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परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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आश्रमवासी द्वारा उत्तर

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क्या गृहस्थी बहने ईश्वरप्राप्ति के लिए ॐकार की १२० माला कर सकती है ?

पूज्य बापूजी :- पहली बात, तुम अपने को गृहस्थी मान कर माला करो ही मत। 'हम स्त्री है, पुरुष है, अयोग्य है, पापी-दुराचारी है अथवा हम बढ़िया है' यह सारी गड़बड़ छोड़ दो। 'हम भगवान के थे, है और रहेंगे। भगवान के होकर हम अपने को चैतन्य स्वाभाव में जागृत करेंगे।' ईश्वरप्राप्ति सभी कर सकते है। ॐकार की उपासना से शुरू में थोड़ा विक्षेप जैसा लगेगा लेकिन आगे ठीक हो जायेगा। अर्थ के साथ जप करे और आत्मा में शांत हटे जाए। 


ऋषि प्रसाद 

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Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

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