महापाप से बचाकर ईश्वर के रास्ते लगाया
जब हमने दीक्षा नहीं ली थी तब घर में पूज्य बापू जी का एक कैलेण्डर लगा हुआ था। मुझे एक बेटा और एक बेटी है तो तीसरी संतान नहीं चाहिए थी। इसलिए गर्भ रहा तो हम पाप के रास्ते जाकर उसे निकालना चाहते थे। रात में पूज्य बापू जी सपने में आये और बोलेः “ऐसा काम मत कर। यह बड़ा पाप है। ” मैंने सोचा, ‘पहले कभी इस प्रकार इनके दर्शन नहीं किये। टी.वी. पर तथा कैलेण्डर में इन्हें देखा था। उस दिन तो हम रुक गये परंतु सोचा कि ‘चलो, लड़का है या लड़की इसकी जाँच करें।’ दूसरे दिन सुबह चार बजे पूज्य बापू जी सपने में आकर बोलेः ‘लड़की ही है, तू पाप नहीं करेगी।’ और हम गर्भपात के महापाप से बच गये। हम 9 महीने तक पूज्य बापू जी की किताबें तथा ज्ञानेश्वरी, दासबोध आदि ग्रंथ पढ़ते रहे। 9 महीने टी.वी., फिल्मी प्रोग्राम भी नहीं देखा। पूज्य बापू जी के वचन सत्य हुए। मैंने एक कन्या को जन्म दिया और गुरुदेव के निर्दशानुसार 9 महीने बिताने का परिणाम यह हुआ कि मेरी कन्या में जन्मजात भक्ति के संस्कार देखने को मिले एवं उसके जीवन में कई चमत्कारिक घटनाएँ भी घटीं। कैसी लीला है गुरुवर की कि हमें गर्भपात के महापाप से बचाकर ईश्वर के रास्ते लगाया ! अब तो हमारे परिवार के सभी लोग मंत्रदीक्षित हैं। धन्य हैं गुरुवर और उनकी लीलाएँ ! ऐसे गुरुवर के चरणों में

कोटि-कोटि वंदन…..

सौ. विजया प्रह्लाद अंभोरे,
नांदेड़ (महाराष्ट्र)
ऋषि प्रसाद, दिसम्बर 2006, पृष्ठ संख्या 29. अंक 168

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