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Alakh Ki Aur
Alakh Ki Aur

Alakh Ki Aur

जिनके सान्निध्य मात्र से आदमी की सहजता-सरलता छलकने लगती है, सुषुप्त अलख का आनंद प्रकट होने लगता है, ऐसे सम्प्रेक्षण-शक्ति के प्रदाता, भक्ति, ज्ञान और योग के अनुभवनिष्ठ ज्ञाता पूज्यपाद संत श्री आसारामजी बापू की सुमधुर सरिता से कुछ अमृतरस आपके समक्ष प्रस्तुत हैं।

संतों की सहज बोलचाल में सत्य छलकाता हुआ, जिज्ञासुओं के दिलों को झकझोरता हुआ, रामरस से सराबोर करता हुआ, अपने अलख स्वभाव को जगाता हुआ चिन्तन-प्रवाह लिपिबद्ध करके साधकों के करकमलों में अर्पित करने का आशय यही है कि जो पूज्यश्री के प्रत्यक्ष सान्निध्य से लाभान्वित हैं वे पुनः पुनः परमानंद की यात्रा में घर बैठे अग्रसर हो सकें और यहाँ प्रत्यक्ष सान्निध्य में अनुभव का प्रत्यक्ष प्रसाद जिन सज्जनों को नहीं प्राप्त हुआ वे भी इस पुस्तक के द्वारा कुछ इशारे पाकर जीवन की गुत्थियों को खोलकर जीवनदाता का रस, उस अलख पुरुष का आनंद प्राप्त करने में सहभागी हों। अतः इस पुस्तक को बार-बार विचारने से अवश्य लाभ होगा।

 सेवा समिति आपकी सेवा में यत्किंचित् सफल हो रही है। इति शिवम्.....

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