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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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पूज्य बापूजी के उत्तम स्वास्थ्य का रहस्य
Admin

पूज्य बापूजी के उत्तम स्वास्थ्य का रहस्य

हरि, हरि बोल | हरि ॐ, ॐ, ..........प्रभुजी ॐ, प्यारे ॐ, मेरे जी ॐ, आनंद ॐ, माधुर्य ॐ, गुरूजी ॐ, हरि ॐ, ॐ, .........  | हा, हा, हा...... | बैठो लाला, लालियाँ | 
कल रात को मेरे को देखने वालों ने कहा बापूजी आप बहुत अच्छे लगते हो | बहुत, मैंने कहा के स्वस्थ लगता हूँ | के बहुत बढिया लगते हो | तो मैंने हँसते-हँसते कहा के मैं क्यों बढिया लगता हूँ बताउं तुमको | बोले हाँ | तुम तो एक जगह रहते हो तो शरीर सेट हो जाता है | हम तो आज इधर, अभी इधर हैं, रात को बम्बई में होंगें और फिर कल इंदौर में होंगें | और २ दिन के बाद, ३ दिन के बाद कहीं होंगें | तो शरीर, हवा, पानी, ये, खान-पान सब बदलता है | और मैं लापरवाही से रहता हूँ | जो मिल गया खा लिया, जैसा आया | तो मैं जितना बदपरहेज रहता हूँ तो मुझे तो हॉस्पिटल में ही रहना चाहिए | लेकिन मैं ये प्राकृत नियम जनता हूँ तो ठीक-ठाक भी हो जाता हूँ | तो आप भी ऐसे नियम जान लो, ठीक-ठाक हो जाओ | तो स्वस्थ रहने का मेरे पास एक कुंजी है | मैं आपको वो कुंजी बता देता हूँ | एक किलो हम भोजन करते हैं, लगभग | २ किलो पानी पीते हैं | और स्वासो स्वास २१,६०० लेते हैं | ९,६०० लिटर हवा लेते हैं और छोड़ते हैं | उस में से १० किलो खुराक की शक्ति हम हासिल करते हैं | तो १ किलो भोजन में से मिलता है उससे १० गुना स्वासों-स्वास से हम लेते हैं | तो ये बात मैंने शास्त्रों से पढ़ी तो मैं क्या करता हूँ ? गाये के गोबर और चंदन से बनी गौ-चंदन अगरबत्ती जलाता हूँ, अगर मोटी-मोटी है तो | फिर उसमें घी, ड्रॉपर है, जो आँख में ड्राप डालते हैं ना ऐसा छोटा सा ड्रॉपर | अथवा तो छोटी-छोटी प्लास्टिक की शीशियाँ हैं उसमें तेल रखता हूँ | अच्छा कोई तेल, एरेंडी का तेल, खोपरे का तेल अथवा गाये का घी | उस अगरबत्ती पे बुँदे डालता रहता हूँ | मैं अपना नियम भी करता हूँ और कमरे बंद कर देता हूँ | और कपड़े, एक कच्छा पहनता हूँ बाकी सब कपड़े हटा देता हूँ | तो मेरे रोम कूपों के द्वारा, मैं आसन करता हूँ, प्राणायाम करता हूँ तो रोम कूपों के द्वारा,और स्वास के द्वारा वो मैं शक्ति शाली प्राण वायु लेता हूँ | १० दंड बैठक करता हूँ स्वास रोक के | तो इससे क्या के मेरे को हार्ट-टेक नहीं होगा | हाई बी.पी., लो बी.पी | वो तो खं-खं मन्त्र तुम लोगों को देता हूँ, मेरे को जपना नहीं पड़ेगा | हार्ट-टेक का भय ही नहीं है तो काहे को मैं जपूँ ? ये तो तुम्हारे लिए किया | तो स्वास रोककर दंड बैठक कर लेता हूँ १० | उसमें पुरे शरीर की नस-नाड़ियों की बिलकुल घुटाई-पिटाई-सफाई-छटाई हो जाती है | फिर वज्रासन में बैठकर स्वास बाहर रोक दिया, और पेट को हिलाने वाला जो तुमको सिखाता हूँ, वो करता हूँ, दब के, मजबूत | फिर सर्वांग आसन करता हूँ ५ मिनट | फिर ५ पश्चिमुतान आसन करता हूँ ५-६ मिनट | उसके बाद थोडा-बहुत ये जो तुमको सिखाता हूँ, वो किया तो किया | सूर्य के किरण मिले ऐसा धुप में घूमता हूँ कच्छा पहन के | और कभी-कभी रात को, दिन को देर से खाया अथवा थोडा पेट भारी है अथवा यात्रा बहुत की है और थकान है तो रात को खाए बिना जल्दी सो जाता हूँ | तो खाने-पीने में गडबडी है, अथवा थकान है वो सब उपवास से रोग को और थकान को जीवनी शक्ति ठीक कर देती है उपवास से | लंघंम परम अयुशद्हम || ये इसलिए बता रहा हूँ के तुम भी उपवास का फायदा लेना | फिर कभी शरीर ढीला-ढाला, ये-वो होता है, तो कुवार-पाठे का रस पी लेता हूँ सुबह | और कभी देखता हूँ कुवार-पाठे के रस की अपेक्षा तुलसी के पत्तों का रस और नींबू ठीक रहेगा तो वो पी लेता हूँ | ऐसे करके पेट को और मस्तक को टना-टन रखता हूँ तो बाकी सब टना-टन रहता है | मेरा सेवक कभी अंजीर भीगा के रखता है, मैंने बोला हूँ है, एक बादाम भीगा के रखता है - कागजी बादाम | महीने में १५-२० बादाम तो मैं चबा ही लेता हूँ | रोज भिगाता है, कभी भूल जाता है या कभी मैं छोड़ देता हूँ | फिर भी १५-२० बादाम तो चबा के लेता हूँ | एक बादाम, लोग बादाम खाते हैं, ताकत के लिए, लेकिन बेवकूफी है | बादाम या काजू या पिस्ता अधिक नहीं खाना चाहिए | भिगो कर वो सुपाच्य बनते हैं | और एक बादाम चबा-चबा के उसका पानी बना के खा लो तो १० बादाम खाने की ताकत आती है | और पेशाब रुक के आना, ज्यादा आना अथवा पेशाब का कंट्रोल छुट जाना -बड़ी उम्र में ये तकलीफ होती है | लेकिन बादाम चबाने वाले को नहीं होगी | इससे वो भी ठीक है | फिर बहेरापन हो जाता है बड़ी उम्र में तो मैं कान में तेल डाला करता हूँ | सिर में जो तेल डालते हैं वही कान में डालता हूँ २-२ ड्राप, ४-४ ड्राप | लेटकर गाये के घी का नस्य लेता हूँ जिससे दिमाग मस्त रहता है | सिर दर्द आदि की तकलीफें नहीं हो सकती | ज्ञान तंतु भी रुष्ट-पुष्ट रहे, जवानी बरकरार रहे | ये सब इसीलिए बोलता हूँ के सब बड़े-बड़े जो अधिकारी है IAS officer, IPS अथवा उनके बड़े-बड़े सचिव बोले हम बापू से मिलना तो चाहते हैं लेकिन बहुत भीड़ है और हमारा पोस्ट ऐसा है | आपके बापू क्या खाते हैं ? अरे बबलू ! खाने से सब कुछ नहीं होता है | समझने से सब कुछ होता है | कितनी भी भारी चीज खाओ उससे आपकी तबियत बढिया होगी - नहीं | पहले खाया हुआ पच जाये, फिर दूसरा खाओ | खाने पर खाया तो सत्यानाश | ऐसी गलती तो कभी-कभी मैं भी करता हूँ तो फिर खाते हैं तो खा लेते हैं बाद में शरीर भारी रहता है | आसन-वासन करके पहले का खाया हुआ बिलकुल चट हो जाये | जैसे सुबह रोज दूध पीता हूँ | आज सुबह भी दूध लाया था | लेकिन नहीं पिया दूध मैंने | थोडा पेट भारी था | कल रात को दूध पिया था | इसीलिए आज दोपहर को पेट भारी था तो मैंने आज नहीं पिया | १२-१ बजे जब भी मैं गया ना, ११.३०-१२ | इधर से ११ बजे गया फिर नियम-वियम कस के किया | कल की थकान मिटाई | फिर दूध लाया | दूध नहीं अनुकूल पड़ा | यहाँ जो भोजन बना था उसका सेम्पल आया, तो उसका जरा दाल का पानी, थोडा ये-वो, थोडा हल्का-फुल्का खा लिया | फिर इधर सत्संग करने आया | उसके बाद इधर गया, उधर गया | अभी थोडा-बहुत ये किया | तो रात को देर से नहीं खाना चाहिए | रात को मैं भोजन नहीं करता हूँ | कभी ६ महीने में एक-आध बार खाना खाया होगा | रोटी, सब्जी, ऐसा | कभी खाया होगा तो, नहीं तो नहीं | रात को सुपाच्य खाना चाहिए | तो दूध बड़ा सुपाच्य है | तो रात को दूध लेता हूँ | लेकिन दूध भी अगर ९-९.३० के बाद लूँगा तो थोडा कम कर दूंगा | ज्यों सूर्य अस्त होता है त्यों हमारी जठरा मंद होती है | तो स्वस्थ रहना है तो सूर्य अस्त से पहले-पहले रात्रि का भोजन कर लेना चाहिए | लेकिन आप नहीं कर पायोगे तो ७ बजे-७.३०-८ | लेकिन ज्यों देर होती है त्यों भोजन सादा | अब गर्मी की सीजन है, पाचन कमजोर रहता है | तो दाले और राजमा खाने वाला पक्का बीमार मिलेगा | ये राजमा और दाले खाने की सीजन नहीं है | मुंग की दाल छिलके वाली वो भी पतली | १०० ग्राम दाल तो १ किलो पानी उबाल-उबाल के ११०० में से १ किलो जैसी दाल बने | वो दाल सुपाच्य, बाकी तो जो मोटी, घाटी दाल छाती जलती रहेगी | शरीर भारी रहेगा | जाड़ों में तो दाल पच जाती है लेकिन गर्मी में दाल पचाना सबके बश का नहीं है | फिर भी सुबह-सुबह, आया था ११.३०-१२ बजे तो मैंने दाल का उपर-उपर का पानी लिया | अब क्या होता है, के अब गर्मी है तो कफ पिघलेगा तो थोडा खाँसना-वँसना आएगा | ब्लोकेज आ जायेगा थोडा | एडमिट हो गये ओर्रिसा में | डॉक्टर बोलते हैं ऑपरेशन कराओ | अरे कफ पिघल के आया है, थोडा ब्लोकेज है, अपना आश्रम, दिल्ली का आश्रम है, अहमदाबाद का आश्रम है | वैद्य से सलाह ले लो, वो २-२ चम्मच ब्लोकेज खोलने वाला रस दवा का पी लो, खुल जायेगा थोड़े दिन में | अथवा तो कुवार-पाठा लेना चालू करो, बहुत सारे रोग उससे मिटते हैं | तुलसी के २५-३० पत्तों का रस और एक नीबूं थोड़े दिन लो बहुत सारे रोग उससे मिटते हैं | सूर्य के किरणों में लंबे प्राणायाम करो और रोको | थलबस्ती करो १३२ प्रकार की बीमारी ऐसे ही मिटती है | नारंगी सुपाच्य है, त्रिदोष नाशक है | तो  छोटी-छोटी २ नारंगी भी मैंने कहा बापू बनाऊंगा उसको भी | आपको पता नहीं, आप बाहर से देखते हैं, मैं तो बड़ा, मेरे में बहुत शक्ति है | मैं नारंगी को बापू बना देता हूँ | दाल के पानी को बापू बना देता हूँ | सब्जी को बापू बना देता हूँ | बोलो ! ऐसा मैं चैतन्य हूँ और तुम भी ऐसे ही हो | तुम बनाते के नहीं बनाते | तुम रोटी को मनुष्य बना देते हो | रोटी में से बेटा-बेटी बना देते हो | तुम्हारा चैतन्य कितना समर्थ है | तुम में वहेम है के कोई श्रृष्टि कर्ता आकाश-पाताल में बैठा है | वो ही हमको नचा रहा है, चला रहा है | नहीं-नहीं, वो तुम्हारे से दूर होकर कहीं बैठा है नहीं | तुम्हारा ही आत्मा ही वो श्रृष्टि कर्ता है | रात को सपने में तुम नहीं करते क्या ? तुम जिस चीज को अपनी मानते हो और प्यारी मानते हो तो वो महत्वपूर्ण हो जाती है | और जिससे नफरत करते हो वो, मित्र आजकल प्यारा लग रहा था | अब किसी बात पे अड़ गये तो शत्रुता हो गयी, अब उसके दुर्गुण दीखते हैं | तुम जिसको ठुकरा दो वो तुच्छ हो जाता है और जिसको अपना लो वो महत्वपूर्ण हो जाता है | तो तुम्हारा अंतरात्मा कितना महत्व दाता है | अपने अंतरात्मा में शांत बैठा करो | दो मिनट भी निसंक्ल्प बैठो तो बड़ी शक्ति प्राप्त होती है | तो मैं रात्रि को सोते समय भी थोडा सत्संग सुनते-सुनते सोता हूँ | निसंक्ल्प होता हूँ | सुबह उठता हूँ तभी भी रात्रि का ध्यान में सुबह उठता हूँ | इससे मेरा अध्यात्मिक खजाना भी भरपूर रहता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है | मेरे को छुपाने की आदत नहीं है | खुली किताब हैं | किसी ने पूछा लेकिन होलसेल में बता दूँ क्यों एक-दो को बताउं | साधना-वाधना मैं कोई ज्यादा देर माला नहीं फिराता हूँ | थोड़ी सी माला का नियम है वो कर लिया बस बाकी तो भगवत शांति में, भगवत ध्यान में | 

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

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कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

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