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मौत के मुख से वापसी

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मौत के मुख से वापसी

परम पूज्य सदगुरुदेव से मेरा पूरा परिवार दीक्षित है। 15 अप्रैल, 1994 की घटना हैः

मेरी माँ तीसरी मंजिल से उतरकर कपड़े धोने के लिए नीचे गई। उसके शरीर में एकाएक कम्पन होने लगा और आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा। फिर उसी हालत में न जाने कैसे तीसरी मंजिल की बालकनी में आई और वहीं पर धड़ाम से गिर पड़ी। उसके गिरने की आवाज सुनकर हम सभी वहाँ पहुँचे तो देखा कि उसका मुँह टेढ़ा होता जा रहा है। कुछ क्षण बाद वह बेहोश हो गयी। उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने कहा कि सिर की नस फट गई है और दायें सिर से लेकर दायें पाँव की एड़ी तक लकवा (पैरालीसिस) मार गया है। इनका बच पाना मुश्किल है। तीन दिन तक हम कुछ नहीं कह सकते। घटना के दूसरे दिन मैं और मेरी बहन दोनों पूज्य बापू के आश्रम में पहुँचे। पूज्य श्री उस समय वहाँ नहीं थे तो मेरी बहन ने पूज्य माता जी को पूरी घटना बतायी। पूज्य माता जी ने कहाः
“बड़ बादशाह की परिक्रमा करो, वहाँ का जल पिलाओ, श्रीगुरुगीता का पाठ करके पानी में निहारते हुए स्वास्थ्य मंत्र का जप करो और उस पानी को पिला दो। सब ठीक हो जायेगा।”

….और हुआ भी ऐसा ही। मेरी माँ आज भी ठीक ढंग से हँसती, बोलती व चलती है। डॉक्टर लोग यह देखकर दंग रह गये ! यह पूज्य गुरुदेव की करुणा-कृपा का ही फल है।
मेरी माँ ने ठीक होने के बाद बतायाः
“जब मेरे सिर में चक्कर आने लगा व आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा तो अचानक मुझे पूज्य
बापू का स्मरण हो आया और मैं गुरुमंत्र जपने लगी। फिर मैंने देखा कि श्वेत वस्त्रधारी दो दिव्य पुरुष मेरा हाथ पकड़कर तीसरी मंजिल की बालकनी तक छोड़ने के लिए ले जा रहे है। उसके बाद क्या हुआ, मुझे कुछ पता नहीं। जब मैं अस्पताल में थी तो पूज्य बापू खिड़की में मंद-मंद मुस्कराते हुए दिखे। फिर गहरी नींद में चली गयी तो पूज्य श्री मुझे कभी सत्संग करते दिखते, तो कभी हँसते-मुस्कराते व झूमते हुए दिखाई देते। डॉक्टरों में भी मुझे पूज्य श्री ही दिखाई देते। पूज्य गुरुदेव की कृपा से मुझे नई जिन्दगी मिली है। धन्य हैं गुरुदेव ! आप धन्य हैं !!”

‘सभी शिष्य रक्षा पाते हैं, सूक्ष्म शरीर गुरु आते हैं….’ यह बात इस घटना से सिद्ध होती है।

संजय एस. शर्मा
सी-26, रम्याकुंज सोसायटी, जलधारा सोसायटी के पास,
इसनापुर वटवा रोड, इसनपुर, अमदावाद
ऋषि प्रसाद, अंक 78, पृष्ठ संख्या 28, जून 1999
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