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ब्रह्मरामायण का पाठ करने से शरीर की नश्वरता और ब्रह्म की सत्यता पक्की होती है |

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इश्वर प्राप्ति सहायक साहित्य

  • इश्वर की और 
  • मन को सीख 
  • निर्भय नाद 
  • जीवन रसायन 
  • दैवी सम्पदा 
  • आत्मयोग 
  • साधना में सफलता 
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  • जीते जी मुक्ति 
  • ब्रह्मरामायण
  • सामर्थ्य स्त्रोत 
  • मुक्ति का सहज मार्ग 
  • आत्मगुंजन 
  • परम तप 
  • समता साम्राज्य 
  • अनन्य योग 
  • श्री योग वाशिष्ठ महारामायण 

देशवासियों व सरकार के नाम पूज्य बापूजी का राष्ट्र-हितकारी संदेश

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आत्मसाक्षात्कार सहायक

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परिप्रश्नेन

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

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नारायण साईं जी की वाणी में ब्रह्मरामायण का पाठ

भारती श्रीजी के सान्निध्य में ब्रह्मरामायण का पाठ व व्याख्या

आत्मगुंजन


 

भगवद्गीता, राम गीता, अष्टावक्र गीता आदि कई गीताएँ हैं, इनमें सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है भगवद्गीता लेकिन तत्त्व ज्ञान में शक्तिशाली है अष्टावक्र गीता। यह छोटी सी है पर एकदम ऊँची बात कहती है। उसका अनुवाद किया भोला बाबा ने और उसे ‘वेदांत छंदावली’ ग्रंथ में छपवाया। उसमें से जितना अष्टावक्र जी का उपदेश है उतना हिस्सा लेकर अपने आश्रम ने छोटा सा ग्रंथ प्रकाशित किया और ‘श्री ब्रह्म रामायण’ नाम दिया। इसे पढ़ने से आदमी का मन तुरंत ऊँचे विचारों में रमण करने लगता है, खिलने लगता है। ऐसे दोहे, छंद, श्लोक, भजन याद होने चाहिए, ऐसे विचार स्मरण में आते रहने चाहिए। इधर-उधर जब चुप बैठें तो उन्हीं पवित्र व ऊँचे विचारों में मन चला जाये। ऐसा नहीं कि ‘मेरे दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा।’