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वटवृक्ष नहीं कल्पवृक्ष कहो !
मेरी तीन साल की बेटी जन्म से ही गूँगी थी। कई जगहों पर उसका इलाज करवाया, भूआ-भोपाओं को भी दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर मैंने पूज्य बापूजी की शरण ली। मेरे परिवार में मेरे अलावा अन्य सभी लोगों को बापू जी से मंत्रदीक्षा पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैंने बापू जी से हृदयपूर्वक प्रार्थना की एवं बड़ बादशाह के आगे मनौती मानी कि मेरी बच्ची बोलने लग जाय तो मैं उसे अमदावाद आश्रम दर्शन कराने ले जाऊँगा।
मेरी प्रार्थना स्वीकार हुई। 6 माह पूर्व से ही उसने बोलना शुरू किया है। मैं उसे आश्रम में ले गया और अपने साथ परिक्रमा करायी। पूज्य गुरूदेव की असीम कृपा का वर्णन मैं शब्दों में नहीं कर सकता। कलियुग में पूज्य बापू जी अवतारी महापुरूष हैं एवं उनके द्वारा शक्तिपात किये वटवृक्ष साक्षात् कल्पवृक्ष हैं।

जितेन्द्र पंडया,

बाँसवाड़ा (राजस्थान)

स्रोतः ऋषि प्रसाद, जून 2009, अंक 198, पृष्ठ संख्या 30
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