Jodhpur se Agra Shivir keliye sandesh 7 May 2017
Jodhpur se Agra Shivir keliye sandesh 7 May 2017
आगरा में ऊँचे उद्देश्य के लिए एकत्रित हुए सभी भाई-बहनों ! 

मनुष्य जीवन दुर्लभ है एवं क्षणभंगुर है उसमें भी महापुरुषों का संपर्क और जीवन का उद्देश्य जानना और पाना परम परम सौभाग्य है
डॉ. बनूँ, सेठ बनूँ,आचार्य बनूँ... ये बनाये हुए उद्देश्य पूरे होने के बाद भी मनुष्य ऊँच-नीच योनियों में भटकता फिरता रहता है प्राणिमात्र का असली उद्देश्य अपने सत् स्वभाव, चेतन स्वभाव, आनंद स्वभाव को आत्मज्ञान से पाना है

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते

अपने गुरुकुल चलाने का उद्देश्य शिक्षक, शिक्षिकाएँ, आचार्य, गृहपति अपने कार्य को कर्मयोग, ज्ञानयोग बना दें उनके ऊँचे उद्देश्य का फायदा विद्यार्थियों को मिले उनका कुल खानदान धन्य हो जाय भगवान शिव माता पार्वती को कहते हैं

धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यंकुलोदभवः 
धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता

आप सभीको शाबाश है ! ऊँचे उद्देश्य को बनाना नहीं जानना है

छोटे आकर्षणों से बचकर शाश्वत आत्मा-परमात्मा का लाभ...
“आत्मलाभात् परम लाभम् न विद्यते | आत्मज्ञानात् परम ज्ञानम् न विद्यते आत्मसुखात् परम सुखम् न विद्यते ”

हम चाहते हैं आपको वह खजाना मिले व आपके द्वारा विद्यार्थी व समाज में प्रसाद-वितरण हो |

“प्रसादे सर्व दु:खानां हानिरस्योपजायते” उस प्रसाद से सारे दु:ख सदा के लिए मिट जाते हैं

शरीर चाहे महल में रहे, जेल में रहे, आप सच्चिदानंद में रहना जान लो - यही शुभकामना इससे बड़ी शुभकामना त्रिलोकी में नहीं है

शाबाश वीर ! धन्या माता पिता धन्यो....शिवजी का वचन तुम्हारे जीवन में सार्थक हो जायेगा

संत श्री आशारामजी बापू के हस्ताक्षर (जोधपुर जेल )

{7-5-2017}
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