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Yogyatra-4
Yogyatra-4

Yogyatra-4

   

ब्रह्मवेत्ता महापुरुषों की उपस्तिथि मात्र से असंख्य जीवों को दृष्ट-अदृष्ट, सांसारिक-अध्यात्मिक सहायता प्राप्त होती है | प्रातः स्मरणीय परम पूज्य सदगुरुदेव संत श्री आसारामजी बापू की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रेरणा से जो लोग लाभान्वित हुए है, उनके परिप्लावित हृदयों के उदगार एवं पत्रों को लिपिबद्ध किया जाय तो एक-दो नहीं, कई ग्रंथ तैयार हो सकते है | इस पुस्तिका "योगयात्रा-४" में भक्तों के अनुभवों की बगिया से चुनें हुए थोडे-से पुष्प हैं | भारतवर्ष के योगविज्ञान और ब्रह्मवेत्ताओं की अलौकिक शक्ति का वर्णन केवल कपोलकल्पित बातें नहीं है | ये हजार-दो हजार लोगों का नहीं बल्कि बापूजी के लाखों-लाखों साधकों का अनुभव है | इन विभिन्न प्रकार के अलौकिक अध्यात्मिक अनुभवों को पढने से हमारे हृदय में अध्यात्मिकता का संचार होता है | भारतीय संस्कृति व भारत की साधना-पद्धति की सच्चाई और महानता की महक मिलती है | नश्वर जगत के सुखाभास की पोल खुलती है | शाश्वत सुख की और उन्मुख होने का उत्साह हममें उभरता है | इन आध्यात्मिक अनुभवों को पढकर श्रद्धा के साथ अध्यात्मिक मार्ग में जो प्रवृत्ति होती है उसे यदि साधक जागृत रखे तो वह शीघ्र ही साधना की ऊँचाइयों कि छू सकता है | हजारों लोगों के बीच अपने स्नेही-मित्रों के समक्ष जो अनुभव कहे हैं उनकी प्रमाणितता में संदेह करना उचित नहीं है | उनके अनुभव उन्हीं की भाषा में...

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