प्रश्नोत्तरी

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आध्यात्मिक

Admin
/ Categories: PA-000437-Q&A

क्या गृहस्थी बहने ईश्वरप्राप्ति के लिए ॐकार की १२० माला कर सकती है ?

पूज्य बापूजी :- पहली बात, तुम अपने को गृहस्थी मान कर माला करो ही मत। 'हम स्त्री है, पुरुष है, अयोग्य है, पापी-दुराचारी है अथवा हम बढ़िया है' यह सारी गड़बड़ छोड़ दो। 'हम भगवान के थे, है और रहेंगे। भगवान के होकर हम अपने को चैतन्य स्वाभाव में जागृत करेंगे।' ईश्वरप्राप्ति सभी कर सकते है। ॐकार की उपासना से शुरू में थोड़ा विक्षेप जैसा लगेगा लेकिन आगे ठीक हो जायेगा। अर्थ के साथ जप करे और आत्मा में शांत हटे जाए। 


ऋषि प्रसाद 

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तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 9126 Article rating: 4.3
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

मन्त्रजाप के समय कभी ध्यान लगता है कभी इधर उधर भतकता है जो ना सोचने की कोशिश करो वही विचार अधिक आते है इससे बचने की युक्ती बताइये प्रभू?

Admin 0 1224 Article rating: No rating

 मन्त्रजाप के समय कभी ध्यान लगता है कभी इधर उधर भतकता है जो ना सोचने की कोशिश करो वही विचार अधिक आते है इससे बचने की युक्ती बताइय

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 6001 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 3239 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 9221 Article rating: 4.3
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 6595 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 5842 Article rating: 3.5
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