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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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बापूजी ! मैं स्वासोच्छवास में सुमिरन करना चाहती हूँ लेकिन वह मुझसे होता नही है। मैं बहुत कोशिश करती हूँ। कृपया आप कुछ करे।

पूज्य बापूजी :- अच्छा ! कोशिश करती हो और नही होता है तो यह बात संभव नही है। तुम रात को सोती तो होगी ! सभी लोग सोते है। सोते समय स्वासोच्छवास का अभ्यास चालू करके सो जाओ, सुबह वह स्वाभाविक होगा। नही तो सुबह उठो, थोड़ी देर चालू करो और दिन में भी बीच-बीच मे थोड़ा करते जाओ, फिर अपने आप होगा। और होता है तो ठीक और नही होता है तो भगवान को प्रार्थना करो : 'महाराज ! स्वासोच्छवास का अभ्यास तो नही होता लेकिन मैं तो तुम्हारी हूँ।'
      'मेरा पति गुड्डुजी है, मेरा पति छुगलूजी है...' इसका अभ्यास करना पड़ता है कि मान लेना पड़ता है ? 'मैं फलानी हूँ, फलाने की पत्नी हूँ।' अब अभ्यास करो चाहे मान लो,मर्जी तुम्हारी ! तुम मान लो कि 'हम भगवान के है।' स्वासोच्छवास का अभ्यास नही होता है तो मन मे दुःख-सुख कुछ भी आ जाये, मरने दो ! 'दुःख-सुख, चिंता-लाभ यह तो संसार का है, हम तो प्रभु के है।' - ऐसा मानने से स्वासोच्छवास के अभ्यास का फल तुम्हारे हृदय में फलित होने लगेगा।
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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

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