कार्तिक पूर्णिमा निमित्त पूज्य बापूजी का शुभ संदेश - 6 नवम्बर 2014
कार्तिक पूर्णिमा निमित्त पूज्य बापूजी का शुभ संदेश - 6 नवम्बर 2014
कार्तिक पूर्णिमा निमित्त पूज्य बापूजी का शुभ संदेश - 6 नवम्बर 2014

धनभागी हैं वे जिनके जीवन में उन्नति का व्रत है , चाहे पूनम व्रत हो , आत्मा परमात्मा को पाने का व्रत हो , सुख दुःख में सम रहने का , ब्रह्मचर्य का व्रत हो | व्रत से दृढ़ता और दृढ़ता से श्रद्धा व श्रद्धा से परमात्म प्राप्ति 

श्रद्धा पूर्वा सर्व धर्मां, मनोरथ फल प्रदां । श्रद्धया साध्यते सर्वं । पुष्यते हरिः । 

शास्त्र वचन तुमने कई बार सुना होगा , साहित्य में भी है | पिछले वर्ष दिवाली के दिनों में बच्चों के शिविर की जो संख्या थी , इस वर्ष ११ गुनी | तो हे सुपुत्रों ! , इस पूनम के पर्व पर एक संदेसा पक्का कर लो मैं आत्मा हूँ , चैतन्य हूँ , साक्षी हूँ | अस्सी हज़ार करोड़ वर्ष विज्ञानी बताते हैं कहीं कहीं सृष्टि की उत्पत्ति , लेकिन उत्पत्ति स्थिति व प्रलय हो होकर मिट जाता है फिर भी जो नहीं मिटता उस अपने असली स्वरुप को जानूँगा | आजतक जीवन में क्या क्या होकर मिट जाता है उसको जानने वाला तुम्हारा आत्मा अमिट है |
तन बदलता है , मन बदलता है , मति बदलती है , उनकी बदलाहट का साक्षी कौन है ? युग बदलते हैं , प्रलय में कुछ नहीं रहता उसको जानने वाला कौन है ? वही गहरी नींद में कुछ नहीं होता न लेना देना न मन न बुद्धि फिर भी तुम खून संचार करते हो , शरीर की थकान मिटाते हो वही चैतन्य हो | उसी चैतन्य को जानने का इरादा किया था श्री हनुमानजी ने और राम शरण पहुँचे थे | श्री कृष्ण के प्यारे अर्जुन को विराट रूप के दर्शन के बाद भी इस आत्मज्ञान की श्री कृष्ण ने प्रसादी दी तब अर्जुन कहते हैं 
नष्टो मोह: स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत । स्थितोऽस्मि गतसन्देह: करिष्ये वचनं तव ।।१८.73।।

अब तो यहाँ जोधपुर की एकांत में ऐसा आत्मप्रसाद छलक रहा है जिसका शब्दों में वर्णन नहीं हो सकता | सतपात्र , सतशिष्य , दृढव्रती , संयमी , सदाचारी उस परमात्म प्रसाद को जल्दी चखेंगे |

ॐ शांति , ॐ आनंद , ॐ साक्षी 

संसार स्वप्ना साक्षी चैतन्य परमात्मा ............

शिवजी के वचन सत्य हैं "उमा कहूँ मैं अनुभव अपना , सत्य हरि भजन जगत सब स्वप्ना "

भजन का मतलब अपने आत्मा का रस आजाये | दुःख मनोगामी होता है , सच्चा सुख आत्मगामी होता है |सत्संग में बताया रात्रि का शयन व सुबह का जागरण अत्मगामी कर लो|

पूनम व्रत धरी तुम्हें जो अध्यात्मिक अनुभव हुए हैं , लिखने बैठोगे तो पोथियाँ भर जाएँगी | सारे अनुभवों का उद्गम व साक्षी का खज़ाना पाओ बस | 

ॐ आनंद ॐ माधुर्य 

धन्य माता पिता धन्यो .......शिवजी के वचन समझ लेना 

माघ स्नान का लाभ ले सको तो लेलो , शरीर ठंडी न सह सके तो मन से स्नान करलेना सूर्योदय से पहले |
 
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