पूज्य बापूजी का जोधपुर से दीपावली का पावन संदेश : 17 अक्टूबर 2017
पूज्य बापूजी का जोधपुर से दीपावली का पावन संदेश : 17 अक्टूबर 2017
पूज्य बापूजी का जोधपुर से दीपावली का पावन संदेश : 17 अक्टूबर 2017
84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म मिलता है, बड़ा दुर्लभ है। दुर्लभ होते हुए भी क्षणभंगुर है। कब कहां किस निमित्त मृत्यु हो जाए पता नहीं,उसमें भी महापुरुषों का संपर्क और भी दुर्लभ है।

दुर्लभो मानुषों देहो देहिनां क्षणभंगुरः।
तत्रापि दुर्लभम् मन्येत वैकुंठः प्रियदर्शनम्।।

वैकुंठपति के जो प्रिय है उन महापुरुष का दर्शन संपर्क अतः ऐसे दुर्लभ जीवन का, दीवाली की रात ईश्वर प्राप्ति के उद्देश्य से जब जागरण सत्संग की पुस्तक पठन उसमें विश्रांति व ॐ कार के जप में विश्रांति। हास्य,दीर्ध,प्लूत दिवाली की रात सभी साधक फायदा ले।

सोते समय ईश्वर गुरु के अनुभव में स्मरण में प्रीति करते-करते, आनंदपूर्वक विश्रांति पाते पाते नींद आ जाए वह योग निद्रा का काम करेगी और नूतन वर्ष शांत अंतरात्मा रस से संपन्न चित्त हरि शरणम्। यह और वह के रूप में मैं व मेरे के रूप में सब एक सच्चिदानंद की अभिव्यक्ति है।

ॐ आनंद.. ॐ माधुर्य.. सोहम् .. शिवोहम्..। उस उच्च ज्ञान उच्च भाव में जो अपने से अलग दूर व दुर्लभ ईश्वर को मानता है,शास्त्र कहते हैं अंधेन कूपेन प्रविष्यन्ति -> वह अंधे कूप में प्रवेश करता है।
अतः अंतरात्म देव को ही जहां से शरीर मन बुद्धि चित्त सुख-दुख जानने की सत्ता स्फूर्ति व चेतना आती है वही चैतन्य आत्म स्वरुप ईश्वर तुम्हारा अपना आपा है। दूर नहीं दुर्लभ नहीं परे नहीं पराया नहीं। 
नूतन वर्ष के दिन जब मौका मिले पूछते रहना अपने निर्मल नर-नारी में छुपे नारायण को । जो कभी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ता वह अंतर्यामी ईश्वर अभी भी तुम्हारे साथ है,महल में रहो चाहे जेल में..।

पूर्ण गुरु...हो गए साईं...।

बापू के बच्चे नहीं रहना कच्चे।
मंगल दिवाली..मंगल प्रभात.. नूतन वर्ष।

यह संदेश मेरे साधक तक अवश्य पहुंचें।

जोधपुर कारावास के भीतर वैकुंठधाम
आशाराम बापू के हस्ताक्षर भी है।
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