2) होली

(3) जन्माष्टमी

(4) दीपावली

ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव इन चार महारात्रियों में विशेष होता है । अतः दिवाली की रात में महालक्ष्मी और सुख-सम्पदा के साथ ब्रह्मविद्या को पाने के लिए जप-ध्यान, ईश्वर-प्रीति, स्मृति का विशेष महत्त्व है ।

लक्ष्मीप्राप्ति मंत्र

जो धन चाहते हैं उनके लिए लक्ष्मीप्राप्ति का मंत्र जपना लाभकारी होता है । मंत्र -

ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महे ।

अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् 

लक्ष्मी माता की स्थायी प्रसन्नता कैसे पायें ?

एक धन होता है ‘वित्त’ । वित्त-सम्पदा तो बहुत होती है लाखों-करोड़ों-अरबों रुपयों की । वित्त तो सँभाल-सँभाल के कई मर गये । दूसरी होती है ‘लक्ष्मी’ । भगवत्सुमिरन-चिंतन से, धर्म-कर्म का खयाल करते हुए जो कमाई होती है वह लक्ष्मी होती है । यहाँ भी और परलोक में भी वह सुख देगी । तीसरी होती है ‘महालक्ष्मी’ । महालक्ष्मी भोग तो देती है साथ ही मोक्षस्वरूप परमात्मा से भी मिलाने के काम आती है और प्रेरणा देती है । तो हिन्दू संस्कृति ने वित्त की अपेक्षा लक्ष्मी और लक्ष्मी से भी महालक्ष्मी का विशेष आदर किया । क्योंकि भारतीय संस्कृति का उद्देश्य केवल भोग नहीं, केवल बाहर की सुविधा नहीं, अंतरात्मा की शांति, तृप्ति और विश्रांति है । यह स्थिति नहीं प्राप्त हुई तो सोने की लंकावाला रावण व सोने के हिरण्यपुरवाला हिरण्यकशिपु भी संसार से हारकर चले गये । शबरी भीलन, रैदासजी, कबीरजी, तुकारामजी और राजा जनक - ऐसे आत्मतृप्तिवाले जीत जाते हैं । उनकी बुद्धि से अविद्या, अज्ञान मिट जाता है । आत्मसुख और आत्मज्ञान से उनकी जगजीत प्रज्ञा हो जाती है । पूरे जगत को जीत लिया उन्होंने, जिन्हें जगजीत प्रज्ञा प्राप्त हो गयी है ।

यदि आपकी समझ बढ़े, आप हलके स्वभाव पर विजय पाओ तो लक्ष्मी को बुलाना नहीं पड़ेगा, लक्ष्मी तो आपके घर में निवास करेगी । जहाँ नारायण हैं वहाँ पतिव्रता लक्ष्मीजी हैं । जहाँ नारायण की भक्ति है, नारायण का वास है, वहाँ लक्ष्मीजी को क्या अलग से बुलाना पड़ता है ? नहीं, वहाँ तो वे अपने आप आती हैं ।

अतः इस दिन माता लक्ष्मी से यह प्रार्थना करना कि ‘माँ ! जैसे तुम्हें नारायण प्रिय हैं, वैसे हमें भी वे नारायण प्यारे लगें ।’ इस प्रकार से प्रार्थना कर माँ से बाह्य वैभव न चाहकर आत्मवैभव चाहोगे तो मुझे लगता है कि लक्ष्मी माता भी प्रसन्न होंगी और नारायण भी प्रसन्न होंगे और आप भी प्रसन्न होंगे ।

दिवाली का आध्यात्मिकीकरण

दिवाली में चार काम करते हैं - पहला काम घर साफ-सूफ करते हैं, ऐसे अपना साफ इरादा कर दो कि हमको इसी जन्म में परमात्म-सुख, परमात्म-ज्ञान पाना है ।

दूसरा काम नयी चीज लाना । जैसे घरों में चाँदी, कपड़े या बर्तन आदि खरीदे जाते हैं, ऐसे ही अपने चित्त में उस परमात्मा को पाने के लिए कोई दिव्य, पवित्र, आत्मसाक्षात्कार में सीधा साथ दे ऐसा जप, ध्यान, शास्त्र-पठन आदि का नया व्रत-नियम ले लेना चाहिए ।

तीसरा काम है दीये जलाना । बाह्य दीयों के साथ आप ज्ञान का दीया जलाओ । हृदय में है तो आत्मा है और सर्वत्र है तो परमात्मा है । वह परमात्मा दूर नहीं, दुर्लभ नहीं, परे नहीं, पराया नहीं, सबका अपना-आपा है । ज्ञान के नजरिये से अपने ज्ञानस्वरूप में जगो । व्यर्थ का खर्च न करो, व्यर्थ का बोलो नहीं, व्यर्थ का सोओ नहीं, ज्यादा जागो नहीं, युक्ताहारविहारस्य... ज्ञान का दीप जलाओ ।

चौथी बात है मिठाई खाना और खिलाना । आप प्रसन्न रहिये । सुबह गहरा श्वास लेकर सवा मिनट रोकिये और ‘मैं आनंदस्वरूप ईश्वर का हूँ और ईश्वर मेरे हैं ।’ - यह चिंतन करके दुःख, अशांति और नकारात्मक विचारों को फूँक मार के बाहर फेंक दो । ऐसा दस बार करो तो आप मीठे रहेंगे, अंतरात्मदेव के ध्यान की, वैदिक चिंतन की मिठाई खायेंगे और आपके सम्पर्क में आनेवाले भी मधुर हो जायेंगे, उन्हें भी प्रेमाभक्ति का रस मिलेगा ।

दीपावली संदेश

दीपावली के दिन आप अपने घर तो दीया जलाओ लेकिन आस-पड़ोसवाले गरीब का भी ध्यान रखो, वहाँ भी 4 दीये जलाकर आओ ।

बच्चों को कपड़े बाँटकर आओ, मिठाई दे आओ । छोटे-से-छोटे व्यक्ति को स्नेह से मिलो और अपना बड़प्पन भूलो । जैसे आम के वृक्ष में फल लगते हैं तो झुकता है और बबूल का वृक्ष फलित होता है तो भी काँटों से लदा रहता है, ऐसे ही जिसके जीवन में धर्म है, संस्कार हैं, उसके जीवन में नम्रता, सरलता, सहनशक्ति, उदारता आदि सद्गुण आते हैं और जो अधर्म एवं कुसंस्कारों के आश्रित है, अहं की अकड़ से दूसरों को परेशान करता है व खुद भी होता है उसका जीवन दुर्गुणरूपी काँटों से लद जाता है ।

कैसे करें नूतन वर्ष का स्वागत ?

दीपावली के दूसरे दिन को वर्ष का प्रथम दिन मानते हैं । इस दिन जो मनुष्य हर्ष में रहता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष में जाता है और जो शोक में रहता है, उसका पूरा वर्ष शोक में व्यतीत होता है ।

दीपावली और नूतन वर्ष के दिन संत-महापुरुषों व मंगलमय चीजों का दर्शन करना शुभ माना गया है, पुण्य-प्रदायक माना गया है । जैसे - सूर्यदेव, देव-प्रतिमा, गौ, अग्नि, गुरु, हंस, मोर, नीलकंठ, बछड़े सहित गाय, पीपल वृक्ष, दीपक, सुवर्ण, तुलसी, घी, दही, शहद, पानी से भरा घड़ा, कपूर, चाँदी, कुश, गोमूत्र, गोबर, गोदुग्ध, गोधूलि, गौशाला, दूर्वा, चावल और अक्षत आदि का दर्शन ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ में शुभ माना गया है । (ब्र.पु. श्रीकृष्णजन्म खंड, अध्याय : 76)

नूतन वर्ष के दिन सुबह जगते ही बिस्तर पर बैठे-बैठे चिंतन करना कि ‘आनंदस्वरूप परमात्मा मेरा आत्मा है । प्रभु मेरे सुहृद हैं, सखा हैं, परम हितैषी हैं, ॐ ॐ आनंद ॐ... ॐ ॐ माधुर्य ॐ...Ÿ। वर्ष शुरू हुआ और देखते-देखते आयुष्य का एक साल बीत जायेगा फिर दीपावली आयेगी । आयुष्य क्षीण हो रहा है । आयुष्य क्षीण हो जाय उसके पहले मेरा अज्ञान क्षीण हो जाय । हे ज्ञानदाता प्रभु ! मेरा दुःख नष्ट हो जाय, मेरी चिंताएँ चूर हो जायें । हे चैतन्यस्वरूप प्रभु ! संसार की आसक्ति से दुःख, चिंता और अज्ञान बढ़ता है और तेरी प्रीति से सुख, शांति और माधुर्य का निखार होता है । प्रभु ! तुम कैसे हो तुम्हीं जानो, हम जैसे-तैसे हैं तुम्हारे हैं देव ! ॐ ॐ ॐ...’

फिर बिस्तर पर तनिक शांत बैठे रहकर अपनी दोनों हथेलियों को देखना -

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।

करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम् ।।

अपने मुँह पर हाथ घुमा लेना । फिर दायाँ नथुना चलता हो तो दायाँ पैर और बायाँ चलता हो तो बायाँ पैर धरती पर पहले रखना ।

इस दिन विचारना कि ‘जिन विचारों और कर्मों को करने से हम मनुष्यता की महानता से नीचे आते हैं उनमें कितना समय बरबाद हुआ ? अब नहीं करेंगे अथवा कम समय देंगे और जिनसे मनुष्य-जीवन का फायदा होता है - सत्संग है, भगवन्नाम सुमिरन है, सुख और दुःख में समता है, साक्षीभाव है... इनमें हम ज्यादा समय देंगे, आत्मज्योति में जियेंगे । रोज सुबह नींद में से उठकर 5 मिनट शिवनेत्र पर ॐकार या ज्योति अथवा भगवान की भावना करेंगे...।’

भाईदूज

यह पर्वपुंज का पाँचवाँ दिन है । इस दिन बहन भाई को इस भावना से तिलक करती है कि मेरा भाई त्रिलोचन रहे । (उसका सद्विवेकरूपी तीसरा नेत्र जागृत हो ।)

इस दिन भाई अपनी बहन के यहाँ भोजन करे और बहन उसके ललाट पर तिलक करे तो वह त्रिलोचन, बुद्धिमान होता है और यमपाश में नहीं बँधता । यह भाईदूज हमारे मन को भी उन्नत रखती है और परस्पर संकल्प देकर सुरक्षित भी करती है ।

 

A Chain of Festivals: Deepavali

– Pujya Bapuji

(Deepavali Festival: 25th to 29th October)

Why are the Festivals Celebrated?

All living beings are indivisible parts of the Truth, Consciousness and Bliss Absolute, Supreme Self. As the Supreme Self is Bliss personified, eternal and Consciousness personified all these festivals, celebrations and rituals have been instituted by the Rishis and Munis for the enhancement of our wisdom, happiness and bliss as well as for reminding us of our eternity. The festivals are essentially meant to enable the jiva attain its real being Sat-Chit-Ananda from where it has originated. Dhan-Teras, Narak Chaturdashi, Deepavali, New Year and Bhai Dooj – all these festivals combine together into a festive bunch called Deepavali. It has fireworks, festival of lights, eating and feeding sweets to one another, wearing new clothes and the custom of buying and giving new things is also included in it.

Dhan-Teras

The 13th lunar day of the dark fortnight of Kartika month is the birth day of the celestial physician Lord Dhanvantari. This festival inspires us to stay healthy and cheerful always by following the principles prescribed by Lord Dhanvantari.

The Padma Purana states, “The person who gives lamps on the Dhan-Teras is saved from untimely death.”

What to do on Narak Chaturdashi Day?

Oil massage is prohibited in the month of Kartika; however, taking bath after applying sesame oil on the body on Narak Chaturdashi day is held to be extremely important. One should first empty the bowels and then take bath after properly massaging oil on the body. A post-dawn bath on this day is considered to be a destroyer of religious merits. If possible, one should apply the unguent made from barley, sesame seeds and Amla (embelic Myrobalan) or –the Saptadhanya (mixed powders of seven cereals and pulses) unguent or dung of Indian cow on his body before taking bath.

Narak Chaturdashi Message

Lord Krishna killed the demon Narakasur to save the people from his evil doings. Narakasur is a symbol of all desires and ego. You too surrender the Narakasur present in your mind in the form of desires and ego at the feet of Supreme Self, so that it gets annihilated and the countless modifications of your mind get dissolved in the Supreme Self. “I am He…” “I am the auspiciousness…” “I am Bliss…” “I am Consciousness…” “I am Peace…” “I am All…”

Deepavali

On reading the ancient scriptures we come to know that festival of Deepavali was celebrated even before the advent of Lord Rama. There are 4 most important nights in every year. They are 1. Moha Ratri or Janmashtami 2. Kaal Ratri – Deepavali 3. Daruna Ratri – Holi 4. Ahoratri – Mahashivaratri.

It has been found that on these nights the position of various planets have positive effect. Therefore it is considered more important to do japa, meditation, devotional practices, remembrance of divine, etc. not only for attainment of the wealth and happiness but also for attainment of the Knowledge of Brahman.

Mantra to attain wealth

Those who want to acquire wealth and prosperity will be benefitted by chanting the following Mantra.

Aum namo bhaagyalakshmyai cha vidmahe | Ashtalakshmyai cha dhimahi |

 Tanno lakshmih prachodayaat ||

How to get permanent blessing of mother Lakshmi

There are three types of wealth. The lowest of them is Vitta. This type of wealth is in millions, nay billions of rupees. It is the wealth acquired by unfair means by the greedy persons who save it by all means and die without spending it for good cause. The mediocre wealth is called Lakshmi which is earned by righteous persons who remember God, contemplate on Truth and practice Dharma and perform actions ordained by scriptures. It gives happiness in this world and also in the other world. The best type of wealth is called Mahalakshmi. It gives not only sense enjoyments but also helps in meeting God by attaining liberation. Therefore Hindu culture has given more importance to Lakshmi than Vitta. And Mahalakshmi is given more importance than Lakshmi. The objective of the Hindu culture is peace, satisfaction and repose in the inner Self, not only sense enjoyments and physical comforts. If these are not attained one is bound to die frustrated with his life like Ravana, the king of the golden city of Lanka and Hiranyakashipu, the king of the Golden city of Hiranyapur. Those who attained contentment in their Self became victorious in life like the tribal woman Shabari, Saint Kabir, Rahidasji, Tukaramji and King Janaka. The ignorance of his mind is destroyed. He conquers all world, who attains Self-Knowledge and Self-Bliss. He has attained universal consciousness (Jagajeet Prajna). Hence he has conquered the universe.

You will not have to invoke Lakshmi, the goddess of wealth rather she will reside in your home if you increase your spiritual knowledge and conquer your lower nature. Where there is Lord Narayana His consort Lakshmi who is devoted to her husband will follow. Lord Narayana resides where the devotees of Narayana live. Is it necessary to invoke goddess Lakshmi separately? She automatically comes.

Therefore you should pray to Lakshmi, “Oh! Ma, may I also love Narayana as you love Him”. If you pray in this fashion without desire for external opulence then not only Lakshmi, but Narayana will also be pleased with you, and you will also get delighted.

Spiritual Import of Deepavali

Four things are done on the occasion of Deepavali – Just as house is cleaned; similarly have a clear and firm resolve to attain Self-Bliss and Self-Knowledge in this life only.

The second thing is buying new things. As we buy silver, clothes or utensils on Deepavali, likewise we should take a divine and pious vow of mantra-japa, meditation and scripture-reading that directly helps in Self-Realization.

Third thing is lighting lamps. In addition to physical lamps, light the lamp of spiritual Knowledge. The Pure Consciousness is called Atman when it is confined to the heart but it is also Supreme Self because it is all-pervading. That Supreme Self is not far; He is not away; He is not difficult to attain; He is not other’s; He is the real Self of all beings. Wake up in your real nature, the Consciousness with the help of spiritual outlook. Don’t spend money for unnecessary things, don’t be garrulous, don’t sleep more than required; don’t sleep less than required. Yuktaharaviharasya… Be always moderate in eating and recreation. Light the lamp of Knowledge.

The fourth thing is eating sweets and giving them to others. Be cheerful. Early in the morning, take a deep breath; hold it for 75 seconds and contemplate, ‘I belong to God, the Bliss personified God, and God is mine.’ With these thoughts in mind, puff out negative thoughts of sadness and
disquiet with forceful expiration. Do it ten times. You will always remain sweet and joyous. You will enjoy sweets of meditation on the inner Self-God and the Vedic thought. Those coming in contact with you too will become joyful because they will get the joy of devotional Love.

Deepavali Sandesh

You should light lamps on Deepavali and also look after you neighbours. Do light 2-4 lamps in his house also. Distribute clothes and sweets among their children also. Greet even the lowest of low affectionately, and forget your pride. As a mango tree bows when it fruits with mangoes and an acacia tree becomes laden with thorns when it fruits. One who has Dharma (righteousness) and Sanskaras (good tendencies) in his life becomes full of virtues like humility, simplicity, tolerance, generosity etc. and one who resorts to  unrighteousness, and evil tendencies, troubles others by egotism and remains laden with the thorns of vices in his life.

How to begin Nutan Varsh (New Year)

Day after Deepavali is celebrated as first day of the Hindu calendar. The person who remains happy on this day remains happy throughout the next year. The one who remains unhappy, remains unhappy throughout the next year.

“It is considered good and meritorious to have darshan of saints and great men, and to look at auspicious things like Sun god, idols of gods, cow, fire, guru, swan, peacock, jay, cow with calf, Pipal tree, lighted lamp, gold, basil, clarified butter, curd, honey, water filled pot, camphor, silver, Kusha grass, cow’s urine and dung and milk, cow dust, cowshed, Durva grass, unbroken rice etc. on Deepavali day and on New Year Day.”     (Chapter 76, Shrikrishna Janma Khanda, Brahma Vaivarta Purana)

One should contemplate sitting on the bed after getting up in the morning on New Year’s day: “Bliss personified Supreme Self is my own Self. He is my friend, my supreme well-wisher, ‘Aum Aum Ananda Aum… Aum Aum Madhurya Aum’. The New Year begins and one year of my life will elapse when the Deepavali will come. My life span is decreasing. Before my life span expires, let my ignorance expire, O Knowledge-Giver Lord! Let my sorrow perish, let my worries crumble. O Consciousness personified Lord, one who develops attachment to the world increases his sorrows, worries and ignorance whereas one who loves Thee attains more joy, peace, and happiness. O Lord Your real nature is known only to You. Howsoever I am, I am Yours. Aum Aum Aum…’

Then sit calmly on bed, see your palms and recite:

Karaagre vasate lakshmih karamadhye saraswati | Karamoole tu Govindah Prabhaate karadarshanam ||

Then move your hand on your face. Then see which nostril is flowing. If the left is flowing put the left foot first and if the right nostril is flowing put the right foot first on the floor.

Think on this day, “How much time did I waste in thinking and doing actions which bring me down from the greatness of human being?” Now I will not give time to such actions and thoughts but give time to such actions and thoughts that elevate the human life. That is Satsang, chanting of divine name, remaining equal in pains and pleasures, witness attitude, etc. I shall devote more time to them. I shall live in the light of Self. I shall visualize Omkara, light or the form of God on my Ajna Chakra (the eye of Shiva) for five minutes after getting up in morning every day.”

Bhai Dooj

This is the fifth day of the bunch of festivals. On this day the sister applies Tilak on her brother’s forehead, with the wish that her brother becomes (Trilochana). He opens the third eye of discrimination.

On this day if brother takes food at his sister’s house and she applies Tilak on his forehead, he shall become Trilochana, intelligent and he will not be caught in the rope cast by Yama (the god of death). The Bhaidooj elevates us mentally and protects us by mutual good resolves. 

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Mantra Article

Handy Mantra List


बीजमंत्रों का महत्त्व समझकर उनका उच्चारण किया जाय तो बहुत सारे रोगों से छुटकारा मिलता है। उनका अलग-अलग अंगों एवं वातावरण पर असर होता है।
ʹૐʹ के ʹओʹ उच्चारण से ऊर्जाशक्ति का विकास होता है तो ʹमʹ से मानसिक शक्तियाँ विकसित होती हैं। ʹૐʹ से मस्तिष्क, पेट और सूक्ष्म इन्द्रियों पर सात्त्विक असर होता है। ʹह्रींʹ उच्चारण करने से पाचन-तंत्र, गले व हृदय पर तथा ʹह्रंʹ से पेट, जिगर, तिल्ली, आँतों व गर्भाशय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। औषधि को एकटक देखते हुए ʹૐ नमो नारायणाय।ʹ मंत्र का 21 बार जप करके फिर औषधि लेने से उसमें भगवद्-चेतना का प्रभाव आता है और विशेष लाभ होता है। रात को नींद न आती हो तो ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ इस मंत्र का जप-स्मरण करें। स्मरण करते-करते अवश्य अच्छी नींद आयेगी।


दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

Note: Guru Mantra (Mantra given by Sath Guru during Mantra Diksha) is a connection between SathGuru and Shishya (Disciple) and should not be revelead to anyone ever.  Below are some useful powerful mantras that help Sadhaks in various way.

Beeja Mantra

for Memory, Intellect and in Coma

‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है।
‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है। इसके विधिवत जप से कोमा में गये हुए रुग्ण भी होश में आ जाते हैं। अनेक रुग्णों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

for Liver, Brain, Hepatitis-B, Bronchitis

‘खं’ बीजमंत्र लीवर, हृदय व मस्तिषक को शक्ति प्रदान करता है। लीवर के रोगों में इस मंत्र की माला करने से अवश्य लाभ मिलता है। ‘हिपेटायटिस-बी’ जैसे असाध्य माने गये रोग भी इस मंत्र के प्रभाव से ठीक होते देखे गये हैं ब्रोन्कायटिस में भी ‘खं’ मंत्र बहुत लाभ पहुँचाता है।

Monthly Periodic Problems of Women Cured with Vedic Mantra Power

‘थं’ मंत्र मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है। इससे अनियमित तथा अधिक मासिक स्राव में राहत मिलती है। महिलाएँ इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए हारमोन्स की जो गोलियाँ लेती हैं, वे होने वाली संतान में विकृति तथा गर्भाशय के अनेक विकार उत्पन्न करती हैं। उनके लिए भगवान का प्रसाद है यह ‘थं’ बीजमंत्र।

Health Mantra – How to get Healthy –

स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए सिर पर हाथ रखकर मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोचारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।
हे अच्युत! हे अनन्त! हे गोविन्द! – इस नामोच्चारणरूप औषध से तमाम रोग नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सत्य कहता हूँ…… सत्य कहता हूँ।

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |
Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid bad dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |

Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः

Om hansam hansaha

रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है


बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा – Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu


कं -मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में। 
Relieves one from the fear of death; is useful in skin diseases and blood disorders.


ह्रीं -मधुमेह, हृदय की धड़कन में। 
Is beneficial in diabetes mellitus and palpitation.


घं – स्वपनदोष व प्रदररोग में। 
Helps in nocturnal emissions and leucorrhoea.


भं -बुखार दूर करने के लिए। 
Relief from fever.


क्लीं -पागलपन में। 
Is useful in mental disorders.


सं -बवासीर मिटाने के लिए। 
– Cures piles.


वं -भूख-प्यास रोकने के लिए। 
Prevents hunger and thirst.


लं -थकान दूर करने के लिए। 
Relieves fatigue and exhaustion.

for Marriage only for females

जय जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori

Nirogi va sampann hone ke Liye Mantra [ Health Mantra]

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये 

ॐ हुं विष्णवे नमः ।


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |
Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

om namo bhagvate vaasudevaay
Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

ॐ घं काली कालीकायै नमः |

Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |
buddhi vivek vigyaan nidhaana ||
Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

Blow away the Impediments

‘tam’ (टं)
is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.
Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.
Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा ।

shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa

The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

Digestion Mantra

अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam
Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam
Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

Mantra to cure all types of diseases

Dharmarajavrata (mantra mahodadhi) Eliminates all diseases:

Even if you are suffering from incurable diseases wake up early in the morning,


ॐ क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहक्रते नमः ।

aum kraum hrim a am vaivasvataya dharmarajaya bhaktanugrahakrite namah

Do constant jap of this mantra. It will help cure all your Diseases and deliver you from all sins
and afflictions.

Mantra to attain Wealth

People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे |
अष्टलक्ष्मी च धीमहि | तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात | 
om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|
ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).
Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

Mantra To Elleviate Sudden Trouble

Chanting this mantra 108 times everyday, elleviates one from miseries and sudden trouble.

ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

Aum raan raan raan raan raan raan raan raan mam kashtam svaahaa
we can replace मम् (mam) with name of person, whose problems have to be removed.
Note:- in above mantra raan is for 8 times,

For Victory Vijaya

Chant Aditya Hridya Stotra 3 Times facing east direction.

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’


 



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The Magnificence of Mantras

Even in this present age of materialistic life Mantra-Shakti can prove to be more powerful than the Yantra-Shakti. Mantra is a divine instrument with the rare potential of arousing our dormant consciousness. Thus it helps develop our latent powers and brings our original greatness to the fore. The parents give birth merely to our physical body whereas the True Brahmanishtha Sadgurus, the personages established in their True Self, give birth to our Chinmay Vapoo through Mantra-Diksha. Man can attain greatness by developing his dormant powers through Mantra. The regular japa of a mantra reduces restlessness of the mind, brings restraint in life; and works wonders in developing the concentration and memory. A Mantra has different effects on different energy centres of the body. Many personages like Mahavir, Buddha, Kabir, Guru Nanak, Swami Vivekanand, Ramkrishna Paramhansa, Swami Ramtirtha, Pujyapaad Swami Sri Lilashahji Maharaj, etc. have attained respect and reverence all around the world through their awareness of the True glory of Mantra.

Beej Mantras:

 

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

 

To marry to good husband New!

 

जय जय गिरिवर राज किशोरीजय महेश मुख चंद्र चकोरी 

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori 

 

Chintamani Mantra htm-pdf

 

Tulsi Mantra

तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते
mahaprasad janani sarvasaubhagyavadhini
aadhi vyaadhi jara muktam tulsi tvaam namostute

 

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |

Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid wet dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |


Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः |
Om hansam hansaha|
रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है |

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |

Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

om namo bhagvate vaasudevaay

Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

घं काली काली कायै नमः |
Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |

buddhi vivek vigyaan nidhaana ||

Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

 

Lakshmi Barkat Mantra

अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च न करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान न बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है |
मंत्र है -

ॐ अच्युताय नमः
Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
ॐ अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; २ गुरूवार करे, ४ गुरूवार करे, मतलब ४ सप्ताह, २ सप्ताह - "ॐ अच्युताय नमः, ॐ अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |

Blow away the Impediments

  • tam’(टं)
    is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.

  • Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.

  • Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा
shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa
  • The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

  • Digestion

    अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
    आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

     

    Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam

    Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam

    • Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

    Mantra to attain Wealth

    People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

    Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), lightDhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

     

    om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

    ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

    It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture ofLakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

    Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

    Mantra To Alleviate Sudden Trouble

    Chanting this mantra 108 times everyday, alleviates one from miseries and sudden trouble.

    ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

    Aum raam raam raam raam raam raam raam raam mam kashtam svaahaa

    Note:- in above mantra raam is for 8 times 

     

    Mantras by Shri Sureshanandji

    Mantras by Sureshanandji(mp3)

    कार्यसिद्धिकेलिए

    ॐ गं गणपतये नमः

    Om gam ganpatay Namah

    हर कार्य शुरु करने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करेंकार्य सिद्ध होगा |

    -Uttrayan Shivir Amdavad 2008

    Surya Gayatri Mantra

     आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |

     

    om aadityaay vidmahe bhaaskaraaye dheemahi tanno bhaanu prachodayaat

     

    Mala Mantra

    जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें 

    ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

    Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
    om aim shree aksh maalaay namah

     

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।