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Divya Prerna Prakash

Youvan Suraksha-2

Apne Rakshak Aap


Photoनारी तू नारायणी


ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र

एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है :

 

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय

मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा |


ॐ अर्यमाय नमः’ ये मन्त्र जपने से ब्रम्हचर्य पालने में मदद मिलती है

जब कभी भी आपके मन में अशुद्ध विचारों के साथ किसी स्त्री के स्वरूप की कल्पना उठे तो आप ॐ दुर्गा देव्यै नमः मंत्र का बार-बार उच्चारण करें और मानसिक प्रणाम करें |”

-शिवानंदजी


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Brahmcharya Mahima

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/ Categories: Brahmcharya

बापूजी मेरा मैरिज हो जाएगा ना ?

तुमने खाना खाया ? मैंने भी नहीं खाया ...

रात को स्वप्ने आए,  सत्यानाश | सांप सर्पिनी काटे तब आदमी मरता है, ये तो खाली विकारी भाव से बातचीत करो तो भी आदमी तबाह होता है |

 

बोले वो तो बम्बई है ओर मैं तो रहता हूँ कलकत्ता हम तो मिले ही नहीं ६ महीने से |

लेकिन काला मुँह करते हैं बात कर करके कमरतोड़ कार्यक्रम स्वप्नदोष होजाता है ...और क्या खोल के बोलूँ |आखें अन्दर घुसी हुई , बुढ़ापा आ रहा है,  झुरियाँ पड़ रही हैं |
-
हमने शादी तो नहीं की , लेकिन वो मुझे बहुत चाहती है ,मैं उसे बहुत चाहता हूँ ...चाहो मरो फिर | वो बहुत अच्छा है ...इश्वर से भी अच्छा है ? इश्वर से भी अच्छी है ? बुद्धि मारी गई  तेरी ...जो प्रेम इश्वर को करना चाहिए वो प्रेम  बेटे बेटी सम्पदा रुपया पैसा हाड़ मास के शरीर को किया तो तुम्हारी खैर नहीं |इश्वर के नाते सबका मान चाहो लेकिन इश्वर का महत्त्व किसी वस्तु को आकृति को दिया ........नहीं मैं तो उनके बिना नहीं जीऊँगी बापूजी कुछ भी हो जाए | तो मर फिर | बुढ़िया हो गई है बेचारी ....नहीं वो बहुत अच्छा लड़का है बस मेरा मैरिज होजाए मैं कहा थोडा संयम रखो माँ बाप से हिलो मिलो ......

होजाए गा ना होजाएगाना 
अभी देखो ..हाय  राम ,,,अनुष्ठान करो .....अनुष्ठान करे तो वही दिखे मुआ ...अब वो आती  ही नहीं है | नारायण हरि |
अनुष्ठान में इष्ट देव दिखें, गुरुदेव दिखें, भगवान दिखें तो समझो ट्रैक बदला , लेकिन अनुष्ठान में वही दिखे तो उससे नफरत नहीं करो वो दिखे न दिखे न सोचो सब वासुदेव वासुदेव वो ना दिखे ऐसा भी मत सोचो और दिखे ऐसा भी मत सोचो | जिससे दिख रहा है वो मेरा परमात्मा है सत्य है मुक्त है | मैं तो बलि रजा को धन्यवाद दूँगा | अगर अभी मिले वो गधे के रूप में मैं तो वो गधे के पैर पकड़ के उसकी चरण रज सिर पर लगाऊँगा | क्या भगवान के लिए गधे का रूप धारण करके बलि एकांत में गये | भगवत चिंतन के लिये | धन्य है, बहादुर है, राज वैभव गया दुखी नहीं हुए गधे का रूप चिंतन करके मैं गधा हूँ गधा बन गए और विचार में रहने लगे | इंद्र को ???  | ये तो विस्तार से है योगवाशिष्ठ में उपदेश बलि राजा  का | योगवाशिष्ठ में ही है, महाभारत में ? अच्छा महाभारत में होगा | लेकिन मैंने सुना है, विस्तार से सुना है | बड़ा रसमय है, फिर कभी सुनेंगें | सिर-आँखों पे चढ़ाने जैसा है |

हे हरि,  हे प्रभु, हे प्रभु आनंददाता,  भगवान आनंददाता हैं, ज्ञान स्वरूप हैं | प्राणी मात्र के हितेषी है, सुहृद हैं, उनसे पूछो आवेश में आकर कुछ कर डालो, ये बेवकूफी है | हे भगवान, हे सद्बुद्धिदाता, हे प्रेरणा नाथ | आवेश होगा तो इधर भाग उधार भाग | अगर भगवान ने सुन लिया तो शांति और सही दिशा मिलती है |  आवेश में आप निर्णय करोगे तो फंसने का ही निर्णय | भय से स्त्री पुरुष हो सकता है, और पुरुष स्त्री हो सकते हैं | आपका मन जिसका जैसा जहाँ जहाँ आकर्षण होता है वैसी वैसी गति होती रहती  है |

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वे तो चौरासी लाख जन्मो में रोते रहेंगे, अपने को जो करना है कर डालो भाई ! शादी या आत्मसाक्षात्कार

Admin 0 452494 Article rating: 3.8

विवेक की धनीः कर्मावती

Admin 0 11601 Article rating: 4.0
यह कथा सत्यस्वरूप ईश्वर को पाने की तत्परता रखनेवाली, भोग-विलास को तिलांजलि देने वाली, विकारों का दमन और निर्विकार नारायण स्वरुप का दर्शन करने वाली उस बच्ची की है जिसने न केवल अपने को तारा, अपितु अपने पिता राजपुरोहित परशुरामजी का कुल भी तार दिया।
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