प्रश्नोत्तरी

परिप्रश्नेन विडियो

1 2 3 4 5

आध्यात्मिक

तात्त्विक

जगत है ही नहीँ, उसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?

Admin 0 7685 Article rating: 4.1
 पूज्य बापूजी : जगत है भी, जैसे सपना दिख रहा है उस समय सपना है ; ये जगत नहीँ है ऐसा नहीँ लगता । जब सपने में से उठते हैं तब लगता है कि सपने की जगत नहीँ हैं । ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जगते हैं तो ,फिर जगत की सत्यता नहीँ दिखती ; तो बोले जगत नहीँ हैं । 
RSS
1234

आश्रमवासी द्वारा उत्तर

How to obtain Saraswatya mantra diksha?

Admin 0 464 Article rating: No rating

Guruji I wanted a saraswati mantra diksha from you. I want to excel in my studies. Im surprised to see so much miracles and blessings you are showering upon your followers

RSS
123578910Last

ध्यान विषयक

Admin
/ Categories: PA-000444-Meditation

निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?

साधक : श्री हरि प्रभु ! चालू सत्संग में जब मन निःसंकल्प अवस्था में विषय से उपराम होकर आने लगता है ,तो प्रायः निद्रा का व्यवधान क्यों होता है और उसका निराकरण कैसे होता है प्रभु ?
  
    पूज्य बापूजी : निद्रा का व्यवधान क्यों होता है ! ये शरीर में थकान होती है तो निद्रा का व्यवधान होता है ,अथवा तो भीतर का रस नही मिलता तो व्यवधान होता है । तो इसमें निद्रा ठीक ले लो ,नही तो थोड़ी निद्रा आती है तो डरो मत, निद्रा के बाद फिर शांत हो जाओ । व्यवधान नही हैं फिर निद्रा भी चिंतन करते करते थोड़ा निद्रा में चले गए ,थकान मिटेगा तो फिर चिंतन में चले आओ। इतना परिश्रम नही करो की साधन में बैठते ही निद्रा आजाये और इतना जागो मत की निद्रा की कमी रहे और उतनी निद्रा कम मत करो । इतनी निद्रा ज्यादा मत करो की मन में शांत होने का समय न मिले । ठीक से नींद करो ,ठीक से ध्यान भजन का समय निकालो और रूचि भगवान में होगी प्रीती तो निद्रा नही आयेगी और थकान होगी तो निद्रा आयेगी । थकान भी ना हो और थकान में निद्रा आती है तो अच्छा ही है । स्वास्थ्य के लिए ठीक ही है ।
Previous Article ध्यान के समय कैसा भाव होना चाहिए ?
Next Article आत्मचिंतन कैसे करना चाहिए ? आत्मसाक्षात्कार हो जाने पर पूरी दुनिया कैसी लगती है ?
Print
4712 Rate this article:
4.3
Please login or register to post comments.

EasyDNNNews

गुरुदेव ! सदा और सर्व अवस्थाओ में अद्वैत की भावना करनी चाहिए पर गुरु के साथ अद्वैत की भावना कदापि नही करनी चाहिए - ऐसा जो कहा गया है उसका रहस्य समझाने की कृपा करें।

Admin 0 7243 Article rating: 4.2
1 दिसंबर 2010
निरंतर अंक - 216

गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन में संशय उत्पन्न हो जाता है

Admin 0 4857 Article rating: 4.3
1 जनवरी 2011
अंक - 217
प्रश्न :- गुरुदेव ! सबकुछ जानते हुए भी मन मे संशय उत्पन्न हो जाता है। 
पूज्य बापूजी :- सब कुछ क्या जानते है ?
प्रश्नकर्ता :- जैसे कोई सही चीज हो तो उसके विषय मे मन में द्वंद उत्पन्न होने लगता है कि यह ऐसा है कि ऐसा है ?



RSS
123

Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

पूज्य श्री - सुरेशानंदजी प्रश्नोत्तरी

Admin 0 4259 Article rating: 3.4
RSS
12