Jodhpur se aaya Pujya Bapuji ka Deepawali Sandesh  2014
Jodhpur se aaya Pujya Bapuji ka Deepawali Sandesh 2014

23 Oct 2014

ॐ ॐ ॐ २३/१०/१४ की यह दिवाली साधकों को बाह्य दर्शन तो नहीं करवाती लेकिन मेरे आतंरिक अनुभव से तुम्हारी श्रद्धा -भक्ति तुम्हें एकाकार करने में बड़ी मदद करेगी | बाह्य संयोग सदा किसी का नहीं रहता और मूल गुरु का मैं इश्वर का, मैं आत्मा का ,मैं एक ही है व शिष्य का मैं श्रद्धा प्रीति ज्ञान से गुरु के मैं से तदाकार होने लगता है तो सहज में ही साधक शिष्य
उस परमात्म में पवन होने लगते हैं | वे धनभागी हैं |
धन्या माता पिता धन्यो .....शिवजी का श्लोक आप जानते हैं | 

जो गुरु का मैं , इश्वर का मैं सभी ईश्वरों का इश्वर ब्रह्म परमात्मा का मैं, सद्रूप , चेतनरूप , आनंदरूप हैं उसी में हयात गुरु को जो सच्चिदानंद स्वरुप ,सर्वव्यापक मानकर सुनते हैं , ध्याते हैं वे अपने गुरुस्वरूप को , आत्मस्वरूप को , ब्रह्मस्वरूप को अपना ही आत्मस्वरूप जानकार मुक्तात्मा महात्मा हो जाते हैं |
ॐ आनंद ॐ माधुर्य ॐ गुरूजी ॐ प्यारेजी ॐ प्रभुजी ॐ मेरेजी |

आत्मविलास में ,आत्मज्ञान में प्रतिष्ठित होने लगते हैं | जहाँ चक्रवर्ती राजा का राजसुख , देव , गन्धर्व ,देवताओं का सुख बाह्य है ,
तुच्छ है | प्यारे प्रभु का , प्यारे गुरु का , प्यारे शिष्य का वह स्व का सुख , स्व का आनंद | पर का सुख परेशान करता है , संसार में रुलाता है
, जन्म मरण में भटकता है | स्व का सुख सदा पास में जब चाहे तब गोता मारो , जब चाहे स्मृति कर लो ॐ आनंद आनंद | ये नए साधकों के लिए |

जो पूर्ण गुरु की पूर्ण कृपा यात्रा कर लेते हैं उनको सहज होता है | इनके लिए जेल जेल नहीं , जोधपुर जोधपुर नहीं |सुख सुख नहीं , दुःख दुःख नहीं | ये सब आभास मात्र ऊपर से ही हो होकर बदलने वाली परिस्थितियाँ हैं | जैसे समुद्र में तरंग , फेन , बुद बदे , झाग, भवंर , तूफानी और शांत तरंगें लेकिन मूल गहरे पानी में ये सब उल्लास मात्र है , वैसे ही यह जगत
सारा उल्लासमात्र है | तुम्हारा वास्तविक मैं ब्रह्म है , जगदीश्वर है , गुरुस्वरूप है , चैतन्यरूप है | जो तुम्हें कभी छोड़ न सके , जिसको तुम
कभी छोड़ न सको मेरा सत चित आनंदरूप कोई कोई जाने रहे | चिदानन्दरूपं शिवोहम शिवोहम , व्यास वशिष्ठ ने मिठाई बने , मैंने खाई

लीलाशाह जी ने तुम्हें खिलाई ऐसी उत्तम दिवाली मनाई | पूरे हैं वे मर्द जो हर हाल में खुश हैं | जोधपुर आने की घटना ने साधकों को तपस्वी बना दिया है | गुरु की याद में , विरह में चित्त पवन होगया है |पावन मिठाई गुरुकृपा की पचाने वाले मेरे प्यारे साधक इस आज के सन्देश को दूर दूर तक सुनेंगे और अब जल्दी भीतर से तो मिल रहे हो , बाहर भी जल्दी मिलोगे | हैं
न खुश खबरी !!! सत को आँच नहीं , झूठ को पैर नहीं | हाजरा हजूर ॐ प्रभु ॐ गुरु ॐ शांति |
मौन हो जाओ और मन में कहो आजाओ .......भीतर से तो हो बाहर से भी आजाओ |
आज दीपावली और कल नूतन वर्ष तुम्हारा मधुमय हो | कल सुबह भी बिस्तर पर ही प्रसन्नता , ज्ञान , ध्यान से मस्त हो जाना क्योंकि तुम्हारा असली स्वरुप मस्त ही है | ज्ञानस्वरुप , चेतनस्वरुप , आनंदस्वरूप |दिवाली के ४ काम
यह सत्संग तो तुमने बहुत सुना है | जिसने नहीं सुना उसे दिवाली की कैसेट सुननी चाहिए , साहित्य पढ़ना चाहिए |

संसार तेरा घर नहीं , दो चार दिन रहना यहाँ | कर याद अपने आप की , शाश्वत सुख व ज्ञान जहाँ ||

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