भगवन्नाम-जपः एक अमोघ साधन

भगवन्नाम जप-संकीर्तन से अनगिनत जीवों का उद्धार हुआ है एवं अनेक प्राणी दुःख से मुक्त होकर शाश्वत सुख को उपलब्ध हुए हैं।

 

भगवन्नाम-जापक, भगवान के शरणागत भक्तजन प्रारब्ध के वश नहीं रहते। कोई भी दीन, दुःखी, अपाहिज, दरिद्र अथवा मूर्ख पुरुष भगवन्नाम का जप करके, भगवान की भक्ति का अनुष्ठान करके इसी जन्म में कृतकृत्य हो सकता है।

 

भगवन्नाम की डोरी में प्रभु स्वयँ बँध जाते हैं और जिनके बंदी स्वयं भगवान हों, उन्हें फिर दुर्लभ ही क्या है?

इस असार संसार से पार होने के लिए भगवन्नाम-स्मरण एक सरल साधन है।

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

7 janmon ki daridrata mitane keliye

 

Jo 7 Janmon Ki daridrata dur kerna chahte hain ve 7 saptah tak 120 mala Omkar Mantra ki Japen , aur Surya Narayan ko Khir ka bhog lagaker , brumadhya me Surya Narayan Ka Dhyan karen

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

 

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

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गुरु और सद्‌गुरु
Ashram India

गुरु और सद्‌गुरु

- पूज्य बापूजी
गुरु और  सद्‌गुरु में फर्क है । गुरु तो शिक्षक हो सकता है, मार्गदर्शक हो सकता है, केवल सूचनाएँ दे सकता है, किताबें पढ़ा सकता है, आत्मानुभव नहीं करा सकता लेकिन सद्‌गुरु बिना बोले भी सत्शिष्य को आत्मज्ञान का रहस्य समझा सकते हैं और सत्शिष्य बिना पूछे भी समझ सकता है ।

गुरोस्तु मौनं व्याख्यानं शिष्यास्तु छिन्नसंशयाः ।। (श्रीदक्षिणामूर्तिस्तोत्रम् : 12)

 सद्‌गुरु  में वह प्रभाव होता है । साधक, शिष्य में से जब हम सत्शिष्य बनते हैं तब  सद्‌गुरु  कभी-कभार मौन निगाह से भी हमारे प्रश्नों का उत्तर हमारे चित्त में भर देते हैं । शिष्य पूछता नहीं और सद्‌गुरु बोलते नहीं फिर भी सत्शिष्य की शंकाओं का समाधान हो जाता है । ऐसे  सद्‌गुरुओं को जितना दो उतना कम है और जो भी श्रद्धा से दिया वह उनको बहुत लगता है । वे महापुरुष आत्मतृप्त होते हैं । 
हम अपने को कृतघ्नता की खाई में न गिरायें इसलिए हम कुछ-न-कुछ देकर कृतज्ञता का एहसास करते हैं । जहाँ प्रेम होता है वहाँ दिया जाता है । अब तुम्हारे एक लोटे पानी की क्या आवश्यकता है शिवजी को ? लेकिन कुछ-न-कुछ दिये बिना संकल्प साकार नहीं होता, भाव उभरता नहीं । प्रेम दिये बिना मानता नहीं है और अहंकार लिये बिना मानता नहीं है । 
यहाँ  सद्‌गुरु -शिष्य का संबंध लौकिक दिखते हुए भी उसमें अलौकिक प्रेम है, अलौकिक ज्ञान है, अलौकिक त्याग है । शिष्य अपने जीवन में से कुछ बचा-धचा के गुरु को अर्पण करता है । उनकी दैवी सेवा में तन-मन-धन से लग जाता है । और  सद्‌गुरु ने गुरु-परम्परा से जो अखूट खजाना पाया है उसे वे खुले हाथ लुटाने को दिन-रात तत्पर होते हैं, यहाँ दोनों का प्रेम और त्याग छलकता है ।

शिष्य को ऐसा चाहिए कि गुरु को सब कुछ दे । 
गुरु को ऐसा चाहिए कि शिष्य का कछु न ले ।।

 सद्‌गुरु लेते हुए दिखते हैं लेकिन शिष्यों के लिए लगा देते हैं । लेते हैं तब भी उनकी पुण्याई के लिए और उससे व्यवस्था करते हैं तो उनकी आध्यात्मिक लक्ष्यप्राप्ति की यात्रा के लिए । ऐसे सद्‌गुरु आत्मज्ञान के अथाह दरिया होते हैं । ऐसे सद्‌गुरु शाब्दिक या स्कूली ज्ञान में चाहे अँगूठाछाप हों फिर भी आत्मज्ञान में वे गुरुओं के गुरु हैं । संत कबीरजी जो बोले वह ‘बीजक’ बन गया, रामकृष्णजी जो बोले वह वचनामृत बन गया, नानकजी और उनके प्यारे जो बोले हैं वह ‘गुरुग्रंथ साहिब’ बन गया । ऐसे महापुरुष अनुभवसम्पन्न वाणी से बोलते हैं । 
शिष्य वह है जो सद्‌गुरु-ज्ञान को बढ़ाता है, सद्‌गुरु के अनुभव को आत्मसात् करता है । सिद्धांत आगे बढ़ता जाता है, प्रयोग चालू रखा जाता है... यही गुरुसेवा है । सद्‌गुरु-पूजा सत्य की पूजा है, आत्मज्ञान, आत्मानुभव की पूजा है । जब तक मानव-जात को सच्चे सुख की आवश्यकता है और सच्चे सुख का अनुभव करानेवाले सद्‌गुरु जब तक धरती पर हैं, तब तक सद्‌गुरुओं का आदर और पूजन होता ही रहेगा ।
सद्‌गुरु का पूजन, सद्‌गुरु का आदर सत्यज्ञान एवं शाश्वत अनुभव का आदर है, मुक्ति का आदर है, अपने जीवन का आदर है । जो अपने मनुष्य-जीवन का आदर करना नहीं जानता वह सद्‌गुरु का आदर करना क्या जाने ! जो मनुष्यता की महानता नहीं जानता है वह सद्‌गुरु की महानता क्या जाने ! सद्‌गुरु आत्मज्ञान के लहराते सागर हैं और शिष्यरूपी चन्द्र को देखकर छलकते हैं । शिष्य निर्मलबुद्धि हो जाता है तो उसमें कोमलता आती है । निर्मल बुद्धि व शुद्ध हृदय में वह ज्ञान का जगमगाता प्रकाश, आनंद, नित्य नवीन रस प्रकट करने में सक्षम होता है ।
बहिर्गुरु को इन आँखों से सब लोग देख सकते हैं लेकिन सत्शिष्य तो उपदेश के द्वारा, सुमिरन के द्वारा अंतर्गुरु की प्रतीति करके अपने चित्त को हँसते-खेलते पावन करने में सफल हो जाते हैं । बहिर्गुरु को तो शास्त्रों के द्वारा भी कोई समझ ले लेकिन अंतर्गुरु को तो शिष्य का अंतर ही समझ पाता है, झेल पाता है । जैसे एक बर्तन का शहद अथवा घी दूसरे बर्तन में उँडेला जाता है तो पहला बर्तन खाली-सा हो जाता है लेकिन यह ज्ञान खाली नहीं होता । जला हुआ दीया हजारों अनजले दीयों को जला के प्रकाशित कर दे तो भी जले हुए दीये का कुछ नहीं घटता है यह ऐसा आत्म-दीया है । संसारी दीये का तो तेल नष्ट हो जाता है लेकिन अनंतज्ञान दीये का कभी कुछ नष्ट नहीं होता । यह अविनाशी का आदर है, पूजन है । यह अविनाशी की प्यास जब तक मनुष्य-चित्त में बनी रहेगी, तब तक गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया जाता रहेगा और सद्‌गुरुओं का आदर होता रहेगा । 
‘गुरुपूर्णिमा उत्सव’ पूर्ण होने की खबर लानेवाला उत्सव है । यह व्रत है । सद्‌गुरु-पूजन किये बिना शिष्य अन्न नहीं खाता । शारीरिक पूजन करने का अवसर नहीं मिलता है तो मन से ही पूजन कर लेता है । षोडशोपचार से पूजा करने से जो पुण्य होता है उससे कई गुना ज्यादा मानस-पूजा का पुण्य कहा गया है । वह सत्शिष्य सद्‌गुरु की मानस-पूजा कर लेता है । 

भावे हि विद्यते देवः ।

लोहे की, काष्ठ या पत्थर की मूर्ति में देव नहीं, तुम्हारा भाव ही तो देव है । सत्शिष्य अपने सद्‌गुरु को मन-ही-मन पवित्र तीर्थों के जल से नहलाता है । वस्त्र पहनाता है, तिलक करता है, पुष्पों की माला अर्पित करता है । सद्‌गुरु के आगे कुछ-न-कुछ समर्पित करता है ।

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम् । 
मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ।।

गुरु, आचार्य अपनी-अपनी जगह पर आदर करने योग्य हैं लेकिन सद्‌गुरु तो सदा पूजने योग्य हैं । सत्य का जिनको ज्ञान हो गया, परमात्मा का जिनको अपने हृदय में साक्षात्कार हो गया वे सद्‌गुरु हैं । संत कबीरजी कहते हैं :

कबीर ते नर अंध हैं, गुरु को कहते और ।  

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर ।।

यह तन विष की बेल री, गुरु अमृत की खान । 
सीस दिये सद्‌गुरु मिलें, तो भी सस्ता जान ।।

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Guru and SatGuru

There is a big difference between Guru and SatGuru. They are not the same. A Guru may be a teacher or guide who can provide you with information, teach you various subjects from textbooks, but cannot help you realize the Self. However a SatGuru without speaking a single word can expound the esoteric Self-knowledge to the true disciple. A true disciple can imbibe it without even asking.

गुरोस्तु मौनं व्याख्यानं शिष्यास्तु छिन्नसंशयाः ।। 

“It is strange to see, the very old disciples, and the very young teacher, who sit under a banyan tree, with the teacher always observing silence, and the students getting all the doubts cleared.”

(Shri Dakshinamurti Stotram: 12)

A SatGuru possesses that power. When we become a true disciple from an ordinary sadhaka or disciple, on certain occasions SatGuru transmits the answers to our questions to our mind through a Silent glance. Disciples do not ask any questions and SatGuru does not speak, nevertheless the true disciples get their doubts cleared. One may give as much as one can but cannot repay His debt and whatsoever is given with due reverential faith is very much from His perspective. These great men are satisfied with the Self.

We express our gratitude by giving something to them (as per our capacity), so that we may not fall into the abyss of ungratefulness. Where there is devotional love, something is given. Of what use is a pitcher of water that you offer to Lord Shiva? Does Lord Shiva need a pitcher of water from you? However without giving anything, resolve is not materialized; spiritual emotions do not arise. A divine Lover cannot help giving something to God while an egotist cannot help snatching. Egotism tends to grab and exploit whereas love tends to give and serve.

Here, though the relationship between SatGuru and disciple seems to be worldly, it reflects spiritual love, spiritual knowledge and spiritual sacrifice. The disciple saves something from his livelihood and offers it to SatGuru. He engages himself in His service dedicating his body, mind and wealth to His divine mission and the SatGuru who has attained inexhaustible treasure through Guru Parampara (the infinite succession of Gurus), is ready to distribute that treasure generously day and night. Here love and sacrifice by both is overflowing.

शिष्य को ऐसा चाहिए कि गुरु को सब कुछ दे । 
गुरु को ऐसा चाहिए कि शिष्य का कछु न ले ।।

“The disciple should give all of his possessions to the Guru whereas the Guru ought not to accept anything from the disciple.”

It appears sometimes that SatGuru is receiving (whatever is offered by his disciples to Him), but He spends the same for the disciples’ welfare. When Guru accepts something even then it is for increasing their religious merits and when He spends it in organizing spiritual intensives that too is intended for their (disciples) spiritual journey to help them attain their spiritual goal. Such SatGuru is the bottomless ocean of Self-knowledge. Such SatGuru may be illiterate in verbal knowledge given in schools nevertheless He is master of masters (Guru of gurus) in Self-knowledge. Whatever saint Kabir spake turned out to be the ‘Bijak’, whatever Ramakrishna spake turned out to be the ‘Ramakrishna Vachnamrita’, whatsoever Nanakji and His beloved (disciples and saints) spake became the ‘Guru Granth Sahib’. The words spoken by such great men are soaked with their realization (of Truth).

True disciples propagate the wisdom imparted by the SatGuru, assimilate His realization, and the established conclusion keep advancing and thus experiments persistently go on, this is the service to the Guru (Guru sewa). Worship of SatGuru is the worship of Truth, adoration of Self-knowledge, Self-realization. As long as mankind is in need of real happiness and SatGurus who can impart real happiness live on the earth, SatGurus shall be venerated and worshipped.

Worship of SatGuru and respect for SatGuru is respect for true knowledge and eternal realization, respect for liberation, respect for our life. One who does not know how to show respect to his human life, how will he get to know how to show respect to the SatGuru? How can he realize the greatness of a SatGuru who does not know the greatness of humanness? SatGuru is a surging sea of Self-knowledge that flows upon seeing the moon of disciple. When the disciple’s intellect becomes pure he becomes humble. He becomes capable of revealing the brilliant light of knowledge, bliss and ever new joy in his pure intellect and heart.

Everyone can see the external Guru with these eyes however the true disciple perceives the inner Guru through His remembrance and spiritual instructions and thereby succeeds in purifying his mind while laughing and playing. External Guru may be understood by some people through scriptures; nevertheless internal Guru can be understood and imbibed by the heart of the disciple only. When honey or ghee is poured from one vessel to another, the former vessel becomes almost empty, but this knowledge is not emptied when transferred from Guru’s heart to the disciple’s heart. Thousands of unlit lamps could be lit at the flame of a lit lamp, nevertheless there is no loss of illumination of the lit lamp; this is such a lamp of the Self. Though the oil of the worldly clay lamp is finished however, nothing of the lamp of infinite knowledge is ever finished. This is reverence and worship of the imperishable. So long the longing (thirst) for imperishable persists in the human mind, the festival of Guru Poornima will be celebrated and SatGurus will be venerated.

Festival of the Guru Poornima imparts the knowledge of being complete Whole. This is an observance. The disciple does not consume food before worshipping SatGuru. He worships Guru mentally when there is no possibility of worshipping Him physically. Religious merit obtained by performing mental worship is considered many times more than that of the Shodshopachar Puja (worship with the offering of sixteen things). The true disciple worships SatGuru mentally.

भावे हि विद्यते देवः ।

“God does not exist in wooden, stone or in the iron idol. God exists in faith only.” Your faith is verily your God. The true disciple bathes his SatGuru mentally in the sacred waters of pilgrimages, makes Him wear attires, applies a tilak on his forehead, offers a garland of flowers. He offers something to his SatGuru.

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः पूजामूलं गुरोः पदम् । 
मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ।।

“The form of Guru is the root of meditation. The feet of Guru are the root of worship. The teaching of the Guru is the root of all Mantras. The Grace of Guru is the root of Salvation.”

Guru and Acharya are deserving of respect in their respective places; however SatGuru is ever deserving of worship. He is SatGuru who has realized Truth, Supreme Self in his heart. Saint Kabirji says,

कबीर ते नर अंध हैं, गुरु को कहते और ।  

हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर ।।

यह तन विष की बेल री, गुरु अमृत की खान । 
सीस दिये सद्‌गुरु मिलें, तो भी सस्ता जान ।।

“O Kabir, those men are indeed blind, Who think the Master is other than God,
If the Lord is angry, the Master is your asylum. If the Master is displeased, there is no refuge in the entire creation.”

“This body is the creeper that bears poisonous fruits, the Master is a reservoir of nectar; Even in exchange for your head if the master you gain, Kabir, it is a cheap bargain.”   


[Rishi Prasad Issue-294]

 

 

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Mantra Article

Handy Mantra List


बीजमंत्रों का महत्त्व समझकर उनका उच्चारण किया जाय तो बहुत सारे रोगों से छुटकारा मिलता है। उनका अलग-अलग अंगों एवं वातावरण पर असर होता है।
ʹૐʹ के ʹओʹ उच्चारण से ऊर्जाशक्ति का विकास होता है तो ʹमʹ से मानसिक शक्तियाँ विकसित होती हैं। ʹૐʹ से मस्तिष्क, पेट और सूक्ष्म इन्द्रियों पर सात्त्विक असर होता है। ʹह्रींʹ उच्चारण करने से पाचन-तंत्र, गले व हृदय पर तथा ʹह्रंʹ से पेट, जिगर, तिल्ली, आँतों व गर्भाशय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। औषधि को एकटक देखते हुए ʹૐ नमो नारायणाय।ʹ मंत्र का 21 बार जप करके फिर औषधि लेने से उसमें भगवद्-चेतना का प्रभाव आता है और विशेष लाभ होता है। रात को नींद न आती हो तो ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ इस मंत्र का जप-स्मरण करें। स्मरण करते-करते अवश्य अच्छी नींद आयेगी।


दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

Note: Guru Mantra (Mantra given by Sath Guru during Mantra Diksha) is a connection between SathGuru and Shishya (Disciple) and should not be revelead to anyone ever.  Below are some useful powerful mantras that help Sadhaks in various way.

Beeja Mantra

for Memory, Intellect and in Coma

‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है।
‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है। इसके विधिवत जप से कोमा में गये हुए रुग्ण भी होश में आ जाते हैं। अनेक रुग्णों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

for Liver, Brain, Hepatitis-B, Bronchitis

‘खं’ बीजमंत्र लीवर, हृदय व मस्तिषक को शक्ति प्रदान करता है। लीवर के रोगों में इस मंत्र की माला करने से अवश्य लाभ मिलता है। ‘हिपेटायटिस-बी’ जैसे असाध्य माने गये रोग भी इस मंत्र के प्रभाव से ठीक होते देखे गये हैं ब्रोन्कायटिस में भी ‘खं’ मंत्र बहुत लाभ पहुँचाता है।

Monthly Periodic Problems of Women Cured with Vedic Mantra Power

‘थं’ मंत्र मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है। इससे अनियमित तथा अधिक मासिक स्राव में राहत मिलती है। महिलाएँ इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए हारमोन्स की जो गोलियाँ लेती हैं, वे होने वाली संतान में विकृति तथा गर्भाशय के अनेक विकार उत्पन्न करती हैं। उनके लिए भगवान का प्रसाद है यह ‘थं’ बीजमंत्र।

Health Mantra – How to get Healthy –

स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए सिर पर हाथ रखकर मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोचारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।
हे अच्युत! हे अनन्त! हे गोविन्द! – इस नामोच्चारणरूप औषध से तमाम रोग नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सत्य कहता हूँ…… सत्य कहता हूँ।

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |
Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid bad dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |

Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः

Om hansam hansaha

रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है


बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा – Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu


कं -मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में। 
Relieves one from the fear of death; is useful in skin diseases and blood disorders.


ह्रीं -मधुमेह, हृदय की धड़कन में। 
Is beneficial in diabetes mellitus and palpitation.


घं – स्वपनदोष व प्रदररोग में। 
Helps in nocturnal emissions and leucorrhoea.


भं -बुखार दूर करने के लिए। 
Relief from fever.


क्लीं -पागलपन में। 
Is useful in mental disorders.


सं -बवासीर मिटाने के लिए। 
– Cures piles.


वं -भूख-प्यास रोकने के लिए। 
Prevents hunger and thirst.


लं -थकान दूर करने के लिए। 
Relieves fatigue and exhaustion.

for Marriage only for females

जय जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori

Nirogi va sampann hone ke Liye Mantra [ Health Mantra]

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये 

ॐ हुं विष्णवे नमः ।


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |
Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

om namo bhagvate vaasudevaay
Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

ॐ घं काली कालीकायै नमः |

Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |
buddhi vivek vigyaan nidhaana ||
Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

Blow away the Impediments

‘tam’ (टं)
is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.
Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.
Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा ।

shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa

The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

Digestion Mantra

अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam
Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam
Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

Mantra to cure all types of diseases

Dharmarajavrata (mantra mahodadhi) Eliminates all diseases:

Even if you are suffering from incurable diseases wake up early in the morning,


ॐ क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहक्रते नमः ।

aum kraum hrim a am vaivasvataya dharmarajaya bhaktanugrahakrite namah

Do constant jap of this mantra. It will help cure all your Diseases and deliver you from all sins
and afflictions.

Mantra to attain Wealth

People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे |
अष्टलक्ष्मी च धीमहि | तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात | 
om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|
ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).
Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

Mantra To Elleviate Sudden Trouble

Chanting this mantra 108 times everyday, elleviates one from miseries and sudden trouble.

ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

Aum raan raan raan raan raan raan raan raan mam kashtam svaahaa
we can replace मम् (mam) with name of person, whose problems have to be removed.
Note:- in above mantra raan is for 8 times,

For Victory Vijaya

Chant Aditya Hridya Stotra 3 Times facing east direction.

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’


 



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The Magnificence of Mantras

Even in this present age of materialistic life Mantra-Shakti can prove to be more powerful than the Yantra-Shakti. Mantra is a divine instrument with the rare potential of arousing our dormant consciousness. Thus it helps develop our latent powers and brings our original greatness to the fore. The parents give birth merely to our physical body whereas the True Brahmanishtha Sadgurus, the personages established in their True Self, give birth to our Chinmay Vapoo through Mantra-Diksha. Man can attain greatness by developing his dormant powers through Mantra. The regular japa of a mantra reduces restlessness of the mind, brings restraint in life; and works wonders in developing the concentration and memory. A Mantra has different effects on different energy centres of the body. Many personages like Mahavir, Buddha, Kabir, Guru Nanak, Swami Vivekanand, Ramkrishna Paramhansa, Swami Ramtirtha, Pujyapaad Swami Sri Lilashahji Maharaj, etc. have attained respect and reverence all around the world through their awareness of the True glory of Mantra.

Beej Mantras:

 

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

 

To marry to good husband New!

 

जय जय गिरिवर राज किशोरीजय महेश मुख चंद्र चकोरी 

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori 

 

Chintamani Mantra htm-pdf

 

Tulsi Mantra

तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते
mahaprasad janani sarvasaubhagyavadhini
aadhi vyaadhi jara muktam tulsi tvaam namostute

 

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |

Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid wet dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |


Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः |
Om hansam hansaha|
रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है |

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |

Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

om namo bhagvate vaasudevaay

Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

घं काली काली कायै नमः |
Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |

buddhi vivek vigyaan nidhaana ||

Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

 

Lakshmi Barkat Mantra

अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च न करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान न बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है |
मंत्र है -

ॐ अच्युताय नमः
Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
ॐ अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; २ गुरूवार करे, ४ गुरूवार करे, मतलब ४ सप्ताह, २ सप्ताह - "ॐ अच्युताय नमः, ॐ अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |

Blow away the Impediments

  • tam’(टं)
    is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.

  • Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.

  • Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा
shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa
  • The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

  • Digestion

    अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
    आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

     

    Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam

    Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam

    • Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

    Mantra to attain Wealth

    People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

    Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), lightDhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

     

    om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

    ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

    It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture ofLakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

    Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

    Mantra To Alleviate Sudden Trouble

    Chanting this mantra 108 times everyday, alleviates one from miseries and sudden trouble.

    ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

    Aum raam raam raam raam raam raam raam raam mam kashtam svaahaa

    Note:- in above mantra raam is for 8 times 

     

    Mantras by Shri Sureshanandji

    Mantras by Sureshanandji(mp3)

    कार्यसिद्धिकेलिए

    ॐ गं गणपतये नमः

    Om gam ganpatay Namah

    हर कार्य शुरु करने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करेंकार्य सिद्ध होगा |

    -Uttrayan Shivir Amdavad 2008

    Surya Gayatri Mantra

     आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |

     

    om aadityaay vidmahe bhaaskaraaye dheemahi tanno bhaanu prachodayaat

     

    Mala Mantra

    जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें 

    ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

    Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
    om aim shree aksh maalaay namah

     

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।