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जप विशेष तिथि ( गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग )

 

जप विशेष तिथि ( गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग )

गुरुपुष्यामृत योग :-
पुष्टिप्रदायक पुष्य नक्षत्र का वारों में श्रेष्ट बृहस्पतिवार (गुरुवार ) से योग होने पर यह अति दुर्लभ " गुरुपुष्यामृत योग' कहलाता है । ' सर्वसिद्धिकरः पुष्यः । ' इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है । शुभ, मांगलिक कर्मों के संपादनार्थ गुरुपुष्यामृत योग वरदान सिद्ध होता है । व्यापारिक कार्यों के लिए तो यह विशेष लाभदायी माना गया है । इस योग में किया गया जप , ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं ।

इस वर्ष इस योग के दिनांक व समय :-
१८ अप्रैल २०१३ (दोपहर ३.३२ से १९ अप्रैल सूर्योदय तक )
१६ मई २०१३(सूर्योदय से रात्रि १.२९ तक )
१३ जून २०१३(सूर्योदय से सुबह ७.५५ तक)
१९ दिसम्बर २०१३(२० दिसम्बर प्रात : ७.०२ से सूर्योदय तक ) 


रविपुष्यामृत योग :-
रविवार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग " रविपुष्यामृत योग " कहलाता है । यह योग मंत्रसिद्धि और औषधि - प्रयोग के लिए विशेष फलदायी है ।

इस वर्ष इस योग के दिनांक व समय :-
२७ जनवरी २०१३ (सूर्योदय से शाम ४.३० तक)
१ सितम्बर २०१३ ( रात्रि  १२.१८ से २ सितम्बर सूर्योदय तक )
२९ सितम्बर २०१३( सुबह ८.१३ से ३० सितम्बर सूर्योदय तक )
२७ अक्तूबर  २०१३(सूर्योदय से शाम ७.१४ तक )

( कर्मयोग दैनंदिनी 
२०१३ से )

 
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