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1. Rishi Prasad: (Download the latest Rishi Prasad Abstracts by clicking here)

    Rishi Prasad is the largest circulated spiritual monthly magazine in the world. Mainly divine nectar of Pujya Bapuji's latest satsangs is published in this magazine along with information like Ashram's welfare activities and various other useful information like health related tips, etc.

          ► There are about 2 Million Rishi Prasad subscribers across the world.

          ► With its ever increasing demand, Rishi Prasad is now being published in multiple languages like Hindi, English, Gujarati, Marathi, Telugu, Oriya etc.

 

2. Lok Kalyan Setu:

    Lok Kalyan Setu is a monthly magazine covering various ashram activities and is published in Hindi & Gujarati. 

 

  
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28 Aug 10,  जो यहाँ मिला वह कहीं नहीं

सचमुच, यह भारत देश का परम सौभाग्य है कि संत श्री आसाराम जी बापू जैसे ब्रह्मज्ञानी संत यहाँ पर मौजूद हैं। अन्य संस्कृतियाँ तो उदय हुई और चली गयीं पर शाश्वत सनातन धर्म ऐसे संतों की बदौलत आज भी खड़ा है। मैं हिन्दू संस्कृति को विश्व की महानतम संस्कृति मानता हूँ कि मुझे पूज्य बापू जी से मंत्रदीक्षा मिली है और उनके सान्निध्य में रहने का अवसर मिला है। भारतीय लोग निश्चय ही धन्य हैं कि यह संस्कृति उन्हें धरोहर में मिली है और मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि यह चिरस्थायी हो।

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28 Aug 10,  एक प्रसाद से कई प्रसाद

मैंने श्रद्धापूर्वक, सच्चे मन से, पूरे विश्वास के साथ 'श्री आसारामायण' के 108 वर्ष बाद एक बेटा हुआ। बेटा 2 महीने का हुआ था कि मेरी 6 वर्ष से रूकी हुई नौकरी भी मुझे मिल गयी। मेरी वीरान जिंदगी अचानक यूँ खुशियों से भर गयी। यह सब मेरे पूज्य बापू जी की कृपा से ही सम्भव हुआ है।

 

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28 Aug 10,  विद्यार्थियों की दैनंदिनी

प्रतिदिन प्रत्येक प्रश्न के सामने उत्तर लिख दो। चार-छः माह के अनन्तर आप अपने में महान परिवर्तन पायेंगे। आप पूर्णतः रूपांतरित हो जायेंगे। इस आध्यात्मिक दैनंदिनी के पालन से आपकी आश्चर्यजनक रूप से उन्नति होगी।

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28 Aug 10,  उसके लिये क्या असम्भव है !

गुरुपत्नी को कुण्डल देकर उत्तंक गुरु के पास गये। समाचार सुनकर गुरु ने कहाः "इन्द्र मेरे मित्र हैं। वह गोबर अमृत था, उसी के कारण तुम पाताल में जा सके। मैं तुम्हारे साहस से बहुत प्रसन्न हूँ। अब तुम प्रसन्नता से घर जाओ।" इस प्रकार गुरु और गुरुपत्नी का आशीर्वाद पाकर उत्तंक अपने घर गये।

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27 Aug 10,  संकल्पशक्ति का प्रतीकः रक्षाबंधन

सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम्।

सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।

'इस पर्व पर धारण किया हुआ रक्षासूत्र सम्पूर्ण रोगों तथा अशुभ कार्यों का विनाशक है। इसे वर्ष में एक बार धारण करने से वर्ष भर मनुष्य रक्षित हो जाता है।'

(भविष्य पुराण)

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