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आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 8323 Article rating: 4.3
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 478 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

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ध्यान विषयक

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

Admin 0 5300 Article rating: 4.3
श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

ध्यान की अवस्था में कैसे पहुंचे ? अगर घर की परिस्थिति उसके अनुकूल न हो तो क्या करे ?

Admin 0 3010 Article rating: No rating

ध्यान  की  अवस्था  में  कैसे  पहुंचे ? अगर  घर  की  परिस्थिति  उसके  अनुकूल  न  हो  तो  क्या  करे ?

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/ Categories: Rishi Prasad QA

बापूजी ! मैं स्वासोच्छवास में सुमिरन करना चाहती हूँ लेकिन वह मुझसे होता नही है। मैं बहुत कोशिश करती हूँ। कृपया आप कुछ करे।

पूज्य बापूजी :- अच्छा ! कोशिश करती हो और नही होता है तो यह बात संभव नही है। तुम रात को सोती तो होगी ! सभी लोग सोते है। सोते समय स्वासोच्छवास का अभ्यास चालू करके सो जाओ, सुबह वह स्वाभाविक होगा। नही तो सुबह उठो, थोड़ी देर चालू करो और दिन में भी बीच-बीच मे थोड़ा करते जाओ, फिर अपने आप होगा। और होता है तो ठीक और नही होता है तो भगवान को प्रार्थना करो : 'महाराज ! स्वासोच्छवास का अभ्यास तो नही होता लेकिन मैं तो तुम्हारी हूँ।'
      'मेरा पति गुड्डुजी है, मेरा पति छुगलूजी है...' इसका अभ्यास करना पड़ता है कि मान लेना पड़ता है ? 'मैं फलानी हूँ, फलाने की पत्नी हूँ।' अब अभ्यास करो चाहे मान लो,मर्जी तुम्हारी ! तुम मान लो कि 'हम भगवान के है।' स्वासोच्छवास का अभ्यास नही होता है तो मन मे दुःख-सुख कुछ भी आ जाये, मरने दो ! 'दुःख-सुख, चिंता-लाभ यह तो संसार का है, हम तो प्रभु के है।' - ऐसा मानने से स्वासोच्छवास के अभ्यास का फल तुम्हारे हृदय में फलित होने लगेगा।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 5076 Article rating: 3.3
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