भगवन्नाम-जपः एक अमोघ साधन

भगवन्नाम जप-संकीर्तन से अनगिनत जीवों का उद्धार हुआ है एवं अनेक प्राणी दुःख से मुक्त होकर शाश्वत सुख को उपलब्ध हुए हैं।

 

भगवन्नाम-जापक, भगवान के शरणागत भक्तजन प्रारब्ध के वश नहीं रहते। कोई भी दीन, दुःखी, अपाहिज, दरिद्र अथवा मूर्ख पुरुष भगवन्नाम का जप करके, भगवान की भक्ति का अनुष्ठान करके इसी जन्म में कृतकृत्य हो सकता है।

 

भगवन्नाम की डोरी में प्रभु स्वयँ बँध जाते हैं और जिनके बंदी स्वयं भगवान हों, उन्हें फिर दुर्लभ ही क्या है?

इस असार संसार से पार होने के लिए भगवन्नाम-स्मरण एक सरल साधन है।

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

7 janmon ki daridrata mitane keliye

 

Jo 7 Janmon Ki daridrata dur kerna chahte hain ve 7 saptah tak 120 mala Omkar Mantra ki Japen , aur Surya Narayan ko Khir ka bhog lagaker , brumadhya me Surya Narayan Ka Dhyan karen

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

 

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

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भगवान से बड़ा कौन व कैसे ? - स्वामी रामसुखदासजी
Ashram India

भगवान से बड़ा कौन व कैसे ? - स्वामी रामसुखदासजी

       संत तुलसीदासजी कहते हैं :

राम सिंधु घन सज्जन धीरा ।

चंदन तरु हरि संत समीरा ।।

       ‘श्रीरामचन्द्रजी समुद्र हैं तो धीर संत-पुरुष मेघ हैं । श्रीहरि चंदन के वृक्ष हैं तो संत पवन हैं ।’

(श्री रामचरित. उ.कां. : 119.9)

       भगवान श्रीकृष्ण भी दुर्वासाजी से कहते हैं :

अहं भक्तपराधीनो ह्यस्वतन्त्र इव द्विज ।

साधुभिर्ग्रस्तहृदयो भक्तैर्भक्तजनप्रियः ।।

       ‘मैं सर्वथा भक्तों के अधीन हूँ । मुझमें तनिक भी स्वतंत्रता नहीं है । मेरे सीधे-सादे, सरल भक्तों ने मेरे हृदय को अपने हाथ में कर रखा है । भक्तजन मुझसे प्यार करते हैं और मैं उनसे ।’(श्रीमद्भागवत : 9.4.63)

       भगवान संतों को बड़ा बताते हैं । भगवान ने कहीं भी अपने को संत से बड़ा बतलाया हो ऐसा देखने में नहीं आया । इस दृष्टि से संत ही बड़े हुए और यदि हम अपने लाभ के लिए विचार करते हैं तो भी संत ही बड़े हैं क्योंकि परमात्मा के सच्चिदानंद रूप में जीवमात्र के हृदय में रहते हुए भी संतकृपा और सत्संग के बिना जीव भगवान के उस परम आनंदमय स्वरूप के अनुभव से वंचित रहकर दुःखी ही रहते हैं । भगवत्स्वरूप का अनुभव भगवद्भक्ति से होता है और वह मिलती है संतकृपा तथा सत्संग से ।

भगति तात अनुपम सुखमूला ।

मिलइ जो संत होइँ अनुकूला ।।

(श्री रामचरित. अर.कां. : 15.2)

भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी ।

बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी ।।

(श्री रामचरित. उ.कां. : 44.3)

       अतः हमारे लिए तो संत ही बड़े हुए । भगवत्कृपा से प्राप्त हुई मानव-देह का फल मनुष्य के कर्म एवं साधन के अनुसार स्वर्ग, नरक अथवा मोक्ष - सभी हो सकता है किंतु संतों की कृपा से प्राप्त हुए सत्संग का फल केवल परम पद ही होता है ।

  भगवान तो दुष्टों का उद्धार करते हैं उनका विनाश करके, पर संत दुष्टों का उद्धार करते हैं उनकी वृत्तियों का सुधार करके । भगवान अपने बनाये हुए कानून में बँधे हुए हैं परंतु संतों में दया आ जाती है । इस प्रकार भी संत भगवान से बड़े हैं । भगवान सब जगह मिल सकते हैं पर आत्मज्ञानी संत कहीं-कहीं ही हैं । अतः वे भगवान से भी दुर्लभ हैं ।

 हरि दुरलभ नहिं जगत में, हरिजन दुरलभ होय ।

हरि हेर्याँ सब जग मिलै, हरिजन कहिं एक होय ।। 

       हमारा उद्धार करने में तो संत ही बड़े हुए । अतः हमें उन्हींको बड़ा मानना चाहिए । तात्त्विक दृष्टि से देखें तो संत और भगवान दोनों एक ही हैं । 

संतों का सेवन किस प्रकार किया जाय ? इसके उत्तर में यही कहा जा सकता है कि संतों के सेवन का सर्वोत्तम ढंग है उनके मन, उनकी आज्ञा के अनुसार चलना, उनके सिद्धांतों का आदरपूर्वक पालन करना । यह संत-सेवन की ऊँची-से-ऊँची विधि है । इसका कारण यह है कि संतों को अपना सिद्धांत जितना प्यारा होता है उतने उनको अपने प्राण भी प्यारे नहीं होते, जो हम लोगों को सबसे अधिक प्यारे हैं । 

उनके सिद्धांत का सांगोपांग (अंगों-उप अंगों सहित) पालन करना, उनके मन के अनुसार चलना और यदि मन का पता न लगे तो इशारे, आज्ञा आदि  के  अनुसार चलना चाहिए । यह उनकी सबसे बड़ी सेवा है - ‘अग्या सम न सुसाहिब सेवा ।’ अतः शरीर से सेवा करने के साथ ही श्रद्धा-प्रेमपूर्वक मन से भी सेवा की जाय तो कहना ही क्या है ! 

उनका सिद्धांत, भगवद्-अनुभव जानने के लिए उनका संग करके उनसे भगवत्संबंधी बात पूछनी चाहिए । इससे हम अधिक लाभ उठा सकते हैं । संतों से पुत्र, स्त्री, धन, मान, बड़ाई आदि से संबंध रखनेवाले सांसारिक पदार्थ चाहना अमूल्य हीरे को पत्थर से फोड़ना है; यह संतों के संग का सदुपयोग नहीं है । 

वे जो कुछ निर्देश करें उसे उनकी आज्ञा समझकर पालन करें । आज्ञापालन का स्थान सेवा में सबसे ऊँचा माना गया है । 

एक संत थे । उनके पास रहनेवाले श्रद्धालु व्यक्तियों में से एक व्यक्ति की एक दिन संत ने परीक्षा लेनी चाही । वे बोले : ‘‘मेरी कमर में दर्द हो रहा है, जरा अपने पैरों से  इसे दबा दो ।’’ श्रद्धालु ने कहा : ‘‘महाराज ! आपके शरीर पर पैर कैसे रखूँ ?’’ संत ने उत्तर दिया : ‘‘ठीक है, मेरे शरीर पर तो तुम पैर नहीं रखते पर मेरी जबान पर तो पैर रख ही दिया न ?’’ 

हाँ, यह सम्भव है कि हम संत के वचनों का पूरा पालन न कर सकें । किंतु यदि मन में वचन-पालन की नीयत है तथा उसके लिए यथा-सामर्थ्य प्रयत्न भी किया गया है तो फिर चाहे उसका अक्षरशः पालन न भी हो पाया हो तो भी उससे बहुत बड़ा लाभ होता है । 

सत्संग के लिए तो संत स्वयं अपनी ओर से चले जाते हैं क्योंकि प्रेमी-जिज्ञासुओं के पास जाने से भगवद्वाक्यों का मनन, विचार और अनुशीलन (सतत व गहरा अभ्यास) होता है, जो उन्हें अत्यंत प्यारे हैं । इतना ही नहीं, वे अपना संग करनेवाले व्यक्ति का उपकार भी मानते हैं कि इसके कारण हमारा कुछ समय भगवच्चर्चा में व्यतीत हुआ । काकभुशुंडिजी ने गरुड़जी से कहा : ‘‘महाराज ! मुझ पर आपकी बड़ी कृपा हुई जो मुझे सत्संग-भगवच्चर्चा का मौका दिया ।’’

  संत को प्रायः हम समझते नहीं । हम लोग तो उनकी बाहरी क्रियाओं की चमत्कारिक बातों की विशेषता देखना चाहते हैं । अपनी बुद्धि से संतों की पहचान करना बड़ा कठिन है । उनकी पहचान तो उन्हींकी एवं भगवान की कृपा से ही सम्भव है । कसौटी से पहचान करने पर तो हम ही चक्कर खा जाते हैं क्योंकि संतों की कसौटी करना ही गलत है । तो फिर संतों की पहचान कैसे हो ? 

जिनके संग से हमारा साधन बढ़े, हममें दैवी सम्पत्ति आये, हम आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हों, हमारे आचरण में न्याय व उदारता आने लगे, भगवद्-तत्त्व का ज्ञान होने लगे, सत्शास्त्र, भगवान, महापुरुष और धर्म में श्रद्धा बढ़े और भगवान में प्रीति हो व भगवद्-स्मृति अधिक रहने लगे, हमारे लिए वे ही संत हैं । उनसे इस प्रकार का आध्यात्मिक लाभ लेना ही सच्चा लाभ है । 

संतों का संग किया जाय तो वह कभी निष्फल नहीं जाता । पर उनका महत्त्व समझकर उनके सिद्धांतानुसार आचरण करते हुए उनका संग करना उनका वास्तविक संग करना है । इस प्रकार करने से ही उनके संग का वास्तविक लाभ शीघ्र प्रकट होता है । 

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Who is greater than God? Why?   – Swami Ramsukhdasji

       Sant Tulsidasji said,

राम सिंधु घन सज्जन धीरा ।

चंदन तरु हरि संत समीरा ।।

       “While Shri Rama is the ocean, the wise saints are like the rain-clouds; or to use another metaphor, while Shri Hari is the sandal tree, the saints represent the wind (that diffuse its perfume).”

(Shri Rama Charita Manasa Uttara Kanda: 119.9)

       Lord Krishna also said to Durvasa Muni,

अहं भक्तपराधीनो ह्यस्वतन्त्र इव द्विज ।

साधुभिर्ग्रस्तहृदयो भक्तैर्भक्तजनप्रियः ।।

       “Oh Brahmana, I am completely under the control of my devotees. I am like one who has no self-dependence. My heart is won over and hence is in the possession of my righteous devotees, and I am the beloved of them.”  (Shrimad Bhagavata Purana: 9.4.63)

       God has said that saints are greater than Him. I have never found any scripture in which God has said that He is greater than saints. Thus saints are greater. If we think for our benefit, saints are greater. Because despite the Paramatma dwelling in the heart of every jiva as Truth-Consciousness-Bliss absolute, we remain unhappy being deprived of the realization of the Supremely blissful nature of God without saint’s grace and satsang. Realization of the real nature of God is obtained by devotion to God which is obtained through saint’s grace and satsang.

भगति तात अनुपम सुखमूला ।

मिलइ जो संत होइँ अनुकूला ।।

“Devotion, dear brother, is incomparable and the very root of bliss; it can be acquired only by the favour of saints.” (Shri Rama Charita Manasa Aranya Kanda: 15.2)

भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी ।

बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी ।।

       “Devotion is independent and a mine of all blessings; men, however, cannot attain it except through the fellowship of saints.” (Shri Rama Charita Manasa Uttara Kanda: 44.3)

       Therefore saints are greater than God for us. The human body obtained by divine grace can be used to attain heaven, hell or moksha according to the actions and sadhana done by him, but satsang obtained through the saint’s grace gives the fruit of only Supreme State.

       God delivers the wicked by destroying them whereas saints do the same by reforming their mental modifications. God is bound by Laws enacted by Him but saints are overcome by mercy. Saints are greater even from this point of view. God can be found everywhere but Self-realized saints can be found in very few places.

हरि दुरलभ नहिं जगत में, हरिजन दुरलभ होय ।

हरि हेर्याँ सब जग मिलै, हरिजन कहिं एक होय ।।

       “In this world God is not a rarity, rather His loving devotee who has taken refuge in Him, is a rarity. On searching, God will be found everywhere but God’s loving devotees can be found in few places.”

       We should believe saints to be greater because they are greater in delivering us. Saint and God, both are one from the philosophical viewpoint.

       How to serve saints? This question can be answered in these words alone. The best way to serve a saint is to follow the dictates of his mind, his commands and follow His principles and ideal with deep regard. This is the highest possible way of serving saints because they love their principles more than their life breath which is dearest to all of us.

We should follow their principles in all respects, and conduct ourselves according to His mind and if we cannot know His mind we should follow his signals, commands etc. This is the greatest service we can render to Him. There is no service greater than following the commands of the saint.” Therefore if we serve Him with our mind also while serving Him physically it will be the best service.

We should live in His company and ask Him about God to know what His principle and divine realization is. We can reap greater benefits from Him this way. To desire worldly things related to a son, a woman, wealth, honour, fame etc. is to break a diamond with a stone. This is not the appropriate use of the company of saints.

Consider all that they suggest as their order and follow them. Obedience to the commands is believed to be the most important way of service.

There was a saint who wanted to test one of His devout followers living with Him. He said, “My back is aching. Press (massage) it with your feet.” The devout person said, “Maharaj, How can I place my foot on your body?” The saint replied, “You did not place your foot on my body but haven’t you placed it on my tongue?”

Yes, it is possible that you cannot follow the order of a saint completely but if your mind is inclined to follow His words, and you have made all possible effort, you will get great benefit even without carrying out His order to the letter.

Saints deliver satsang (uninvited) because by going to the loving aspirants of knowledge they get a chance to reflect, think and contemplate on divine thoughts which are very dear to them. Not only this, they thank the persons who hear His satsang because he could devote some of His time discussing God. Kakabhushundi said to Garuda, “You have done me a kindness by giving me a chance to discuss God through satsang.”

Usually we fail to understand saints. We wish to see some miraculous facts about their outward actions. It is very difficult to recognize a saint with our limited intellect. We can recognize him only through His grace and divine grace. We become perplexed when we try to recognize them by putting them to the test because it is wrong to test saints. Then how to recognize a saint?

On association with a great soul, if our sadhana is enhanced, divine qualities come to us, we progress on the spiritual path, get knowledge about divine truth, our faith increases in true shastras, God, we develop love for God and keep remembering Him then he is a saint for us. To get this type of benefit from Him is true benefit.

The association of saints never goes in vain. To live truly in His company is to understand the importance of His company and put his principles into practice. The real benefit of His company is experienced quickly by doing this.

[ऋषि प्रसाद अंक-293़]

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Mantra Article

Handy Mantra List


बीजमंत्रों का महत्त्व समझकर उनका उच्चारण किया जाय तो बहुत सारे रोगों से छुटकारा मिलता है। उनका अलग-अलग अंगों एवं वातावरण पर असर होता है।
ʹૐʹ के ʹओʹ उच्चारण से ऊर्जाशक्ति का विकास होता है तो ʹमʹ से मानसिक शक्तियाँ विकसित होती हैं। ʹૐʹ से मस्तिष्क, पेट और सूक्ष्म इन्द्रियों पर सात्त्विक असर होता है। ʹह्रींʹ उच्चारण करने से पाचन-तंत्र, गले व हृदय पर तथा ʹह्रंʹ से पेट, जिगर, तिल्ली, आँतों व गर्भाशय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। औषधि को एकटक देखते हुए ʹૐ नमो नारायणाय।ʹ मंत्र का 21 बार जप करके फिर औषधि लेने से उसमें भगवद्-चेतना का प्रभाव आता है और विशेष लाभ होता है। रात को नींद न आती हो तो ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ इस मंत्र का जप-स्मरण करें। स्मरण करते-करते अवश्य अच्छी नींद आयेगी।


दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

Note: Guru Mantra (Mantra given by Sath Guru during Mantra Diksha) is a connection between SathGuru and Shishya (Disciple) and should not be revelead to anyone ever.  Below are some useful powerful mantras that help Sadhaks in various way.

Beeja Mantra

for Memory, Intellect and in Coma

‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है।
‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है। इसके विधिवत जप से कोमा में गये हुए रुग्ण भी होश में आ जाते हैं। अनेक रुग्णों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

for Liver, Brain, Hepatitis-B, Bronchitis

‘खं’ बीजमंत्र लीवर, हृदय व मस्तिषक को शक्ति प्रदान करता है। लीवर के रोगों में इस मंत्र की माला करने से अवश्य लाभ मिलता है। ‘हिपेटायटिस-बी’ जैसे असाध्य माने गये रोग भी इस मंत्र के प्रभाव से ठीक होते देखे गये हैं ब्रोन्कायटिस में भी ‘खं’ मंत्र बहुत लाभ पहुँचाता है।

Monthly Periodic Problems of Women Cured with Vedic Mantra Power

‘थं’ मंत्र मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है। इससे अनियमित तथा अधिक मासिक स्राव में राहत मिलती है। महिलाएँ इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए हारमोन्स की जो गोलियाँ लेती हैं, वे होने वाली संतान में विकृति तथा गर्भाशय के अनेक विकार उत्पन्न करती हैं। उनके लिए भगवान का प्रसाद है यह ‘थं’ बीजमंत्र।

Health Mantra – How to get Healthy –

स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए सिर पर हाथ रखकर मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोचारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।
हे अच्युत! हे अनन्त! हे गोविन्द! – इस नामोच्चारणरूप औषध से तमाम रोग नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सत्य कहता हूँ…… सत्य कहता हूँ।

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |
Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid bad dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |

Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः

Om hansam hansaha

रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है


बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा – Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu


कं -मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में। 
Relieves one from the fear of death; is useful in skin diseases and blood disorders.


ह्रीं -मधुमेह, हृदय की धड़कन में। 
Is beneficial in diabetes mellitus and palpitation.


घं – स्वपनदोष व प्रदररोग में। 
Helps in nocturnal emissions and leucorrhoea.


भं -बुखार दूर करने के लिए। 
Relief from fever.


क्लीं -पागलपन में। 
Is useful in mental disorders.


सं -बवासीर मिटाने के लिए। 
– Cures piles.


वं -भूख-प्यास रोकने के लिए। 
Prevents hunger and thirst.


लं -थकान दूर करने के लिए। 
Relieves fatigue and exhaustion.

for Marriage only for females

जय जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori

Nirogi va sampann hone ke Liye Mantra [ Health Mantra]

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये 

ॐ हुं विष्णवे नमः ।


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |
Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

om namo bhagvate vaasudevaay
Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

ॐ घं काली कालीकायै नमः |

Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |
buddhi vivek vigyaan nidhaana ||
Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

Blow away the Impediments

‘tam’ (टं)
is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.
Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.
Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा ।

shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa

The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

Digestion Mantra

अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam
Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam
Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

Mantra to cure all types of diseases

Dharmarajavrata (mantra mahodadhi) Eliminates all diseases:

Even if you are suffering from incurable diseases wake up early in the morning,


ॐ क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहक्रते नमः ।

aum kraum hrim a am vaivasvataya dharmarajaya bhaktanugrahakrite namah

Do constant jap of this mantra. It will help cure all your Diseases and deliver you from all sins
and afflictions.

Mantra to attain Wealth

People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे |
अष्टलक्ष्मी च धीमहि | तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात | 
om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|
ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).
Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

Mantra To Elleviate Sudden Trouble

Chanting this mantra 108 times everyday, elleviates one from miseries and sudden trouble.

ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

Aum raan raan raan raan raan raan raan raan mam kashtam svaahaa
we can replace मम् (mam) with name of person, whose problems have to be removed.
Note:- in above mantra raan is for 8 times,

For Victory Vijaya

Chant Aditya Hridya Stotra 3 Times facing east direction.

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’


 



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The Magnificence of Mantras

Even in this present age of materialistic life Mantra-Shakti can prove to be more powerful than the Yantra-Shakti. Mantra is a divine instrument with the rare potential of arousing our dormant consciousness. Thus it helps develop our latent powers and brings our original greatness to the fore. The parents give birth merely to our physical body whereas the True Brahmanishtha Sadgurus, the personages established in their True Self, give birth to our Chinmay Vapoo through Mantra-Diksha. Man can attain greatness by developing his dormant powers through Mantra. The regular japa of a mantra reduces restlessness of the mind, brings restraint in life; and works wonders in developing the concentration and memory. A Mantra has different effects on different energy centres of the body. Many personages like Mahavir, Buddha, Kabir, Guru Nanak, Swami Vivekanand, Ramkrishna Paramhansa, Swami Ramtirtha, Pujyapaad Swami Sri Lilashahji Maharaj, etc. have attained respect and reverence all around the world through their awareness of the True glory of Mantra.

Beej Mantras:

 

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

 

To marry to good husband New!

 

जय जय गिरिवर राज किशोरीजय महेश मुख चंद्र चकोरी 

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori 

 

Chintamani Mantra htm-pdf

 

Tulsi Mantra

तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते
mahaprasad janani sarvasaubhagyavadhini
aadhi vyaadhi jara muktam tulsi tvaam namostute

 

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |

Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid wet dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |


Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः |
Om hansam hansaha|
रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है |

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |

Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

om namo bhagvate vaasudevaay

Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

घं काली काली कायै नमः |
Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |

buddhi vivek vigyaan nidhaana ||

Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

 

Lakshmi Barkat Mantra

अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च न करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान न बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है |
मंत्र है -

ॐ अच्युताय नमः
Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
ॐ अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; २ गुरूवार करे, ४ गुरूवार करे, मतलब ४ सप्ताह, २ सप्ताह - "ॐ अच्युताय नमः, ॐ अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |

Blow away the Impediments

  • tam’(टं)
    is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.

  • Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.

  • Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा
shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa
  • The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

  • Digestion

    अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
    आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

     

    Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam

    Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam

    • Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

    Mantra to attain Wealth

    People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

    Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), lightDhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

     

    om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

    ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

    It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture ofLakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

    Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

    Mantra To Alleviate Sudden Trouble

    Chanting this mantra 108 times everyday, alleviates one from miseries and sudden trouble.

    ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

    Aum raam raam raam raam raam raam raam raam mam kashtam svaahaa

    Note:- in above mantra raam is for 8 times 

     

    Mantras by Shri Sureshanandji

    Mantras by Sureshanandji(mp3)

    कार्यसिद्धिकेलिए

    ॐ गं गणपतये नमः

    Om gam ganpatay Namah

    हर कार्य शुरु करने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करेंकार्य सिद्ध होगा |

    -Uttrayan Shivir Amdavad 2008

    Surya Gayatri Mantra

     आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |

     

    om aadityaay vidmahe bhaaskaraaye dheemahi tanno bhaanu prachodayaat

     

    Mala Mantra

    जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें 

    ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

    Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
    om aim shree aksh maalaay namah

     

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।